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पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन एक ऐसी सर्जरी है जो वल्‍वा या अंडकोष की थैली आर गुदा के बीच के हिस्‍से यानि पेरिनियम को पहुंचे नुकसान (डैमेज) को ठीक करने के लिए की जाती है। कोलोरेक्‍टल कैंसर, गुदा में या जेनिटोयूरीनरी हिस्‍से में कैंसर या ट्रामा या इंफेक्‍शन की वजह से यह डैमेज हो सकता है।

सर्जरी के लिए मरीज को जनरल या रिजनल एनेस्‍थीसिया दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सर्जन शरीर के एक चुने गए हिस्‍से (जांघ, ग्रोइन, पेट या कूल्‍हों) से स्किन फ्लैप (हेल्‍दी स्किन और टिश्‍यू) लेते हैं आर उसे पेरिनियल वाली जगह पर लगाकर उखड़े हुए हिस्‍से को टांके से ढक देते हैं।

इस प्रक्रिया के बाद रिकवरी होती है। दर्द को कम करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं और कुछ समय तक बैठने या जमीन पर लेटने में दिक्‍कत हो सकती है।

  1. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन क्या है - What is Perineal Reconstruction in Hindi
  2. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन क्यों की जाती है - Why Perineal Reconstruction is done in Hindi
  3. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन कब नहीं करवानी चाहिए - When Perineal Reconstruction is not done in Hindi
  4. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन से पहले की तैयारी - Preparations before Perineal Reconstruction in Hindi
  5. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन कैसे की जाती है - How Perineal Reconstruction is done in Hindi
  6. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन के बाद देखभाल - Perineal Reconstruction after care in Hindi
  7. पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन की जटिलताएं - Perineal Reconstruction Complications in Hindi
पेरिनियल रिकंस्ट्रक्शन के डॉक्टर

यौन अंगों, कोलोरेक्‍टल या गुदा वाले हिस्‍से में कैंसर, पेजेट डिजीज, संक्रमण या ट्रामा की वजह से पेरिनियम में आए डिफेक्‍ट को ठीक करने के लिए यह सर्जरी की जाती है। महिलाओं में गुदा और योनि के बीच और पुरुषों में गुदा और अंडकोष की थैली के बीच आने वाले हिस्‍से को पेरिनियम कहते हैं।

जब टांकों से सीधे तौर पर इस डिफेक्‍ट को बंद न किया जा सके और बैक्‍टीरिया के फैलने के डर से स्किन ग्राफ्टिंग भी संभव न हो जिससे ठीक होने में देरी हो, पेशाब और सेक्‍स करने में दिक्‍कत आए, तब यह सर्जरी की जाती है।

पेरिनियल रिकंस्‍ट्रक्‍शन के दौरान डैमेज हुए हिस्‍से को जांघ, कूल्‍हों, ग्रोइन या पेट से लिए गए स्किन फ्लैप से बंद किया जाता है।

इन हिस्‍सों से फ्लैप लिए जा सकते हैं

  • ग्‍लूटिअल मसल (कूल्‍हे)
  • ग्रोइन (टांग और पेल्विस पर मुड़ने वाली जगह)
  • जांघ की अलग-अलग मांसपेशियां
  • पेट की मांसपेशियां

निम्‍न कारणों से हुए पेरिनियल डिफेक्‍ट को ठीक करने के लिए पेरिनियल रिकंस्‍ट्रक्‍शन की सलाह दी जाती है :

पेरिनियल डिफेक्‍ट के कुछ आम लक्षण हैं :

निम्‍न स्थितियों में इस सर्जरी को करने से मना किया जा सकता है :

  • यदि गुदा (पीछे वाले रास्‍ते) या मूत्र नली का सिरा बहुत ज्‍यादा डैमेज हो तो इसकी वजह से मल त्‍याग और पेशाब करने में दिक्‍कत आ सकती है। ऐसे मामलों में यूरोस्‍टोमी या कोलोस्‍टोमी की सलाह दी जा सकती है। इस स्थिति में एहतियात के साथ सर्जरी की जा सकती है।
  • अगर पहले भी सर्जरी हो चुकी है, तो किसी और व्‍यक्‍ति के स्किन फ्लैप का न मिलना।
  • उस हिस्‍से की आगे भी कोई सर्जरी का प्‍लान होना।

इस सर्जरी के लिए निम्‍न रूप से तैयारी की जाती है :

  • मरीज को डॉक्‍टर को कुछ बातें बतानी होती हैं, जैसे कि :
    • मेडिकल हिस्‍ट्री
    • कोई एलर्जी है तो
    • जो भी दवा ले रहे हैं
  • डॉक्‍टर शारीरिक जांच और निम्‍न टेस्‍ट करवाने के लिए कह सकते हैं :
  • एस्प्रिन जैसी दवा या कोई सप्‍लीमेंट ले रहे हैं, तो उसे बंद करना पड़ सकता है।
  • सर्जरी से कुछ दिन पहले सिगरेट पीना बंद कर दें। इससे सर्जरी की कुछ जटिलताएं कम होने में मदद मिलेगी।
  • सर्जरी से एक रात पहले कुछ भी खाने-पीने से मना किया जाता है।
  • ऑपरेशन के बाद घर ले जाने के लिए दोस्‍त या कोई जानकार हो।
  • सर्जरी से पहले मरीज की अनुमति के लिए एक फॉर्म साइन करवाया जा सकता है।

अस्‍पताल पहुंचने के बाद मरीज को हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाती है। सर्जरी से पहले :

  • टांग में खून के थक्‍के बनने से रोकने के लिए मरीज को दवा या स्‍पेशल स्‍टॉकिंग्‍ए दिए जाएंगे।
  • ऑपरेशन के दौरान जरूरी तरल पदार्थ और दवाओं के लिए बांह या हाथ में ड्रिप लगाई जाती है।
  • हार्ट रेट, ब्‍लड प्रेशर और ऑक्‍सीजन लेवल जांचने के लिए अलग-अलग डिवाइस लगाए जाएंगे।
  • सर्जरी से पहले एंटीबायोटिक दिए जाएंगे ताकि इंफेक्‍शन न हो।
  • ऑपरेशन के समय बेहोश करने के लिए मरीज को जनरल (बेहोश करने) या रिजनल एनेस्‍थीसिया (सिर्फ ऑपरेशन वाले हिस्‍से को सुन्‍न किया जाता है) दिया जाएगा।
  • पेशाब निकालने के लिए मूत्राशय में कैथेटर लगा होता है।
  • टांगों को ऊपर उठाकर मेडिकल टेबल पर लिटाया जाएगा।

ऑपरेशन थिएटर में इस तरह ऑपरेशन किया जाता है :

  • सर्जन डैमेज हुए ऊतक को ध्‍यान से निकालेंगे। डिफेक्‍ट कितना लंबा और चौड़ा है ये नोट करेंगे और फिर उसके हिसाब से स्किन फ्लैप चुनेंगे।
  • डॉपलर अल्‍ट्रासाउंड की मदद से स्किन फ्लैप देने वाले डोनर के उस हिस्‍से जहां से फ्लैप लिए गए हैं, उसके आसपास और वहीं की रक्‍त वाहिकाओं को जानेंगे। इसके बाद फ्लैप निकालने के लिए कट लगाएं। इस फ्लैप में मांसपेशी, संयोजी ऊतक और स्किन होते हैं।
  • फिर सर्जन फ्लैप की मांसपेशी को टांकों की मदद से पेल्विक हिस्‍से के अंदर जोड़ देते हैं।
  • इसके बाद वो पेरिनियल हिस्‍से के आसपास की अंदर की स्किन पर फ्लैप लगा देंगे।
  • अब ऑपरेशन वाली जगह पर ड्रेन लगाएंगे और जहां फ्लैप लगाई गई है, उसे टांकों से बंद कर देंगे।
  • सर्जरी के बाद मरीज को उसके कमरे में ले जाया जाता है। इस दौरान बॉडी के महत्‍वपूर्ण अंगों और कार्यों को मॉनिटर किया जाता है। दर्द के लिए दर्द निवारक दवाएं भी दी जाती हैं।
  • सर्जरी के बाद पहले कुछ दिनों तक तरल पदार्थ ही लेने होते हैं और फिर धीरे-धीरे ठोस आहार शुरू किया जाता है। कुछ समय पेरिनियल हिस्‍से से डिस्‍चार्ज या स्राव हो सकता है। ये नॉर्मल बात है। जल्‍दी रिकवरी के लिए मरीज को थोड़ा चलने-फिरने के लिए कहा जाता है। सर्जरी के एक या दो दिन बाद ड्रेन निकाल लिए जाएगे।
  • अस्‍पताल से छुट्टी मिलने से पहले यानि 24 से 25 दिन पहले टांके खोल दिए जाते हैं।

अस्‍पताल से छुट्टी लेकर घर पहुंचने के बाद निम्‍न रूप से देखभाल की जाती है :

  • दर्द निवारक : डॉक्‍टर के पर्चे या बिना पर्चे के मिलने वाली दवाओं जैसे कि पैरासिटामोल लेनी पड़ेगी। इससे दर्द धीरे-धीरे गायब होने लगेगा। कुछ दिनों में पेन किलर लेना कम कर दें।
  • गाड़ी चलाना : अगर डॉक्‍टर की सलाह पर कोई दवा ले रहे हैं तो गाड़ी न चलाएं।
  • आहार : खूब पानी पिएं और तरल पदार्थ लें। आहार को लेकर डॉक्‍टर की बात मानें।
  • टांकों की देखभाल : जिस जगह से फ्लैप स्किन ली गई थी और जहां लगाई गई है, दोनों जगह के टांकों का ध्‍यान रखें और देखें कि इंफेक्‍शन तो नहीं है। इसे साफ हाथों से ही छुएं। टांकों को पूरी तरह से ठीक होने में तीन महीने लग सकते हैं।
  • नहाना : आप रोज नहा सकते हैं। टांके वाली जगह को अच्‍छी तरह से सुखाएं। स्विमिंग या बाथ टब लेने से पहले डॉक्‍टर से पूछें।
  • एक्टिविटी :
    • हो सकता है कि आप ऑपरेशन के तुरंत बाद चल सकें लेकिन 6 हफ्तों तक कोई स्‍पोर्ट्स या जॉगिंग जैसी मुश्किल एक्टिविटी न करें।
    • एक से डेढ़ महीने तक भारी सामान उठाने से बचें।
    • टांकों की वजह से देर तक बैठने में दिक्‍कत होगी और लेटने के तरीके, बैठने और कुछ काम करने में भी परेशानी हो सकती है।
    • करवट लेकर सोने के लिए कहा जाएगा।
    • अगर कूल्‍हों से फ्लैप लिया गया है, तो बैठने में थोड़ा दर्द हो सकता है। ये धीरे-धीरे चला जाएगा।

डॉक्‍टर को कब दिखाएं?

निम्‍न लक्षण दिखने पर डॉक्‍टर को दिखाएं :

  • योनि से ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने
  • बुखार
  • सूजन
  • टांके वाली जगह पर लालिमा
  • दर्द
  • उल्‍टी और मतली 
  • पेशाब करने में दिक्‍कत
  • ऑपरेशन वाली जगह से बदबूदार पस या स्राव होना।

सर्जरी की वजह से कुछ संभावित जोखिम हो सकते हैं, जैसे कि :

  • संक्रमण
  • घाव भरने में देरी
  • सर्जरी वाली जगह पर तरल जमना
  • घाव भरने से जुड़े विकार
  • पार्शियल फ्लैप लॉस
  • पेल्विक फोड़ा
  • फिस्‍टुला बनना
  • हिलने पर फ्लैप और टांके प्रभावित हो सकते हैं।
  • पहले के किसी विकार का बार-बार होना।

डॉक्‍टर के पास फॉलो-अप के लिए कब जाएं?

अस्‍पताल से छुट्टी मिलने के बाद चेकअप के लिए एक से तीन हफ्ते बाद डॉक्‍टर को दिखाने जाना पड़ेगा।

नोट : ऊपर दी गई संपूर्ण जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह डॉक्‍टरी सलाह का विकल्‍प नहीं है।

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