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छाती के हिस्‍से में होने वाली कुछ स्‍वास्‍थ्‍य स्थितियों के इलाज के लिए इस सर्जरी का प्रयोग किया जाता है। इसमें विशेष उपकरण जिस पर कैमरा लगा होता है या‍नि थोराकोस्‍कोप को छाती के अंदर डाला जाता है और अगर कोई प्रॉब्‍लम हो तो उसे ठीक करने के लिए इस सर्जरी के साथ अन्‍य कोई प्रक्रिया भी की जाएगी।

प्रक्रिया से पहले व्रत रखा जाएगा और डॉक्‍टर सर्जरी से पहले कुछ ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज बताएंगे। यह सर्जरी जनरल एनेस्‍थीसिया देकर की जाती है जिससे मरीज बेहोश रहता है।

सर्जरी के बाद फेफड़े की गुहा के अंदर ड्रेन ट्यूब डाली जाती है, कोई तरल जमा हो तो वो इससे बाहर निकल जाता है। प्रक्रिया के तीन से पांच दिन के बाद अस्‍प्‍ताल से छुट्टी मिल जाती है। घर पर रिकवर करने में ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज, कुछ काम न करने और घाव की देखभाल शामिल होती है।

  1. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी क्या है - What is Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) in Hindi
  2. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी क्यों की जाती है - Why Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) is done in Hindi
  3. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी कब नहीं करवानी चाहिए - When Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) is not done in Hindi
  4. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी से पहले की तैयारी - Preparations before Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) in Hindi
  5. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी कैसे की जाती है - How Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) is done in Hindi
  6. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी के बाद देखभाल - Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) after care in Hindi
  7. वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी की जटिलताएं - Video-assisted thoracoscopic surgery (VATS) Complications in Hindi
वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी के डॉक्टर

छाती के अंदर विभिन स्थितियों के इलाज और जांच के लिए वीडियो-असिस्टेड-थोरेकोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी में फेफड़े, हार्ट और फेफड़ों के आसपास की जगह यानि प्‍लूरेल गुहा शामिल होती है। इस सर्जरी में चीर-फाड़ कम होती है और निम्‍न कारणों से यह ओपन सर्जरी से बेहतर होती है :

  • छोटे कट
  • अस्‍पताल में कम रूकना पड़ता है
  • सर्जरी के बाद दर्द कम होता है
  • जल्‍दी रिकवरी होती है

इस प्रक्रिया में छाती के ऊपर एक कट लगाकर उससे थोराकोस्‍कोप डाला जाता है। ये उपकरण छाती के अंदर के हिस्‍से को दिखाया जाता है। जिस कंडीशन का इलाज करना है, उसके आधार पर सर्जन टिश्‍यू सैंपल निकालने, फेफड़े से फ्लूइड निकालने या सर्जरी के दौरान फेफड़े के हिस्‍से को निकालने के लिए विभिन्‍न उपकरणों का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

निम्‍न स्थितियों के इलाज के लिए यह सर्जरी की जा सकती है :

  • बायोप्‍सी टेस्‍ट के लिए टिश्‍यू सैंपल लेना हो।
  • फेफड़ों के कैंसर के इलाज और निदान के लिए।
  • निओमोथोरैक्‍स या कोलैप्‍स लंग (फेफड़ों) के इलाज।
  • लंग या इसके अस्‍वस्‍थ हिस्‍से को हटाने।
  • लंग इंफेक्‍शन होने और थाइमस ग्‍लैंड से संबंधित परेशानी होने।
  • कैंसर के स्‍टेज का पता लगाने।
  • प्‍लूरेल गुहा से तरल निकालने।
  • हार्ट की मांसपेशियों से फ्लूइड निकालने।
  • पस निकालने के लिए।
  • पाचन तंत्र की बीमारियों के इलाज
  • छाती के अंदर किसी जन्‍म विकार को ठीक करने।

निम्‍न स्थितियों में इस सर्जरी के लिए मना किया जा सकता है :

इस प्रक्रिया के लिए निम्‍न तैयारी की जरूरत होगी :

  • डॉक्‍टर शारीरिक जांच और कुछ टेस्‍ट करवाएंगे, जैसे कि :
    • चेस्‍ट एक्‍स-रे
    • पोसिट्रोन एमिशन टोमोग्राफी (कैंसर के ऊतक का पता लगाने)
    • ब्‍लड टेस्‍ट
    • इलेक्‍ट्रोकार्डियोग्राम
    • पल्‍मोनरी फंक्‍शन टेस्‍ट
    • मेथिसिलिन रेसिस्‍टेंट स्‍टैफिलोकोकस ऑरियस स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट
    • क्‍वांटिफेरॉन ब्‍लड टेस्‍ट (टीबी का पता लगाने के लिए)
  • कोई दवा, जड़ी बूटी, विटामिन या सप्‍लीमेंट ले रहे हैं तो डॉक्‍टर को बताएं। सर्जरी से पहले खून पतला करने वाली दवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं।
  • सर्जरी से एक रात पहले कुछ भी खाएं-पिएं नहीं।
  • सर्जरी से पहले शराब और सिगरेट छोड़ने के लिए कहा जाएगा।
  • सर्जरी करने की अनुमति के लिए फॉर्म साइन करवाया जाएगा।
  • घर ले जाने के लिए कोई दोस्‍त या रिश्‍तेदार हो।

अस्‍पताल पहुंचने के बाद मरीज को हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाएगी। फिर उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर सर्जरी के दौरान जरूरी दवाएं और तरल पदार्थ हाथ या बांह में ड्रिप लगाकर दिए जाएंगे। सर्जरी के लिए जनरल एनेस्‍थीसिया दिया जाएगा।

इसके बाद निम्‍न तरीके से सर्जरी की जाती है :

  • सिर के ऊपर हाथ रखकर एक करवट लिटाया जाएगा।
  • फिर सर्जन छाती पर कुछ छोटे कट लगाएंगे और इनमें से एक कट से थोराकोस्‍कोप डालेंगे और छाती की गुहा के अंदर परेशानी की जांच करेंगे।
  • फिर छाती की गुहा के अंदर बाकी कटों से और उपकरण डालकर सर्जरी करेंगे। उदाहरण के तौर पर, अगर छाती के किसी हिस्‍से में कैंसर है तो प्रभावित हिस्‍से को निकाला जा सकता है।
  • जो भी परेशानी है, उसे ठीक करने के बाद सर्जन सभी उपकरण निकाल लेंगे।
  • जरूरत पड़ी तो फेफड़ों की गुहा से हवा या फ्लूइड को निकालने के लिए चेस्‍ट ट्यूब लगाई जाएगी।
  • इसके बाद सर्जन स्‍टैपल या टांकों से कट को बंद कर देंगे और उस पर पट्टी लगा देंगे।

हर किसी व्‍यक्‍ति के लिए सर्जरी में लगने वाला समय उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर इसमें एक से दो घंटे लगते हैं। सर्जरी के बाद मरीज को उसके कमरे में भेज दिया जाता है।

एनेस्‍थीसिया से जल्‍दी रिकवर होने के लिए ऑक्‍सीजन मास्‍क लगाया जाएगा। नर्स लगातार ब्‍लड प्रेशर और पल्‍स रेट चेक करेगी। सर्जरी के बाद दर्द कम करने के लिए पेन किलर दी जा सकती है।

आईवी ड्रिप के जरिए ही तरल आहार दिया जाएगा। अस्‍पताल में रूकने के दौरान ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज सिखाई जाएंगी। ड्रेनेज ट्यूब अस्‍पताल से छुट्टी मिलने से एक दिन पहले निकाल दी जाएगी।

आपको तीन से पांच दिन अस्‍पताल में रूकना पड़ सकता है। हालांकि, यह आपकी रिकवरी की स्‍पीड पर निर्भर करता है।

घर पहुंचने के बाद निम्‍न तरीके से देखभाल करने की जरूरत होती है :

  • घाव की देखभाल :
    • घाव को साफ और सूखा रखें।
    • ऑपरेशन वाली जगह पर पाउडर, क्रीम या डिओड्रेंट न लगाएं।
    • सर्जरी के बाद नहा सकते हैं।
    • छह हफ्ते टब बाथ न लें।
  • दर्द निवारक : सर्जन दर्द को कम करने के लिए दवा दे सकते हैं।
  • डाइट :
    • रोज एक से दो लीटर पानी पीना है।
    • संतुलित आहार लें।
  • ब्रीदिंग केयर :
    • रोज ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज करें।
    • अगर फेफड़ों की सर्जरी हुई है तो आपको सर्जरी के बाद फेफड़ों को मजबूत करने के लिए स्पिरोमीटर का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जा सकती है। शुरुआती दो हफ्तों में चार से छह बार इसका प्रयोग करें।
  • एक्टिविटी :
    • दिन में दो से तीन बार थोड़ा चलें-फिरें। इससे सर्जरी के बाद एक्टिव रहने में मदद मिलेगी।
    • दो हफ्ते बाद घर के छोटे-मोट काम कर सकते हैं।
    • दो से छह हफ्ते बाद काम पर लौट सकते हैं।
    • सर्जरी के दो हफ्ते बाद गाड़ी चला सकते हैं।
    • दो हफ्ते तक फुटबॉल जैसे खेल न खेलें।

डॉक्‍टर को कब दिखाएं?

सर्जरी के बाद निम्‍न लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को बताएं :

इस सर्जरी से निम्‍न जोखिम जुड़े हो सकते हैं :

फॉलो-अप के लिए डॉक्‍टर के पास कब जाएं?

सर्जरी के एक से दो हफ्ते बाद टांके खुलवाने जाना होगा। इसके छह हफ्ते बाद अस्‍पताल जाना होगा जिस दौरान सर्जन देखेंगे कि ऑपरेशन वाली जगह ठीक हुई है या नहीं।

नोट : ऊपर दी गई संपूर्ण जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह डॉक्‍टरी सलाह का विकल्‍प नहीं है।

Dr Shubham Mishra

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श्वास रोग विज्ञान
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संदर्भ

  1. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Video-Assisted Thorascopic Surgery
  2. Sheffield Teaching Hospitals: NHS Foundation Trust [Internet]. National Health Service. UK; Video-Assisted Thorascopy (VATS)
  3. Cleveland Clinic [Internet]. Ohio. US; Video-Assisted Thoracic Surgery (VATS)
  4. Mehrotra M, D'Cruz JR, Arthur ME. Video-Assisted Thoracoscopy. [Updated 2020 Aug 15]. In: StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2020 Jan
  5. Beth Israel Lahey Health: Winchester Hospital [Internet]. Winchester. Maryland. US; Video-Assisted Thoracic Surgery
  6. University Hospitals Coventry and Warwickshire [Internet]. NHS Foundation Trust. National Health Service. UK; Video-Assisted Thorascopic Surgery - VATS procedure
  7. American Cancer Society [Internet]. Georgia. US; Thoracoscopy
  8. Dexter EU. Perioperative care of the thoracic surgical patient. In: Selke FW, del Nido PJ, Swanson SJ, eds. Sabiston and Spencer Surgery of the Chest. 9th ed. Philadelphia, PA: Elsevier; 2016:chap 4
  9. Putnam JB. Lung, chest wall, pleura, and mediastinum. In: Townsend CM, Beauchamp RD, Evers BM, Mattox KL, eds. Sabiston Textbook of Surgery: The Biological Basis of Modern Surgical Practice. 20th ed. Philadelphia, PA: Elsevier; 2017:chap 57.
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