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लिपोमा निकालने की सर्जरी एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है। यह सर्जरी लिपोमा को निकालने के लिए की जाती है। जब लिपोमा की वजह से लक्षण सामने आने लगते हैं या कॉस्‍मेटिक असहजता महसूस होने लगती है, जब इसे निकालने के लिए यह सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी से पहले ब्‍लड टेस्‍ट और लिपोमा के रेडियोलॉजिकल टेस्‍ट किए जाते हैं। इस सर्जरी में कम समय लगता है और इसके जोखिम भी बहुत कम हैं इसलिए इसमें बस एक दिन के लिए अस्‍पताल में रूकना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद देखभाल से इसे दोबारा होने से रोका जा सकता है।

  1. लिपोमा निकालने की सर्जरी क्‍या है - Lipoma removal surgery kya hoti hai
  2. लिपोमा निकलवाने की सर्जरी कब करवानी पड़ती है - Lipoma removal surgery kab karvani chahiye
  3. लिपोमा रिमूवल सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए - Lipoma removal surgery kaun nahi karva sakta
  4. लिपोमा निकालने की सर्जरी से पहले की तैयारी - Lipoma nikalne ki surgery se pehle ki taiyari
  5. लिपोमा रिमूवल सर्जरी कैसे की जाती है - Lipoma removal surgery karne ka tarika
  6. लिपोमा निकालने की सर्जरी से जुड़े जोखिम और जटिलताएं - Lipoma removal surgery ki complications
  7. लिपोमा रिमूवल सर्जरी के बाद देखभाल कैसे करें - Lipoma removal surgery ke baad care kaise kare
  8. सारांश - Takeaway

स्किन के अंदर फैट से बना एक मुलायम, दर्द रहित और मोबाइल लंप को लिपोमा कहते हैं। ये सूजन गैर-कैंसरकारी होती है। लिपोमा होना आम है और यह अनुवांशिक पूर्ववृत्ति होता है। ये शरीर में कहीं भी हो सकता है लेकिन ज्‍यादातर पीठ, धड़, बांहों, कंधों और गर्दन पर होता है। आमतौर पर इसके लक्षण नहीं होते हैं और कॉस्‍मेटिक कारणों के अलावा इसे मैनेज करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। सूजन को निकालने की सर्जिकल प्रक्रिया को लिपोमा रिमूवल सर्जरी कहते हैं। ये सर्जरी एक छोटी-सी प्रक्रिया है जिसकी सफलता की दर ज्‍यादा है और जटिलताएं कम हैं। ये सर्जरी निम्‍न दो तरीकों से की जा सकती है :

  • लिपोमा का एक्‍सीजन : ये छोटे लिपोमा में किया जाता है।
  • लिपोसक्‍शन : बड़े लिपोमा में इस तरीके का इस्‍तेमाल किया जाता है।

आमतौर पर लिपोमा के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं और इसे ऐसे ही छोड़ देने की सलाह दी जाती है। जब सूजन में लक्षण दिखने लगें, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसके लक्षण हो सकते हैं :

  • गांठ का अचानक से बढ़ जाना
  • गांठ में दर्द, लालिमा या छूने पर दर्द होना
  • गांठ मुलायम या सख्‍त हो जाना, यह जैसी थी, वैसी अब न रहना
  • गांठ पर किसी भी नस को दबाने पर दर्द होना
  • सूजन पर नील पड़ना : जब लिपोमा में रक्‍त वाहिकाएं होती हैं, तब ऐसा होता है
  • कॉस्‍मेटिक डिस्‍ट्रेस
  • सूजन के कैंसरकारी होना या इसका जोखिम रहना

इस सर्जरी का कोई जोखिम नहीं है इसलिए किसी भी स्थिति में आप यह सर्जरी करवा सकते हैं। हालांकि, पहले से कोई बीमारी है जिसमें रीजनल या जनरल एनेस्‍थीसिया देने की जरूरत है, जो इस स्थिति में एनेस्‍थीसिया से होने वाले जोखिमों का खतरा बढ़ सकता है इसलिए सर्जरी से पहले बीमारी को कंट्रोल करना जरूरी है।

जनरल सर्जन द्वारा यह सर्जरी की जाती है। इससे पहले सर्जन मरीज से उसके लक्षणों, फैमिली हिस्‍ट्री और दवा आदि के बारे में पूछते हैं।

पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो सर्जरी से पहले उसमें बदलाव या उसे बंद किया जा सकता है।

सर्जरी से पहले निम्‍न टेस्‍ट किए जाते हैं :

  • रूटीन ब्‍लड टेस्‍ट
  • छाती का एक्‍स-रे
  • ईसीजी
  • लिपोमा और सिस्‍ट के बीच अंतर देखने के लिए अल्‍ट्रासाउंड, सीटी स्‍कैन या सूजन का एमआरआई स्‍कैन जैसे रेडियोलॉजिकल टेस्‍ट करवाए जाते हैं। इससे पता चलता है कि सूजन के अंदर क्‍या है और इसकी वजह से आसपास की संरचना पर क्‍या असर पड़ रहा है।

बड़े लिपोमा की बायोप्‍सी के लिए इसे पैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा जाता है। इससे पता चलता है कि लिपोमा कैंसरकारी था या नहीं।

इस सर्जरी में अस्‍पताल में दिन में भर्ती किया जाता है। सर्जरी से एक रात पहले मरीज को कुछ भी न खाने-पीने के लिए कहा जाता है। मरीज को अपने सभी जरूरी कागजों और रिर्पोटों के साथ अस्‍पताल आना होता है। इसके बाद मरीज को हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाती है और सर्जन उसका अंतिम बार चेकअर करते हैं। मरीज से उसकी अनुमति के लिए एक फॉर्म साइन करवाया जाता है और इससे पहले सर्जन प्रक्रिया के तरीके, रिजल्‍ट और जोखिम के बारे में बता देते हैं। फिर नर्स सर्जरी वाली जगह से बाल हटाकर मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाती है।

लिपोमा किस जगह पर है, इसके आधार पर मरीज को ऑपरेशन टेबल पर पीठ या पेट के बल लिटाया जाता है। बीपी, हार्ट रेग वगैरह को देखने के लिए बॉडी से मॉनिटर को अटैच किया जाता है। सर्जरी के लिए जरूरी दवाएं देने के लिए आईवी ड्रिप लगाई जाएगी। जिस जगह सर्जरी करनी है, उसे साफ कर के उसे ड्रेप से ढक दिया जाता है। लिपोमा किस जगह है और कितना बड़ा है, उसके हिसाब से लोकल/रीजनल/जनरल एनेस्‍थीसिया दिया जा सकता है।

लिपोमा निकालने के दो तरीके हैं, जैसे कि :

  • लिपोमा का एक्‍सीजन : जब लिपोमा छोटा और आसानी से पहुंचने वाला हो, तब इस तरीके को अपनाया जाता है। इसमें कारपेल से कट लगाकर लिपोमा को बाहर निकाल लिया जाता है और आसपास के ऊतक से अलग कर दिया जाता है।
  • लिपोसक्‍शन : बड़े और कई लिपोमा के लिए इस नए तरीके का इस्‍तेमाल किया जाता है। एक कट लगाने के बाद उससे पतली-सी ट्यूब को अंदर डालकर लिपोमा का सारा फैट निकाल लिया जाता है। इसका एक फायदा यह है कि इसमें छोटा कट लगता है लेकिन यह तरीका महंगा है।

लिपोमा निकालने के बाद ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए दबाव बनाया जाता है। इसके बाद घुलने वाले टांके लगा दिए जाते हैं और उस पर पट्टी कर दी जाती है। कुछ समय बाद ये टांके अपने आप घुलकर निकल जाते हैं। इसके बाद लिपोमा को पैथोलॉजिकल टेस्‍ट के लिए भेज दिया जाता है।

इस सर्जरी में 30 मिनट से लेकर एक घंटे का समय लगता है।

इस सर्जरी के जोखिम और जटिलताएं कम हैं, हालांकि इसमें कुछ जोखिम हो सकते हैं, जैसे कि :

  • घाव से बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना, खासतौर पर एंजियोलिपोमा के मामले में।
  • आसपास की संरचनाओं में चोट लगना।
  • सेरोमा : कुछ दिनों के बाद ये सूजन अपने आप कम हो जाएगी।
  • घाव पर इंफेक्‍शन होना।
  • एनेस्‍थीसिया की वजह से कोई तकलीफ होना।

सर्जरी के बाद मरीज को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाया जाता है और कुछ घंटों तक ऑब्‍जर्वेशन में रखा जाता है। सर्जरी वाली जगह पर दर्द को कम करने के लिए दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। डॉक्‍टर डिस्‍चार्ज पेपर तैयार करते हैं जिसमें दवाएं और घाव की देखभाल के लिए सलाह दी जाती है। इसमें निम्‍न चीजें शामिल हैं :

  • पहले से कोई बीमारी है, तो उसकी दवा को जारी रखना है या नहीं।
  • इंफेक्‍शन और दर्द से बचने के लिए एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं
  • 12 से 24 घंटे के बाद पट्टी निकाल दी जाएगी। घाव से हल्‍की ब्‍लीडिंग या सूजन हो रही है, तो इस पर बर्फ की सिकाई कर सकते हैं।
  • इंफेक्‍शन से बचने के लिए घाव की जगह को साफ रखना जरूरी है।
  • जब तक टांके अपने आप नहीं घुलते हैं, तब तक क्रीम, पाउडर या तेल न लगाएं।
  • नहाने के बाद ऑपरेशन वाली जगह को सूखा रखें।
  • कुछ दिनों तक कोई भी मुश्किल काम या एक्‍सरसाइज न करें।

निम्‍न लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को बताएं :

  • घाव से बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना
  • सूजन या दर्द
  • पस निकलना
  • बुखार

घाव को ठीक होने में 1 से 2 हफ्ते लग सकते हैं। समय के साथ टांके अपने आप घुल जाएंगे। किस तरीके से घाव को बंद किया गया है, उसके आधार पर निशान रह सकता है। डॉक्‍टर के बताए अनुसार देखभाल करें और लिपोमा के टेस्‍ट को लेकर डॉक्‍टर से बात करें।

जब लिपोमा में लक्षण दिखने लगें या कॉस्‍मेटिक असहजता महसूस होने लगे, तब लिपोमा रिमूवल सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी में बहुत कम समय लगता है और इसकी सफलता की दर ऊंची है और जटिलताएं कम आती हैं। सर्जरी के बाद इसके दोबारा बनने के मामले दुर्लभ ही होते हैं।

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