डायबिटीज होने पर शरीर में ब्लड शुगर का लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है. डायबिटीज होने के दो कारण हो सकते हैं - शरीर में सही मात्रा में इंसुलिन न बनना या शरीर का इंसुलिन का सही प्रकार से उपयोग न कर पाना. डायबिटीज कई अन्य गंभीर रोगों का कारण बन सकती है और समय पर उपचार न किए जाने पर नसों, आंखों व लिवर आदि को नुकसान पहुंच सकता है. बेशक, डायबिटीज के लिए बाजार में कई दवाइयां उपलब्ध हैं. इनमें से कुछ दवाइयां खाने से पहले ली जाती हैं, तो कुछ खाने के बाद. ये पूरी तरह से दवा के प्रकार व रोगी की स्थिति पर निर्भर करता है.

आज इस लेख में हम यही समझने का प्रयास करेंगे कि डायबिटीज की दवाई लेने का सही समय क्या होता है -

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  1. डायबिटीज की दवाई कब लेनी चाहिए?
  2. डायबिटीज की दवाई लेते समय ध्यान रखने वाली बातें
  3. सारांश
डायबिटीज की दवा लेने का सही समय के डॉक्टर

डायबिटीज की दवा लेने का सबसे अच्छा समय दवा के प्रकार और मरीज को किस प्रकार की डायबिटीज है, उस पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए कुछ दवाइयां भोजन से थोड़ा पहले, कुछ भोजन से एकदम पहले और कुछ भोजन बाद ली जाती हैं. कुछ दवाइयां केवल दिन के पहले भोजन से पहले ही ली जाती हैं. इंसुलिन को दिन में कई बार इंजेक्शन के रूप में लिया जा सकता है या पंप द्वारा पूरे दिन नियमित रूप से लिया जा सकता है. सलाह लेते वक्त डॉक्टर सभी डोज के साथ-साथ सही समय भी बताते हैं. आइए, इसे थोड़ा विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं -

टाइप 1 डायबिटीज की दवा लेने का सही समय

टाइप-1 डायबिटीज में शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियास पर हमला करके उसे हानि पहुंचाता है. सही समय पर डायबिटीज की पहचान न होने पर यह पैंक्रियास को पूरी तरह से खराब कर सकती है. टाइप-1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन की कमी होती है. इसलिए, इसका इलाज इंसुलिन हार्मोन है. इंसुलिन के 4 प्रकार होते हैं. प्रकार के अनुसार हर भोजन से उचित समय पहले इंसुलिन लिया जाना चाहिए. सही समय की जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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टाइप 2 डायबिटीज की दवा लेने का सही समय

टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन हार्मोन को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है. कुछ मामलों में इसका कारण जरूरी मात्रा से कम इंसुलिन बनना हो सकता है. इस टाइप को लाइफस्टाइल व खान पान में बदलाव करके और व्यायाम से कंट्रोल किया जा सकता है. यदि इसके बावजूद शुगर की मात्रा कंट्रोल न हो रही हो, तो दवाई लेना आवश्यक है. इसके बारे में नीचे बताया गया है -

  • अल्फा-ग्लूकोसिडेस इनहिबिटर: ये दवा शरीर में भोजन से प्राप्त शुगर और स्टार्च के इस्तेमाल को धीमा करती हैं. इससे रक्त में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है. इस टैबलेट को भोजन से एकदम पहले लेने की सलाह दी जाती है.
  • बिगुआनाइड: ये दवा लिवर द्वारा उत्पादित ग्लूकोज की मात्रा को कम कर देती हैं. इस टैबलेट को भोजन के साथ या भोजन के बाद लेना चाहिए.
  • ग्लूकागन पेप्टाइड्स: ये दवाइयां शरीर में ग्लूकागन पेप्टाइड हार्मोन की मात्रा बढ़ाती हैं. यह हार्मोन भूख को कम करता है और इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाता है. इस टेबलेट को भोजन से पहले 60 मिनट के भीतर लेना चाहिए.
  • सल्फोनीलुरेस: ये दवा पैंक्रियास को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए मदद करती है. इस टेबलेट को भोजन के तुरंत बाद लेना चाहिए. इस दवा को नियमित रूप से लेना चाहिए. डॉक्टर के कहे बिना बीच में दवा को लेना बंद कर देने या मिस कर देने से रक्त में शुगर का स्तर बहुत कम हो सकता है.
  • मेग्लिटिनाइड: ये दवा पैंक्रियास को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए मदद करती हैं. इस टेबलेट को भोजन से तुरंत पहले लेना चाहिए. 
  • SGLT2 इनहिबिटर: ये दवा शरीर में ग्लूकोज के अब्सॉर्ब होने की शक्ति को कम करती हैं और अधिक ग्लूकोज को यूरीन से शरीर से बाहर निकाल देती हैं. इस टेबलेट को सुबह खाली पेट लेना चाहिए. डोज मिस हो जाने पर इसे दिन में किसी भी समय भोजन से पहले या बाद में ले सकते हैं.

(और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)

  • अपनी दवाई और डोज के बारे में डॉक्टर से पूरी जानकारी लें.
  • डॉक्टर द्वारा बताई गयी डोज और समय का पालन करें.
  • बीमार होने पर डॉक्टर से परामर्श करके अपनी डायबिटीज की दवाई जारी रखें.
  • दवाई और भोजन को रोज एक ही समय पर खाएं. इससे शरीर में दवाई बेहतर ढंग से काम कर पाएगी.
  • अगर कोई डोज छूट गयी है, तो इसे जल्द से जल्द लें, लेकिन अगर अगली डोज का समय हो गया है तो न लें.
  • कुछ अन्य दवाइयां, जैसे - ब्लडप्रेशर की दवाएं डायबिटीज की दवाई के साथ रिएक्ट कर सकती हैं. इसलिए, कोई भी दवाई लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें.
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा के टाइम में कोई बदलाव न करें.

(और पढ़ें - डायबिटीज के लिए व्यायाम)

डायबिटीज की दवाई को डॉक्टर की ओर से तय समय पर लेना जरूरी है, क्योंकि ऐसा न करने पर असर कम हो सकता है या गलत डोज लेने पर नुकसान भी हो सकता है. अधिकतर मामलों में उचित दवाइयों, लाइफस्टाइल में बदलाव, स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम से इसको कंट्रोल किया जा सकता है.

(और पढ़ें - डायबिटीज मरीज के लिए बेस्ट नाश्ता)

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