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पैलिडोटोमी एक न्यूरोसर्जिकल प्रोसीजर है, जिसे पार्किंसन रोग के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। पार्किंसन रोग से ग्रस्त लोगों के मस्तिष्क का एक हिस्सा जिसे “ग्लोबस पैलिडस इंटरना” कहा जाता है, वह अत्यधिक सक्रिय हो जाता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा हाइपरएक्टिव होने पर शरीर की हलचल काफी प्रभावित हो जाती है। पैलिडोटोमी सर्जरी की मदद से इस हिस्से को नष्ट कर दिया जाता है, तो पार्किसन्स डिजीज के लक्षणों से राहत मिलती है।

सर्जरी के दौरान सर्जन खोपड़ी में एक छोटा सा छिद्र बनाते हैं, जिसमें से तरल नाइट्रोजन का इस्तेमाल करते मस्तिष्क के उस हिस्से को नष्ट किया जाता है। पैलिडोटोमी सर्जरी को पूरा होने में लगभग दो घंटे का समय लगता है और सर्जरी के बाद दो से तीन दिनों तक आपको अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। ऑपरेशन के छह हफ्तों बाद आप पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। सर्जरी के बाद कई बार आपको अस्पताल बुलाया जाता है, जिस दौरान कुछ विशेष स्कैन व अन्य टेस्ट किए जाते हैं। इन परीक्षणों की मदद से यह पता चलता है कि ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो गया है या नहीं।

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  1. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग के लिए सर्जरी) क्या है - What is Pallidotomy in Hindi
  2. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग की सर्जरी) किसलिए की जाती है - Why is Pallidotomy done in Hindi
  3. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग के लिए सर्जरी) से पहले - Before Pallidotomy in Hindi
  4. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग के लिए सर्जरी) के दौरान - During Pallidotomy in Hindi
  5. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग के लिए सर्जरी) के बाद - After Pallidotomy in Hindi
  6. पैलिडोटोमी (पार्किंसंस रोग के लिए सर्जरी) की जटिलताएं - Complications of Pallidotomy in Hindi
पैलिडोटोमी के डॉक्टर

पैलिडोटोमी सर्जरी किसे कहते हैं?

पैलिडोटोमी एक न्यूरोलॉजिकल प्रोसीजर है, जिसमें ग्लोबस पैलिडस इंटरना नामक मस्तिष्क के एक छोटे से टुकड़े को लिक्विड नाइट्रोजन से नष्ट किया जाता है। पैलिडोटोमी सर्जरी को पार्किंसन रोग के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

पार्किसन्स डिजीज तंत्रिका प्रणाली को प्रभावित करने वाला विकार (न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर) है, जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के “सब्सटेंशिया नियाग्रा” नामक हिस्से को प्रभावित करता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा डोपामाइन नामक हार्मोन बनाने का काम करता है। डोपामाइन एक केमिकल मेसेंजर (रासायनिक संदेशवाहक) है, जो शरीर के किसी हिस्से और न्यूरॉन के बीच संकेतों को प्रसारित करता है। पार्किंसन रोग में डोपामाइन बनना कम हो जाता है और परिणामस्वरूप शरीर की हलचल प्रभावित हो जाती है। सब्सटाेंशिया नियाग्रा में डोपामाइन का उत्पादन कम होने से सब्सटेंशिया नियाग्रा के साथ-साथ ग्लोबस पैलिडस इंटरना नामक मस्तिष्क का हिस्सा भी हाइपरएक्टिव हो जाता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा अतिसक्रिय होने के कारण मस्तिष्क शरीर की हलचल को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है।

वैसे तो पार्किसन्स डिजीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे जानलेवा नहीं समझा जाता है क्योंकि इसके लक्षणों को नियंत्रित करना संभव है।

हाइपरएक्टिव हुए ग्लोबस पैडिलस इंटरना को नष्ट करने से पार्किसन्स डिजीज से होने वाले लक्षण कम हो जाते हैं जैसे हाथ कांपना और निगलने में कठिनाई आदि। इस सर्जरी की मदद से पार्किंसन रोग के लिए ली जाने वाली कई दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट से भी आराम मिल सकता है जैसे अकड़न और अनैच्छिक शारीरिक हलचल आदि।

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पैलिडोटोमी सर्जरी क्यों की जाती है?

पैलिडोटोमी सर्जरी उन लोगों के लिए की जाती है, जो पार्किंसन रोग से ग्रस्त हैं और रोग गंभीर स्टेज में पहुंच गया है। उदाहरण के लिए यदि पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्ति को शारीरिक हलचल में बदलाव, गंभीर कंपन और गंभीर अकड़न हो रही है, जिन्हें दवाओं से नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, तो डॉक्टर पैलिडोटोमी सर्जरी करने पर विचार कर सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से पार्किंसन रोग की दवाएं (विशेष रूप से लेवोडोपा) ले रहा है और उसे गंभीर साइड इफेक्ट होने लगे हैं, तो उन्हें नियंत्रित करने के लिए भी यह सर्जरी की जा सकती है। लंबे समय से लेवोडोपा जैसी दवाएं लेने से शरीर में अनियंत्रित रूप से झटके के साथ शारीरिक हलचल होना और ऑन-ऑफ पीरियड्स की समस्याएं होने लगती हैं। लक्षण बार-बार ठीक होने और फिर से विकसित होने की स्थिति को ऑन-ऑफ पीरियड कहा जाता है, जो आमतौर पर डोपामाइन का स्तर बार-बार ऊपर नीचे होने के कारण होता है। इसमें व्यक्ति कुछ सेकेंड या मिनट के लिए शांत हो जाता है और उसके बाद फिर से अनियंत्रित शारीरिक हलचल करने लगता है।

पैलिडोटोमी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

यदि पार्किंसन रोग से ग्रस्त किसी व्यक्ति का शरीर लेवोडोपा दवा से कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो उसे यह सर्जरी नहीं करवानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैलिडोटोमी सर्जरी से कोई फायदा नहीं मिल पाता है।

इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियों से ग्रस्त लोगों को भी पैलिडोटोमी सर्जरी न करवाने की सलाह दी जा सकती है, जिनमें निम्न शामिल है -

  • डिमेंशिया
  • मस्तिष्क के दो हिस्सों के बीच का संपर्क टूटने पर होने वाली जटिलता (स्ट्रियाटोनिग्रेल डिजेनेरेशन)
  • सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी जिसमें व्यक्ति की देखने, हिलने-डुलने, शारीरिक संतुलन बनाने और बोलने आदि की क्षमता प्रभावित हो जाती है

इसके अलावा यदि आपको अन्य कोई भी ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जो जीवन के लिए घातक हो सकती है तो ऐसे में भी डॉक्टर पैलिडोटोमी सर्जरी न करने पर विचार करते हैं।

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पैलिडोटोमी सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से पहले डॉक्टर आपको कई बार अस्पताल बुलाते हैं, जिस दौरान पार्किंसन रोग के लक्षणों की जांच की जाती है और साथ ही कुछ अन्य टेस्ट किए जाते हैं। ये टेस्ट सर्जरी की प्लानिंग के लिए भी किए जाते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • ब्लड टेस्ट
  • अलग-अलग कार्यों के दौरान शारीरिक हलचल की वीडियो रिकॉर्ड करना ताकि उनका अध्ययन किया जा सके
  • मस्तिष्क के उस हिस्से का एमआरआई स्कैन करना, जिसकी सर्जरी की जानी है
  • न्यूरोफिजियोलॉजिकल असेसमेंट, जिसकी मदद से आपके मूड, याददाशत और सोचने की प्रक्रिया की जांच की जाती है

डॉक्टर आपको सर्जरी से पहले ही पैलिडोटोमी से होने वाले लाभ व जोखिम आदि के बारे में बता देते हैं। इसके बाद निर्णय आप पर छोड़ दिया जाता है कि सर्जरी करनी है या नहीं। जब आपको सर्जरी से संबंधी सभी जानकारियां मिल जाती हैं, तो आपको सहमति पत्र दिया जाता है जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा या हर्बल उत्पाद आदि लेते हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। डॉक्टर सर्जरी से कुछ दिन पहले ही कुछ दवाओं के सेवन को बंद करने की सलाह दे सकते हैं। इन दवाओं में आमतौर पर डायक्लोफेनेक, आइबुप्रोफेन, एस्पिरिन, दर्दनिवारक दवाएं और विटामिन ई आदि शामिल हैं।

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पैलिडोटोमी सर्जरी कैसे की जाती है

जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो हॉस्पिटल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं, जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है। साथ ही आपको स्टॉकिंग्स दी जाती हैं, जो रक्त के थक्के बनने से रोकती हैं। आप सर्जरी के दौरान जागते ही रहेंगे। पैलिडोटोमी की सर्जरी प्रोसीजर कुछ इस प्रकार होती है -

  • आपके सिर में चार अलग-अलग जगहों पर लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे सर्जरी वाला हिस्सा पूरी तरह से सुन्न हो जाता है।
  • जब ये चारों हिस्से पूरी तरह से सुन्न हो जाते हैं, तो यहां पर चार पिन लगाई जाती हैं। ये पिन सिर में कुछ ही मिलीमीटर की गहराई में लगाई जाती हैं।
  • इन पिन के ऊपर एक विशेष फ्रेम फिट किया जाता है, जिसे “स्टीरियोटैक्टिक हेड” कहा जाता है। यह फ्रेम आपके सिर को सर्जरी के दौरान हिलने-डुलने से रोकता है।
  • यदि आपको सर्जरी के दौरान कुछ तकलीफ होती है, तो डॉक्टर आपको हल्की शामक (माइल्ड सीडेटिव) दवाएं दे देते हैं। इन दवाओं से आपको रिलैक्स महसूस होता है और आप सर्जरी के दौरान शांत रहते हैं।
  • टारगेट लोकेशन अर्थात जिस हिस्से की सर्जरी करनी है उसे ढूंढने के लिए सीटी स्कैन किया जा सकता है।
  • इसके बाद आपको फिर से लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है।
  • अब जिस हिस्से की सर्जरी करनी है उसके ऊपर एक छोटा सा छिद्र बनाया जाता है, जिसके अंदर एक खोखले उपकरण को ग्लोबस पैडिलस इंटरना तक पहुंचाया जाता है।
  • इस उपकरण की मदद से इस हिस्से में लिक्विड नाइट्रोजन डाली जाती है, जो अत्यधिक ठंडा पदार्थ होता है। यह पदार्थ उस हिस्से को ठंड से सुन्न करके नष्ट कर देता है।
  • जब यह हिस्सा नष्ट हो जाता है, तो उपकरण व पिन आदि निकाल लिए जाते हैं और घाव को बंद कर दिया जाता है।

इस सर्जरी प्रोसीजर को पूरा होने में कम से कम दो घंटे का समय लगता है। सर्जरी के बाद आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर देते हैं। सर्जरी के बाद आपको दो से तीन दिन तक अस्पताल में ही भर्ती रहना पड़ सकता है और यदि इसके बाद भी आपका स्वास्थ्य अस्थिर महसूस हो रहा है तो लंबे समय के लिए भी आपको अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है। प्रोसीजर के बाद जब आप अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो इस दौरान निम्न प्रक्रियाएं की जाती हैं -

  • सर्जरी के बाद उसी दिन एमआरआई की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सर्जरी सफलतापूर्वक हो गई है या नहीं।
  • आपके हाथ या बांह की नस में सुई लगाकर उसे इंट्रावेनस ड्रिप से जोड़ दिया जाता है, जिसकी मदद से आपको दवाएं व आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।
  • अस्पताल में रहने के दौरान आपके शारीरिक संकेतों पर करीब से नजर रखी जाएगी जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और नाड़ी दर आदि।
  • डॉक्टर आपको बेड पर अपनी पोजीशन को थोड़ी-थोड़ी देर में बदलने की सलाह देते हैं, ताकि आपके शरीर के किसी हिस्से पर लंबे समय तक दबाव न पड़े ऐसा करने से आपको बेडसोर (दबाव अल्सर) होने का खतरा कम रहता है।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार की बीमारी या अन्य कोई समस्या महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। डॉक्टर आपको समस्या के अनुसार दवाएं दे सकते है।

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पैलिडोटोमी सर्जरी के बाद क्या देखभाल की जाती हैं?

सर्जरी के बाद जब आपको घर जाने के लिए छुट्टी दे दी जाती है, तो इस दौरान निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है जैसे -

  • आपको सर्जरी के बाद कम से कम छह महीने तक ड्राइविंग या अन्य कोई मशीन ऑपरेट न करने की सलाह दी जाती है।
  • आपको सर्जरी के छह हफ्तों बाद अपनी सामान्य दिनचर्या के कार्य शुरू करने की सलाह दी जाती है।
  • सर्जरी के बाद कुछ दिन तक आपको सभी काम करने के लिए किसी व्यक्ति की जरूरत पड़ती है।
  • जिन लोगों की पैलिडोटोमी सर्जरी हुई है, वे लगभग छह हफ्ते में पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको पैलिडोटोमी सर्जरी के बाद कुछ भी महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

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पैलिडोटोमी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

पैलिडोटोमी सर्जरी से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • स्ट्रोक (मस्तिष्क में रक्तस्राव होने के कारण देखने व बोलने में समस्याएं होना)
  • संक्रमण
  • दौरे पड़ना
  • शारीरिक रूप से कमजोरी होना 
  • अस्पष्ट तरीके से बोलना
  • लक्षणों में सुधार न होना या कम होना
  • याददाश्त व सोचने की शक्ति में कमी होना

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संदर्भ

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  2. Parkinson's Foundation [Internet]. Florida. US; What Is Parkinson's?
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