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पेरिकार्डेक्टमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसकी मदद से पेरिकार्डियम के पूरे या कुछ हिस्से को निकाल दिया जाता है। पेरिकार्डियम द्रव से भरी एक थैली होती है, जो हृदय के चारों तरफ मौजूद होती है। पेरिकार्डियम का मुख्य कार्य हृदय को संक्रमण से बचाना और अन्य अंगों के साथ घर्षण होने से बचाना होता है। जैसा कि हृदय को रक्त पंप करने के लिए हर समय हिलना-ढुलना पड़ता है, तो इस दौरान पेरिकार्डियम इसे आस-पास के अंगों से रगड़ खाने से बचाती है।

हालांकि, ट्यूबरकुलोसिस जैसे कुछ रोग भी हैं, जिनके कारण पेरिकार्डियम सख्त हो जाती है और परिणामस्वरूप हृदय स्वतंत्र रूप से हिल-ढुल नहीं पाता है। यदि ऐसी स्थिति का इलाज न किया जाए, तो इसके कारण हृदय काम करना बंद (हार्ट फेलियर) कर सकता है। पेरिकार्डेक्टमी ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसकी मदद से पेरिकार्डियम के सख्त होने पर विकसित होने वाले लक्षणों से छुटकारा पाया जाता है और उन्हें बदतर होने से रोका जाता है। पेरिकार्डेक्टमी सिर्फ तभी की जाती है, जब स्थिति का इलाज करने के लिए कोई अन्य मेडिकल उपचार काम न कर पाए।

यह सर्जिकल प्रक्रिया आमतौर पर सामान्य एनेस्थीसिया लगाकर की जाती है। सर्जरी के बाद कम से कम एक हफ्ते के लिए आपको अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता होती है। कभी-कभी आपके स्वास्थ्य के अनुसार सामान्य से अधिक समय भी लग सकता है। सर्जरी के लगभग तीन महीनों के बाद ही आप अपनी रोजाना की सामान्य गतिविधियांं फिर से कर पाते हैं। हालांकि, कभी-कभी यह आपके स्वास्थ्य और आप क्या काम करते हैं आदि पर भी निर्भर करता है।

(और पढ़ें - हार्ट बाईपास सर्जरी कैसे की जाती है)

  1. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन क्या है - What is pericardiectomy in Hindi?
  2. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन किसलिए की जाती है - Why is the pericardiectomy recommended in Hindi?
  3. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन से पहले - What preparations are needed before pericardiectomy in Hindi?
  4. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन के दौरान - How is pericardiectomy done in Hindi?
  5. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन के बाद - How to care for yourself after pericardiectomy in Hindi?
  6. पेरिकार्डेक्टमी का ऑपरेशन की जटिलताएं - What are the possible complications/risks of pericardiectomy in Hindi?

पेरिकार्डेक्टमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसकी मदद से पूरी पेरिकार्डियम या उसके किसी हिस्से को निकाल कर शरीर से अलग कर दिया जाता है। पेरिकार्डियम हृदय के चारों तरफ मौजूद दो सतहों वाली एक थैली होती है। इसमें विशेष द्रव होता है, जो हृदय के पंप करते समय उसके आस-पास चिकनाई पैदा करता है। इसके अलावा पेरिकार्डियम हृदय को संक्रमण व अन्य कई बीमारियों से बचाने का काम भी करती है। पेरिकार्डियम हृदय का असाधारण रूप से आकार बढ़ने की स्थिति को भी रोकता है, जो आमतौर अधिक रक्त जमा हो जाने के कारण होता है।

कुछ गंभीर स्थितियों में वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन (जैसे कि टीबी) के मामलों में पेरिकार्डियम सख्त हो जाता है, जिस स्थिति को कॉनस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डायटिस कहा जाता है। कॉनस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डायटिस में पेरिकार्डियम की ऊपरी सतह में सूजन व लालिमा आ जाती है। इस स्थिति में हृदय रक्त को पंप करते समय सामान्य रूप से फैल नहीं पाता है और इस कारण से हृदय में थोड़ा रक्त रुका रहा जाता है। जब हृदय से रक्त पूरी तरह से खाली न हो पाए, तो उसमें सूजन आने लगती है और अंत में हृदय काम करना बंद कर देता है, जिसे हार्ट फेलियर कहा जाता है।

(और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज)

यदि आपको लंबे समय से कॉनस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डायटिस की समस्या है और दवाओं व अन्य इलाज प्रक्रियाओं से वह ठीक नहीं हो पा रही है, तो डॉक्टर पेरिकार्डेक्टमी करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस स्थिति में तीव्र और चुभने वाला दर्द होता है, जो आमतौर पर लंबी व गहरी सांस लेने, खांसने और सीधा लेटने पर गंभीर हो जाता है। हालांकि, जब आप सीधे बैठ या खड़े हो जाते हैं या फिर आगे की तरफ झुक जाते हैं, तो दर्द कम होने लगता है। पेरिकार्डायटिस से होने वाले अन्य लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं -

यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या है, जो पेरिकार्डेक्टमी सर्जरी करवाने की सलाह नहीं दी जाती है -

  • मायोकार्डियल एट्रोफी (हृदय की मांसपेशियां सिकुड़ जाना या काम करना बंद कर देना)
  • पेरिमायोकार्डियल फाइब्रोसिस (पेरिकार्डियम की मोटाई असामान्य रूप से बढ़ जाना)

सर्जरी करने से पहले सर्जन कुछ बातों के बारे में पूछताछ करेंगे, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • आप गर्भवती हैं या नहीं या फिर आगे गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं आदि के बारे में पूछताछ
  • आप हाल ही में कौन सी दवाएं, सप्लीमेंट्स या हर्बल उत्पाद ले रहे हैं।
  • आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या तो नहीं है
  • हाल ही में कोई अन्य सर्जरी तो नहीं हुई है

इन सभी सवालों के जवाब मिलने के बाद डॉक्टर पेरिकार्डेक्टमी करने की तैयारियां शुरू करते हैं, जिसमें निम्न शामिल हैं -

  • यदि आप एस्पिरिन या रक्त को पतला करने वाली अन्य कोई दवा ले रहे हैं, तो सर्जन सर्जरी शुरू करने से पहले ही आपको कुछ समय के लिए ये दवाएं लेना बंद करने या इनकी खुराक को कम करने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये दवाएं रक्त का थक्का बनने की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित कर देती हैं।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो आपको उसे बंद करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि धूम्रपान करने से सर्जरी से पहले और बाद में कई जटिलताएं हो सकती हैं।
  • सर्जरी वाले दिन आपको कुछ भी खाने या पीने की सलाह नहीं दी जाएगी।

इसके बाद आपके कुछ विशेष टेस्ट किए जाएंगे, जिन्हें प्री-ऑपरेटिव टेस्ट कहा जाता है -

  • सामान्य स्वास्थ्य की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट
  • छाती की अंदरूनी संरचना की जांच करने के लिए एक्स रे
  • हृदय की धड़कन की जांच करने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम
  • हृदय की कार्य प्रक्रिया की जांच करने के लिए हार्ट कैथीटेराइजेशन
  • हृदय की संरचना व इसके अंदर रक्त के बहाव की जांच करने के लिए इकोकार्डियोग्राम
  • हृदय संबंधी अन्य जानकारियां प्राप्त करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट जैसे सीटी स्कैन और एमआरआई

आपको सर्जरी से एक दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा। आपके भर्ती होने के बाद अस्पताल में निम्न प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी -

  • मेडिकल टीम सबसे पहले आपसे पेरिकार्डेक्टमी के बारे में बात करेगी और सर्जिकल प्रक्रिया के बारे में आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देगी।
  • यदि आपको छाती पर बाल हैं, तो सबसे पहले उनको साफ किया जाएगा और फिर उसके बाद एंटीसेप्टिक से उस जगह को साफ किया जाएगा, ताकि संक्रमण आदि के खतरे को कम किया जा सके।

सर्जरी वाले दिन

डॉक्टर सर्जरी शुरू होने से लगभग एक घंटा पहले आएंगे और आपको कुछ दवाएं देंगे। ये दवाएं आमतौर पर आपको रिलैक्स करने में मदद करेंगी।

यदि आपने कोई आभूषण या अन्य कोई वस्तु लगाई है, तो डॉक्टर उसे उतारने को कह सकते हैं जैसे डेन्चर, घड़ी, चश्मा।

उसके बाद आपको ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया जाएगा और सर्जरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सर्जरी प्रक्रिया को निम्न तरीके से शुरू किया जाता है -

  • सबसे पहले आपको एनेस्थीसिया दिया जाएगा, जिससे आपको गहरी नींद आ जाएगी।
  • जब आप सो जाएंगे, तो डॉक्टर आपकी छाती के बीच में कुछ इंच लंबा चीरा लगाएंगे। चीरा लगने के बाद त्वचा को एक तरफ कर दिया जाता है, जिससे अंदर की हड्डी दिखने लग जाती है।
  • आपकी उरोस्थि (Sternum) को अलग किया जाता है, जिसकी मदद से सर्जन हृदय तक पहुंच पाते हैं।
  • उसके बाद सर्जन पेरिकार्डियम के प्रभावित हिस्से को निकाल देते हैं, जबकि कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर पूरी पेरिकार्डियम को भी निकालना पड़ सकता है।
  • संभव हो तो पेरिकार्डियम को निकालने की बजाए उसकी मरम्मत भी की जा सकती है।
  • पेरिकार्डियम के निकलने के बाद सर्जन उरोस्थि को फिर से उनकी जगह पर टिका देते हैं।
  • छाती में एक विशेष ट्यूब भी लगा दी जाती है और त्वचा को अपनी जगह पर लगा कर उसमें टांके लगा दिए जाते हैं। टांकों के ऊपर पट्टी लगा दी जाती है।

सर्जरी के बाद आपको कम से कम एक हफ्ते के लिए अस्पताल में रहना पड़ सकता है, इस दौरान डॉक्टर आपके हृदय की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वह ठीक से काम कर रहा है या नहीं।

पेरिकार्डेक्टमी से पूरी तरह रिकवर होने में आपको कम से कम 6 से 8 हफ्तों का समय लगता है। हालांकि, कई बार समय इससे कम या ज्यादा भी लग जाता है, जो मुख्य रूप से आपकी स्वास्थ्य क्षमता और सर्जरी के बाद आपकी हालत पर निर्भर करता है।

पेरिकार्डेक्टमी के बाद कुछ देखभाल करने की आवश्यकता होती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • घाव की सफाई -
    सर्जरी के टांकों वाले घावों को ध्यानपूर्वक व कोमलता के साथ साफ करें। इसके लिए आप कोई हल्का साबुन भी ले सकते हैं। साफ करते समय उन्हें रगड़ें या नोचें नहीं।
     
  • तकलीफ -
    मौसम में बदलाव होने के कारण आपको सुबह के समय सर्जरी वाले स्थान पर जकड़न सी महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में सर्जन कुछ दवाएं दे देते हैं, जो इस तकलीफ को कम करने में मदद करेंगी। डॉक्टर आपको सर्जरी वाली जगह पर हल्की गर्म सिकाई करने की सलाह भी दे सकते हैं।
     
  • शारीरिक थेरेपी -
    डॉक्टर आपको फीजिकल थेरेपिस्ट के पास भी भेज सकते हैं, जो आपको रिकवरी के दौरान कुछ लाभदायक एक्सरसाइज के बारे में बताएंगे। ये एक्सरसाइज आपको धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों में लौटने में आपकी मदद करेंगे।
     
  • अधिक वजन उठाना -
    डॉक्टर आपको सर्जरी के 2 महीनों तक 4.5 किलो से भारी वजन न उठाने की सलाह दे सकते हैं। क्योंकि भारी वजन उठाने से छाती की हड्डी के घावों के ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और अन्य जटिलताएं भी विकसित हो सकती हैं।
     
  • धूम्रपान -
    यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको धूम्रपान छोड़ने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि धूम्रपान करने से भी सर्जरी से रिकवर होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
     
  • सीढ़ियां चढ़ना -
    सर्जरी के बाद पहले हफ्ते डॉक्टर आपको सीढ़ियां न चढ़ने की सलाह देते हैं और उसके बाद भी कुछ समय तक सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
     
  • यौन गतिविधियां -
    सर्जरी के एक या दो हफ्तों बाद डॉक्टर आपको यौन संबंध बनाने की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आप कोई शारीरिक गतिविधि करते समय जल्दी नहीं थकते हैं, तो आप यौन गतिविधियां कर सकते हैं।
     
  • ड्राइविंग -
    सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको कम से कम 4 से 6 हफ्तों तक ड्राइविंग या अन्य कोई मशीन न चलाने की सलाह देते हैं। आप सर्जन से सलाह लेने के बाद ही ड्राइविंग शुरू करें।
     
  • काम -
    डॉक्टर आपको सर्जरी के बाद कम से कम से कम 3 महीनों के लिए अपने काम से छुट्टी लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप क्या काम करते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप कोई ऐसा काम करते हैं, जिसमें शारीरिक मेहनत नहीं होती है, तो हो सकता है डॉक्टर आपको थोड़ा जल्दी अपना काम शुरू करने की इजाजत दे सकते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें -

  • छाती में होने वाला दर्द धीरे-धीरे बढ़ जाना
  • बुखार होना
  • हृदय की धड़कन बढ़ जाना
  • जी घबराना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • सांस फूलना

पेरिकार्डेक्टमी निम्न जटिलताओं से संबंधित हो सकती है -

  • रक्त का थक्का जमना, जिससे स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं
  • हृदय की धड़कनें असामान्य होना
  • फेफड़ों के आस-पास द्रव जमा होना
  • संक्रमण
  • हार्ट अटैक
  • निमोनिया
  • हृदय द्वारा कम मात्रा में रक्त पंप करना
  • एनेस्थीसिया से होने वाली जटिलाएं जैसे एलर्जी, उलझन या आवाज बैठ जाना
  • मृत्यु (कुछ दुर्लभ मामलों में)

(और पढ़ें - स्किन एलर्जी क्या है)

संदर्भ

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  2. University of Rochester Medical Center [Internet]. University of Rochester. New York. US; Pericardiectomy
  3. Bernhard M, Peter M, Arsen DR, Raimund E, Reiner R, Yehuda A, et al. Guidelines on the diagnosis and management of pericardial diseases executive summary: the task force of the diagnosis and management of pericardial diseases of the European Society of Cardiology. Eur Heart J. 2004 Apr 1;25(7):587–610. PMID: 15120056.
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