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लेबियाप्‍लास्‍टी एक ऐसी सर्जरी है जो लेबिया माइनोरा और/या लेबिया मेजोरा (यूरेथ्रा और योनि के आस पास की स्किन) के साइज में बदलाव करने के लिए की जाती है।

यह सर्जरी कॉस्‍मेटिक या मेडिकल कारण की वजह से की जाती है।

सर्जरी के कारण को लेकर ऑपरेशन से पहले मरीज की काउंसलिंग जरूरी है। सर्जरी से पहले रूटीन ब्‍लड टेस्‍ट करवाए जाते हैं।

इस प्रक्रिया में ज्‍यादातर मरीज को दिन में अस्‍पताल में भर्ती किया जाता है लेकिन सर्जरी कितनी मुश्किल या गंभीर हुई है, इसके आधार पर तय होता है कि मरीज को अस्‍प्‍ताल में कितने दिन रूकना होगा।

सर्जरी के बाद ब्‍लीडिंग या चोट लगने से बचने के लिए घाव की देखभाल करने की सलाह दी जाती है। पूरी तरह से ठीक होने में 4 से 6 महीने लगते हैं।

  1. लेबियाप्‍लास्‍टी क्‍या है - Labiaplasty kya hoti hai
  2. लेबियाप्‍लास्‍टी कब करवानी चाहिए - Labiaplasty kaun karva sakta hai
  3. लेबियाप्‍लास्‍टी कब नहीं करवानी चाहिए - Labiaplasty kise nahi karvani chahiye
  4. सर्जरी से पहले की तैयारी - Labiaplasty se pehle ki taiyari
  5. लेबियाप्‍लास्‍टी सर्जरी कैसे की जाती है - Labiaplasty karne ka tarika
  6. सर्जरी के जोखिम और परिणाम - Labiaplasty ke risk or result
  7. लेबियाप्‍लास्‍टी सर्जरी के बाद देखभाल कैसे की जाती है - Labiaplasty ke baad care kaise kare
  8. सारांश - Takeaway
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लेबियाप्लास्टी के डॉक्टर

योनि और मूत्र नली के आसपास के स्किन के फोल्‍ड्स को लेबिया कहते हैं। इसके दो हिस्‍से होते हैं - बाहरी हिस्से को लेबिया मेजोरा और अंदरूनी हिस्से को लेबिया माइनोरा कहते हैं। लेबिया मेजोरा बाल से ढके होते हैं। लेबिया माइनोर छोटे होते हैं और इन पर बाल नहीं होते है। लेबिया का काम मूत्र नली और योनि की ओपनिंग को ढकना और सुरक्षा देना होता है।

लेबियाप्‍लास्‍टी एक सर्जरी है जो लेबिया माइनोरा के साइज में बदलाव करने के लिए की जाती है - आमतौर पर साइज कम करने के लिए। कभी-कभी इस सर्जरी में लेबिया मेजोरा भी शामिल हो सकता है।

निम्‍न स्थितियों में इस सर्जरी को करवाने की सलाह दी जाती है।

  • मेडिकल कारण -
    • जिनके लेबिया माइनोरा बड़े हों और लेबिया मेजोरा की बाउंड्री से बाहर उभड़ रहे हाें, उनकी यह सर्जरी की जाती है। ज्‍यादा ऊतक मुड़, फंस या चुभ सकते हैं जिससे एक्‍सरसाइज, सेक्‍स और साइक्‍लिंग के दौरान दिक्‍कत हो सकती है।
    • लेबिया के बड़े किनारों की वजह से पर्सनल हाइजीन बनाए रखने में दिक्‍कत आ सकती है जिससे बैक्‍टीरिया पनप सकता है और यूटीआई जैसे इंफेक्‍शन हो सकते हैं।
  • कॉस्‍मेटिक कारण
    • मेनोपॉज के बाद - हार्मोनल बदलावों की वजह से बाहरी होंठ पतले हो सकते हैं जिससे अंदरूनी होंठ बढ़ जाते हैं।
    • डिलीवरी और वजन बढ़ने की वजह से लेबिया माइनोरा बढ़ सकते हैं।
    • टाइट फिटिंग वाले कपड़े पहनने पर लेबिया की रेखाएं दिखती हों, तो इन्‍हें हटाने के लिए।
    • सेक्‍स को आनंदमय बनाने, और सेक्स के दौरान आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने के लिए।
  • जेंडर बदलने वाली सर्जरी - ट्रांसजेंडर महिला में बाहरी यौन अंग बनाने के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं में से एक लेबियाप्‍लास्‍टी भी है।

ऐसी कोई विशिष्ट स्थिति नहीं है जिसमें लेबियाप्‍लास्‍टी न करवाने की सलाह दी जाती है। लेकिन निम्नलिख्ति कंडीशन में कुछ जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है -

  • पहले से कोई बीमारी हो जैसे कि डायबिटीज, हार्ट की बीमारी या हार्मोनल प्रॉब्‍लम।
  • उस हिस्‍से में कोई इंफेक्‍शन या अन्य समस्या होना जिससे सर्जरी को सफल करने की संभावना कम हो सके।

गायनेकोलॉजिस्‍ट सर्जन या प्‍लास्टिक सर्जन द्वारा लेबियाप्‍लास्‍टी की जा सकती है। ऑपरेशन से पहले सर्जन मरीज को बताते हैं कि लेबियाप्‍लास्‍टी किस तरीके से की जाएगी और इसके जोखिम क्‍या हैं।

मरीज से लक्षणों, मासिक चक्र की जानकारी और कोई दवा लेते हैं आदि के बारे में पूछा जाएगा। अगर सर्जरी कॉस्‍मेटिक या लिंग बदलने के लिए हो रही है, तो सर्जरी से पहले और बाद में काउंसलिंग करवाना जरूरी है।

यदि पहले से कोई बीमारी है और उसकी दवा ले रहे हैं, तो खुराक में बदलाव या दवा को सर्जरी से पहले बंद किया जा सकता है। सर्जरी से पहले निम्‍न टेस्‍ट होंगे :

सर्जरी के बाद घर ले जाने के लिए किसी दोस्‍त या परिवार के सदस्‍य को रखें। सर्जरी के लिए सुबह भर्ती होकर शाम को छुट्टी मिल जाती है। हालांकि, लिंग बदलने वाली सर्जरी में कुछ दिनों तक अस्‍पताल में रूकना पड़ सकता है।

मरीज को सर्जरी से एक रात पहले से कुछ न खाने के लिए कहा जाता है। सर्जरी वाले दिन मरीज को अपनी रिपोर्टों और कागजों के साथ आना होता है। अस्‍पताल पहुंचने के बाद उसे हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाती है। सर्जन मरीज की डिटेल चेक करेंगे और नर्स सर्जरी वाली जगह को साफ करेंगी। इसमें पेल्विस और टांगों के आसपास के बालों को साफ किया जाएगा। प्रक्रिया और इससे जुड़े जोखिम समझने के बाद मरीज से ऑपरेशन की सहमति के लिए एक फॉर्म साइन करवाया जाएगा। इसके बाद मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जाएगा।

मरीज को ऑपरेशन टेबल पर पीठ के बल लेटकर टांगों को चौड़ा कर के लेटने के लिए कहा जाता है। हार्ट रेट, बीपी और ऑक्‍सीजन सैचुरेशन चेक करने के लिए बॉडी से मॉनिटर को अटैच किया जाता है। सर्जरी के दौरान दवा देने के लिए आईवी कैनुला लगाया जाता है। सर्जरी वाले हिस्‍से में पेशाब न आए, इसके लिए कैथेटर लगाया जाता है। सर्जरी वाली जगह और आसपास की जगह को साफ कर के उसे सर्जिकल ड्रेप से ढक दिया जाता है। कैसी सर्जरी करनी है और इसमें कितना समय लगेगा, इसके आधार पर लोकल या जनरल एनेस्‍थीसिया दिया जाता है।

लेबियाप्‍लास्‍टी दो तरह से की जाती है -

  1. लेबिया माइनोरा को कम करना - यह निम्‍न तरह से की जाती है :
    • ट्रिम प्रोसीजर - इसमें सर्जन लेबिया माइनोरा के बाहरी किनारों को हटा देते हैं जिससे ये लेबिया मेजोरा से छोटे दिखने लगते हैं।
    • वेज रिसेक्‍शन - इसमें लेबिया माइनोरा के अंदरूनी पहलू से वेज शेप के हिस्‍से को निकाल दिया जाता है। इससे लेबिया मेजोरा का साइज छोटा दिखने लगता है।
  2. लेबिया मेजोरा को बढ़ाना - लेबिया मेजोरा में फैट डालकर यह काम किया जाता है। इससे लेबिया मेजोरा, लेबिया माइनोरा की तुलना में बड़े दिखने लगते हैं।

सर्जरी के दौरान लगाए गए कटों को घुलने वाले टांकों से बंद कर दिया जाता है। इस पूरी सर्जरी में दो घंटे से ज्‍यादा समय नहीं लगता है।

लिंग बदलने की सर्जरी में मरीज के पेनाइल टिश्‍यू से लेबिया बनाया जाता है। लिंग बदलने की सर्जरी का यह एक स्‍टेप है। वहीं इसकी सर्जरी में भी ज्‍यादा समय लगता है।

इस सर्जरी के निम्‍न जोखिम हो सकते हैं :

  • ऑपरेशन वाली जगह से बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना
  • ऑपरेशन वाली जगह में इंफेक्‍शन होना
  • ऑपरेशन वाली जगह पर बहुत ज्‍यादा दर्द और सूजन होना
  • स्‍कार टिश्‍यू की वजह से कॉस्‍मेटिक बनावट में दिक्‍कत आना
  • आसपास की नसों को चोट लगना जिससे सनसनाहट कम महसूस होना
  • एनेस्‍थीसिया की वजह से दिक्‍कत होना

सर्जरी के बाद मरीज को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाकर कुछ घंटों के लिए ऑब्‍जर्वेशन रूम में रखा जाता है। दर्द निवारक दवाओं से दर्द और सूजन को कम किया जाता है। कैथेटर को निकाल लिया जाता है। पेशाब आराम से कर पाने का मतलब है कि एनेस्‍थीसिया का असर कम हो रहा है।

डॉक्‍टर डिस्‍चार्ज के पेपर तैयार करते हैं जिसमें जरूरी दवाओं और घाव की देखभाल करने का तरीका बताया जाता है। इसमें निम्‍न निर्देश दिए जाते हैं :

  • पहले से हुई किसी बीमारी का दवा ले रहे हैं, तो उसे जारी रखना है या नहीं।
  • दर्द और इंफेक्‍शन से बचने के लिए एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं। घाव के लिए क्रीम भी लिखी जा सकती है।
  • पहले दिन सूजन को कम और ब्‍लीडिंग को बंद करने के लिए दिन में एक या दो बार ठंडी सिकाई करें।
  • पहले कुछ दिनों में ब्‍लीडिंग हो सकती है। इसके सैनिटरी पैड पहन सकती हैं।
  • दिन में एक या दो बार सिट्ज बाथ लें। इसमें शरीर के निचले हिस्‍से को 15 से 20 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर बैठना होना है। इससे दर्द और सूजन कम एवं घाव जल्‍दी भरता है।
  • नहाने के बाद ऑपरेशन वाली जगह को सूखा रखें।
  • टॉयलेट इस्‍तेमाल करने के बाद साफ-सफाई का ध्‍यान रखें। गुनगुने पानी से योनि को साफ कर के उसे सुखाएं।
  • अंडरगार्मेंट ढीले पहनें।
  • 4 से 6 हफ्तों तक कोई भारी एक्सरसाइज और सेक्‍स न करें।

सर्जरी के बाद 4 से 6 हफ्तों में टांके घुल जाएंगे। हालांकि, निम्‍न लक्षण दिखने पर डॉक्‍टर को बताएं :

लिंग परिवर्तन के मामले में सर्जरी में रूकने और रिकवरी का समय अलग होगा।

सर्जरी के रिजल्‍ट को अपनाने के लिए मरीज को सर्जन के पास फॉलो-अप और काउंसलर के पास जाना होगा। घाव को पूरी तरह से भरने के लिए 4 से 6 महीने लगेंगे।

जब बढ़े हुए लेबिया माइनोरा की वजह से दर्द हो और रोजमर्रा के काम करने में दिक्‍कत हो, जब लेबियाप्‍लास्‍टी की सलाह दी जाती है। कुछ मरीज डिलीवरी या मेनोपॉज के बाद लेबिया की बनावट में आए बदलावों को ठीक करने के लिए भी ऐसा करते हैं।

सर्जरी से पहले ही सर्जन से अपनी उम्‍मीद और रिजल्‍ट के बारे में बात करें। सर्जरी से पहले और बाद में काउंसलिंग अहम है। पूरी तरह से रिकवर होने में 4 से 6 महीने का समय लगेगा।

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