शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का निर्माण होता है. यह खाने में मौजूद शर्करा या चीनी को एनर्जी के रूप में बदलता है या उपयोग करता है. इंसुलिन का निर्माण प्रभावित होने से डायबिटीज की समस्या होती है. डायबिटीज मुख्य रूप से दो तरह की मानी गई है - टाइप 1 व टाइप 2. इन दोनों अलग-अलग स्थितियों में मरीजों का इलाज अलग-अलग किया जाता है. वहीं, दवाइयां भी अलग-अलग होती हैं. टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीज को ट्रेसिबा व लेवेमीर जैसी दवाइयां दी जाती हैं. वहीं, टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को मेटफोर्मिन-एलोग्लिप्टिन (कजानो) व मेटफोर्मिन-कैनाग्लिफ्लोज़िन दी जा सकती है.

आज हम इस लेख में हम डायबिटीज को ठीक करने वाली बेहतरीन दवाओं के बारे में बताएंगे -

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  1. टाइप 1 डायबिटीज के लिए दवा
  2. टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए दवा
  3. सारांश
डायबिटीज के लिए अच्छी दवा, टेबलेट, मेडिसिन के डॉक्टर

जिस व्यक्ति को टाइप 1 डायबिटीज होती है, उसे मुख्य रूप से इंसुलिन दी जाती है. इसके अलावा, अन्य दवाएं भी हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है -

इंसुलिन - Insulin

इंसुलिन टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए सबसे सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली दवा है. टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीज का शरीर इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है. ऐसे में मरीज को समय-समय पर इंसुलिन दी जाती है. इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा दी जाती है. साथ ही यह मार्केट में विभिन्न प्रकार में भी उपलब्ध है. मरीज को किस प्रकार के इंसुलिन की आवश्यकता है, यह शरीर में इंसुलिन की कमी पर निर्भर करता है. ऐसे ही कुछ इंसुलिन की दवाओं के बारे में नीचे बताया गया है -

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शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन

रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन

लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन

कॉम्बिनेशन इंसुलिन

  • नोवोलॉग मिक्स 70/30 (इंसुलिन एस्पार्ट प्रोटामाइन-इंसुलिन एस्पार्ट)
  • ह्यूमालोग मिक्स 75/25 (इंसुलिन लिस्प्रो प्रोटामाइन-इंसुलिन लिस्प्रो)
  • ह्यूमालोग मिक्स 50/50 (इंसुलिन लिस्प्रो प्रोटामाइन-इंसुलिन लिस्प्रो)
  • ह्यूमुलीन 70/30 (ह्यूमन इंसुलिन एनपीएच-ह्यूमन इंसुलिन रेगुलर)
  • नोवोलिन 70/30 (ह्यूमन इंसुलिन एनपीएच-ह्यूमन इंसुलिन रेगुलर)
  • रिजोडेग (इंसुलिन डिग्लुडेक-इंसुलिन एस्पार्ट)

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अमाइलिनोमिमेटिक ड्रग - Amylinomimetic Drug

टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए प्राम्लिंटाइड (SymlinPen 120, SymlinPen 60) एक अमाइलिनोमिमेटिक दवा है. यह दवा इंजेक्शन के जरिए दी जाती है, जिसे मरीज को खाने से पहले लेना होता है.

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टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों का शरीर इंसुलिन का निर्माण करता है, लेकिन इसका सही से उपयोग नहीं कर पाता है. हालांकि, कुछ स्थितियों में अगर टाइप-2 मरीज का शरीर इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है या फिर कम करता है, तो इस स्थिति में मरीज को इंसुलिन दी जाती है. इसके अलावा, टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को खाई जाने वाली दवा दी जाती है. वहीं, कुछ स्थितियों में इंजेक्शन भी दिया जाता है. इन दवाओं के बारे में नीचे बताया गया है -

मौखिक दवाएं

खाई जाने वाली दवाओं के तहत निम्न प्रकार की दवाएं शामिल हैं -

मेग्लिटिनाइड्स

सल्फोनिलयूरिया

डाइपेप्टिडाइल-पेप्टिडेज़ 4 (DPP-4) इन्हिबिटर्स

बिगुआनाइड्स

थियाजोलिडाइनायड्स

अल्फा-ग्लूकोसिडेस इन्हिबिटर्स

सोडियम-ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्टर 2 (SGLT2) इन्हिबिटर्स

बाइल एसिड एक्यूट्रांस

  • कोलीसेवेलम (वेल्चोल)

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डायबिटीज मरीजों के लिए मार्केट में कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं. यह दवाइयां डायबिटीज की स्थिति और टाइप पर निर्भर करता है. टाइप -1 डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन दी जाती है. वहीं, टाइप-2 मरीजों को कई तरह की मौखिक रूप से खाई जाने वाली दवा जैसे- कोट्रोल, ग्लिमेपाइराइड (एमरिल), ग्लाइब इत्यादि  दी जाती है. ध्यान रखें कि डायबिटीज होने पर नियमित रूप से अपना चेकअप कराएं. वहीं, किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.

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