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चेतक छेदन यानि थैलमोटोमी एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसे कंपन के इलाज करने के लिए किया जाता है। इस सर्जरी की मदद से शरीर में थैलमस के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया जाता है। थैलमस मस्तिष्क का एक भाग होता है, जो शरीर की कुछ अनैच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का काम करता है। शरीर के किसी हिस्से में कंपन होने की स्थिति को ट्रेमर कहा जाता है, जो आमतौर पर मल्टीपल स्क्लेरोसिस और पार्किंसन रोग आदि में होती है।

सर्जरी के दौरान आपको लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे आप सर्जरी के दौरान जागते रहते हैं और सिर्फ वही हिस्सा सुन्न होता है, जिसकी सर्जरी की जाती है। हालांकि, सर्जरी के दौरान आपको थोड़ी चुभन या तकलीफ हो सकती है। अधिकतर मामलों में यह सर्जरी मस्तिष्क के एक ही तरफ की जाती है, जबकि अन्य कुछ मामलों में मस्तिष्क के दोनों तरफ भी यह सर्जरी की जा सकती है। हालांकि, इस सर्जरी से कई बार याददाश्त संबंधी समस्याएं हो जाती हैं या फिर बोलने में दिक्कत होने लगती है।

सर्जरी के बाद कम से कम दो से तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। अधिकतर मामलों में लोग इस सर्जरी के बाद लगभग छह हफ्तों के भीतर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं। जबकि कुछ लोगों को इससे अधिक समय भी लग सकता है, जो आमतौर पर उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

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  1. थैलमोटोमी क्या है - What is Thalamotomy in Hindi
  2. थैलमोटोमी किसलिए की जाती है - Why is Thalamotomy done in Hindi
  3. थैलमोटोमी से पहले - Before Thalamotomy in Hindi
  4. थैलमोटोमी के दौरान - During Thalamotomy in Hindi
  5. थैलमोटोमी के बाद - After Thalamotomy in Hindi
  6. थैलमोटोमी की जटिलताएं - Complications of Thalamotomy in Hindi

थैलमोटोमी सर्जरी किसे कहते हैं?

थैलमोटोमी एक सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसमें थैलमस के एक छोटे से हिस्से को नष्ट किया जाता है, जिसे “न्यूक्लियस वैन्ट्रेल्स इंटरमीडियस” कहा जाता है। थैलमस मस्तिष्क का एक भाग होता है और इसमें मौजूद न्यूक्लियस वैन्ट्रेल्स इंटरमीडियस शरीर की अनैच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। थैलमोटोमी सर्जरी को शरीर में हो रहे कंपन के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

कंपन शरीर में होने वाले किसी ऐसे रोग का लक्षण है, जिससे शरीर के किसी हिस्से की गतिविधि अनैच्छिक या अनियंत्रित हो जाती है। अधिकतर मामलों में इन रोगों से हाथ प्रभावित होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इनसे सिर, बांह, धड़, टांग और स्वर यंत्र भी प्रभावित हो जाते हैं और उनमें कंपन होने लगती है। शरीर में कंपन लगातार भी हो सकती है और कभी-कभी भी हो सकती है। ये समस्याएं अपने आप भी विकसित हो सकती हैं या फिर किसी अन्य बीमारी के कारण एक लक्षण के रूप में भी विकसित हो सकती है। वैसे तो कंपन होना कोई हानिकारक स्थिति नहीं है, लेकिन इससे सामान्य जीवन प्रभावित हो जाता है।

मस्तिष्क का बाईं ओर का हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को नियंत्रित करता है और ठीक उसी प्रकार मस्तिष्क का दायां हिस्सा शरीर के बाएं हिस्से के शरीर को नियंत्रित करता है। इसलिए यदि शरीर के दाएं हिस्से में कंपन हो रहा है, तो मस्तिष्क के बाएं हिस्से की सर्जरी का जाती है। कुछ मामलों में सर्जरी को मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में भी किया जा सकता है। हालांकि, थैलमोटोमी सर्जरी से कुछ जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें मुख्य रूप से सोचने की क्षमता कम होना, ठीक से बोल न पाना और याददाश्त संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

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थैलमोटोमी सर्जरी किसलिए की जाती है?

यदि शरीर के दाएं या बाएं तरफ कंपन हो रहा है, तो थैलमोटोमी सर्जरी की जाती है। थैलमोटोमी सर्जरी को अधिकतर मामलों में तब चुना जाता है, जब कंपन बांह या टांग में हो रही हो। आजकल थैलमोटोमी सर्जरी की बजाय डीप ब्रेन स्टिमुलेशन या पैलिडोटमी को चुना जाता है। 

निम्न स्थितियों से ग्रस्त लोगों को कंपन की समस्याएं हो सकती हैं -

कंपन होने पर आपको निम्न लक्षण महसूस होते हैं -

  • आवाज कांपना
  • सिर, धड़, बांह, हाथ या टांग का एक लय के अनुसार हिलना
  • पेन, चम्मच या अन्य किसी चीज को पकड़ने में दिक्कत होना

थैलमोटोमी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

निम्न स्थितियों से ग्रस्त लोगों को डॉक्टर थैलमोटोमी सर्जरी न करवाने की सलाह दे सकते हैं -

  • मस्तिष्क में ट्यूमर होना
  • ब्लड प्रेशर गंभीर रूप से बढ़ा हुआ होना
  • असाधारण रूप से रक्तस्राव पैदा करने वाले रोग होना जैसे वॉन विलेब्रांड डिजीज और हीमोफीलिया
  • सर्जरी से दस दिन पहले वारफेरिन, एस्पिरिन, एंटीप्लेटलेट या अन्य किसी एंटीकॉएग्युलेंट दवाओं से इलाज चल रहा होना
  • मरीज लंबे समय तक पीठ के बल लेट पाने में असक्षम होना
  • पिछले छह महीनों में ब्रेन स्ट्रोक या ब्लीडिंग संबंधी कोई समस्या हुई होना
  • पिछले एक साल में पहले कोई मिर्गी या दौरे की समस्या हुई होना
  • छोटी या बंद जगह से डर लगना (क्लॉस्ट्रोफोबिया)
  • शरीर में कोई मेटल इंप्लांट (पेसमेकर आदि) लगा होने के कारण एमआरआई स्कैन करवाने में असमर्थ होना

(और पढ़ें - ब्रेन एमआरआई क्या है)

थैलमोटोमी सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

डॉक्टर आपको सर्जरी से कुछ दिन पहले अस्पताल बुला सकते हैं, जिस दौरान कुछ विशेष परीक्षण किए जाते हैं और आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली व वर्तमान स्थितियों की जानकारी ली जाती है। इस दौरान निम्न टेस्ट किए जाते हैं -

  • लक्षणों व अन्य समस्याओं की जांच करने के लिए शारीरिक परीक्षण
  • अलग-अलग शारीरिक गतिविधियां करवाते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग करना, जिसकी मदद से कंपन की जांच की जाती है
  • मस्तिष्क के जिस हिस्से की सर्जरी की जानी है, उसकी पहचान करने के लिए एमआरआई स्कैन
  • आपके मूड, याददाश्त और सोचने की प्रक्रिया का परीक्षण करने के लिए न्यूरो-साइकोलॉजिकल असेसमेंट

इन सभी परीक्षणों की मदद डॉक्टर यह सुनिश्चित कर पाते हैं कि आपकी यह सर्जरी की जा सकती है या नहीं। यदि आप यह सर्जरी करवाने में सक्षम हैं, तो आपको सर्जरी की प्रक्रिया, लाभ और जटिलताएं संबंधी सभी जानकारियां दे दी जाती हैं। सर्जरी के बारे में समझाने के बाद आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।

ऑपरेशन से कुछ दिन पहले ही डॉक्टर आपको सर्जरी से संबंधी निम्न सलाह दे सकते हैं -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की दवाएं, हर्बल उत्पाद या कोई अन्य सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। डॉक्टर इनमें से कुछ दवाओं को सर्जरी से कुछ दिन पहले लेना बंद करने की सलाह दे सकते हैं, इनमें आमतौर पर दर्द निवारक व अन्य रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं।
  • यदि सर्जरी से एक या दो दिन पहले आपको बुखार या फ्लू के लक्षण होने लगे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। ऐसे में डॉक्टर ऑपरेशन को कुछ दिनों के लिए टाल सकते हैं।
  • आपको एक विशेष साबुन या शैंपू दिया जाता है, जिसके साथ सर्जरी वाले दिन नहा कर आने को कहा जाता है।
  • यदि आपको पार्किंसन रोग है, तो आपको सर्जरी से 12 घंटे पहले उसकी दवाएं लेना बंद करने को कहा जाता है।
  • यदि आप कंपन को नियंत्रित करने वाली कोई दवा ले रहे हैं, तो आपको सर्जरी वाले दिन वे दवाएं न लेने की सलाह दी जाती है।

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थैलमोटोमी सर्जरी कैसे की जाती है?

जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है। आपको विशेष स्टॉकिंग पहनने को दी जाती हैं, जो टांगों में रक्त का थक्का जमने से रोकते हैं। आपको एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है और आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर इंट्रावेनस लाइन शुरू कर दी जाती है। इंट्रावेनस लाइन की मदद से आपको सर्जरी के दौरान दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं। थैलमोटोमी की सर्जिकल प्रोसीजर कुछ इस प्रकार है -

  • हॉस्पिटल स्टाफ आपको एक्स रे डिपार्टमेंट में लेकर जाएंगे। इसके बाद आपको लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाएगा, जिससे सर्जरी वाले हिस्से को सुन्न कर दिया जाता है।
  • सिर में जहां सर्जरी प्रोसीजर शुरू करनी है, वहां पर चार पिन लगाए जाते हैं, जो सिर को सर्जरी के दौरान एक ही पोजीशन में बनाए रखने में मदद करते हैं। सर्जरी के दौरान आपको थोड़ी-बहुत चुभन व अन्य तकलीफ हो सकती हैं।
  • सिर के जिस हिस्से की सर्जरी करनी है, उसकी पहचान करने के लिए एमआरआई स्कैन किया जाता है।
  • सिर में जहां पिन लगाई गई थी उनके ऊपर एक विशेष फ्रेम को फिट किया जाता है, जो सिर को सर्जरी के दौरान हिलने से रोकता है। जब यह फ्रेम लगाया जाता है, तो उस दौरान आप सिर में थोड़ा दबाव महसूस कर सकते हैं। हालांकि, यह दबाव कुछ मिनटों में कम हो जाता है।
  • इसके बाद आपको ऑपरेशन थिएटर ले जाया जाता है, वहां आपको एक विशेष टेबल पर लिटा दिया जाता है। इस दौरान आपके सिर पर वह फ्रेम लगा रहता है।
  • सिर के जिस हिस्से में सर्जरी की जानी है, वहां के बालों को साफ कर दिया जाता है। बालों को हटाकर उस हिस्से को एंटीसेप्टिक से साफ किया जाता है।
  • लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगने के बाद जब वह हिस्सा सुन्न हो जाता है, तो वहां पर कट लगाया जाता है और लगभग 3 एमएम चौड़ा छिद्र बनाया जाता है। सिर में एक विशेष ड्रिल मशीन से छिद्र दिया जाता है, जिससे कोई दर्द नहीं होता है लेकिन काफी शोर सुनाई देता है।
  • इस छिद्र के माध्यम से अंदर एक इलेक्ट्रोड को फिट कर दिया जाता है। इस उपकरण से यह जांच की जाती है कि इससे कोई लक्षण कंट्रोल किया जा रहा है या नहीं। साथ ही इलेक्ट्रोड लगाने के बाद यह भी देखा जाता है कि इससे कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा। जैसे चेहरे व हाथ में जकड़न और बोलने में दिक्कत होना। (और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन का इलाज)
  • यदि इलेक्ट्रोड से लक्षण नियंत्रित हो रहे हैं, तो सर्जन इलेक्ट्रिक करंट छोड़ते हैं जिससे थैलमस के टारगेट हिस्से को नष्ट कर दिया जाता है।
  • इसके बाद छिद्र से इलेक्ट्रोड को निकाल दिया जाता है और चारों पिनों को हटाकर चीरे को टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है। चीरे के ऊपर पट्टी कर दी जाती है।

थैलमोटोमी सर्जरी को पूरा करने में कम से कम दो घंटे का समय लगता है, जिसके बाद आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है। रिकवरी रूम में आपके ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, पल्स रेट व अन्य शारीरिक संकेतों पर निरंतर नजर रखी जाती है। सर्जरी के बाद आपको दो से तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा जा सकता है। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान निम्न प्रक्रियाएं की जाती हैं -

  • आपकी बांह या हाथ की नस में सुई को लगाकर रखा जाएगा, जिसकी मदद से दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।
  • सर्जरी से अगले दिन एमआरआई स्कैन किया जाता है, जिसकी मदद से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सर्जरी सफलतापूर्वक हो गई है या नहीं।
  • आपको हर दो से तीन घंटों में कम से कम एक बार अपनी पोजीशन बदलने की सलाह दी जाती है, इससे आपके शरीर के किसी एक हिस्से पर दबाव नहीं पड़ता है। (और पढ़ें - दबाव अल्सर के कारण)
  • जब आपके स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार हो जाता है, तो डॉक्टर आपकी चेतना व याददाश्त की स्थिति का पता लगाने के लिए कुछ सवाल पूछते हैं जैसे आपका या आपके परिवार के किसी व्यक्ति का नाम। (और पढ़ें - याददाश्त बढ़ाने के उपाय)
  • आपको कुछ शारीरिक गतिविधि करके दिखाने को भी कहा जा सकता है जैसे हाथ या पैर की उंगलियां हिलाना आदि।

जब डॉक्टर को लगता है कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और अपने सामान्य कार्य कर सकते हैं (जैसे नहाना व कपड़े बदलना आदि) तो आपको अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।

(और पढ़ें - अल्सर का इलाज)

थैलमोटोमी सर्जरी के क्या देखभाल की जाती है?

सर्जरी के बाद डॉक्टर आपके स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए डॉक्टर कुछ विशेष सलाह दे सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • सर्जरी के बाद कम से कम छह हफ्तों तक कोई भी अधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधि न करें और न ही व्यायाम आदि करें।
  • सिर के जिस हिस्से की सर्जरी की गई है, उसी तरफ की पलकों में सूजन होना और शरीर के दूसरी तरफ के हिस्से में कमजोरी महसूस होना आम है। यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है।
  • जब तक सर्जरी के घाव पूरी तरह से न भर जाएं, उस हिस्से को न छुएं और न ही कोई चोट आदि लगने दें। थैलमोटोमी सर्जरी से लगभग 80 से 90 प्रतिशत लोगों में कंपन का इलाज सफलतापूर्वक हो जाता है। हालांकि, थैलमोटोमी सर्जरी से कंपन का कारण बनने वाले अंदरूनी रोगों का इलाज नहीं किया जा सकता है और न ही किसी अन्य लक्षण को कम किया जा सकता है।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए -

(और पढ़ें - उल्टी को रोकने के उपाय)

थैलमोटोमी सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

थैलमोटोमी सर्जरी से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • स्ट्रोक (थैलमोटोमी से होने वाली सबसे गंभीर जटिलता)
  • संक्रमण
  • सर्जरी से कंपन ठीक न हो पाना
  • शारीरीक कमजोरी
  • ठीक से बोल न पाना
  • मिर्गी (कम मामलों में)​

(और पढ़ें - मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज)

संदर्भ

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  2. National Institute of Neurological Disorders and Stroke [Internet[. National Institute of Health. US Department of Health and Human Services. US; Tremor Fact Sheet
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