नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 की वजह से होने वाली बीमारी कोविड-19 का बीमारी से रिकवर हो चुके मरीजों की सेहत पर भी कई तरह से बुरा असर देखने को मिल रहा है। किसी मरीज में फेफड़ों की स्थायी समस्या हो रही है तो किसी को हृदय रोग की, किसी को डायबिटीज की समस्या हो रही है तो किसी के मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा है यह वायरस जिसकी वजह से लोग मानसिक बीमारी का शिकार हो रहे हैं।

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रिकवर होने के बाद भी पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या
लेकिन अब रिकवर हो चुके पुरुष मरीजों में कोविड-19 बीमारी का एक और लॉन्ग टर्म इफेक्ट देखने को मिल रहा है और वो है नपुंसकता से जुड़ा असर। डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो कोविड-19 से रिकवर होने वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से पीड़ित होने की आशंका देखने को मिल रही है।

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यौन गतिविधियों में शामिल होने की क्षमता पर नकारात्मक असर
संक्रामक बीमारियों की एक्सपर्ट डॉ डेना ग्रेसन कहती हैं, "अब इस बात का डर भी सामने आ रहा है कि यह बीमारी पुरुषों के बेडरूम में यौन गतिविधियों में शामिल होने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल रही है और वह भी मरीज के पूरी तरह से रिकवर होने के बाद भी। यह एक वास्तविक चिंता की बात है कि इस वायरस की वजह से पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी स्तंभन दोष की दीर्घकालिक समस्या हो सकती है क्योंकि हम जानते हैं कि यह बीमारी वैक्युलर यानी रक्त वाहिकाओं में समस्याएं पैदा करती है।"

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संक्रमण के दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम दिखते हैं
डॉ ग्रेसन आगे बताती हैं, "यह एक वास्तविक चिंता का विषय है क्योंकि ऐसा नहीं है कि यह वायरस सिर्फ आपको मार सकता है, बल्कि यह वास्तव में दीर्घकालिक, जीवनभर रहने वाले संभावित जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि कोविड-19 बीमारी से संक्रमित होने वाले अधिकांश लोग बीमारी से पूरी तरह से उबर तो जाते हैं लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाता है उन लोगों में 'संक्रमण के दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम' देखने को मिलते हैं, जिसमें तंत्रिका संबंधी जटिलताएं भी शामिल हैं।"

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लॉन्ग कोविड एक साथ कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है
डॉ ग्रेसन की मानें तो इससे पहले भी दुनियाभर के कई डॉक्टर लॉन्ग कोविड की बात कर चुके हैं कि और किस तरह से लॉन्ग कोविड की वजह से कोविड-19 के ऐक्टिव संक्रमण से उबरने के बाद भी मरीज कई-कई महीनों तक एक साथ कई अंगों के सही तरीके से काम न करने की समस्या से पीड़ित रहता है। ब्रिटेन के करीब 5 लाख लोग ऐसे हैं जो अब भी कोविड-19 के सुस्त बनाने वाले लक्षणों से जूझ रहे हैं जिसमें थकान, सांस फूलना और लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं।

कम रिस्क वाले लोगों में भी कई अंगों को होता है नुकसान
इसके अलावा एक नई रिसर्च हुई है जिसमें बेहद कम रिस्क वाले 500 लोगों को शामिल किया गया था। इस स्टडी में यह बात सामने आयी कि वायरस का व्यक्ति के प्रमुख अंगों पर लंबे समय तक रहने वाला (लॉन्ग लास्टिंग) असर देखने को मिलता है। लॉन्ग कोविड से पीड़ित कम रिस्क वाले व्यक्तियों में एक साथ कई अंगों में खराबी आने की समस्या को लेकर एक कवरस्कैन स्टडी की गई थी जिसमें यह पाया गया कि पहले 200 मरीज जिन्हें स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ा उनमें से 70 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिनके एक या अधिक अंगों को नुकसान पहुंचा था और इसमें हृदय, फेफड़े, लिवर और अग्नाशय जैसे अंग शामिल हैं।

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लॉन्ग कोविड की समस्या को भी गंभीरता से लेने की जरूरत
इंग्लैंड के एनएचएस के चीफ एक्जिक्यूटिव सर साइमन स्टीवन्स कहते हैं, कई लोगों के जीवन पर लॉन्ग कोविड का बेहद गंभीर असर देखने को मिल रहा है और यह आगे भी हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित करेगा। लिहाजा लॉन्ग कोविड के मरीजों को भी स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं उसी तरह से मिलनी चाहिए जिस तरह से कोरोना वायरस इंफेक्शन के मरीजों को मिल रही हैं। इसके अलावा किंग्स कॉलेज लंदन में हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया कि वायरस से संक्रमित होने के 12 हफ्तों के बाद भी कई मरीजों में मांसपेशियों में दर्द, सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता में हानि और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें डॉक्टरों ने दी चेतावनी कोविड-19 से रिकवर हो चुके मरीजों में हो सकती है स्तंभन दोष की समस्या है

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