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गैस्ट्रोटोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसे एक जीवन रक्षक सर्जिकल प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। इस सर्जिकल प्रक्रिया की मदद से पेट में एक कृत्रिम छिद्र बनाया जाता है, जिसमें एक विशेष ट्यूब (फीडिंग डिवाइस) को डाला जाता है। इस सर्जरी का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है, जिन्हें निगलने में कठिनाई हो या फिर वे किसी कारण से मुंह द्वारा भोजन नहीं कर सकते हों। गैस्ट्रोटोमी की मदद से भोजन को सीधा पेट तक पहुंचा दिया जाता है।

सर्जरी के दौरान आपको एनेस्थीसिया दी जाती है, जिससे आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सोते रहते हैं। गैस्ट्रोटोमी को तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं की मदद से किया जाता है, जिन्हें परक्यूटीनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी, लेप्रोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी और ओपन गैस्ट्रोटोमी के नाम से जाना जाता है। इस सर्जिकल प्रक्रिया को करने में 30 से 45 मिनट का कुल समय लगता है और सर्जरी के बाद आपको एक या दो दिन तक अस्पताल में रुकना पड़ता है।

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  1. गैस्ट्रोटोमी क्या है - What is Gastrostomy in Hindi?
  2. गैस्ट्रोटोमी किसलिए की जाती है - Why is Gastrostomy done in Hindi
  3. गैस्ट्रोटोमी से पहले - Before Gastrostomy in Hindi
  4. गैस्ट्रोटोमी के दौरान - During Gastrostomy in Hindi
  5. गैस्ट्रोटोमी के बाद - After Gastrostomy in Hindi
  6. गैस्ट्रोटोमी से होने वाली समस्याएं - Risks Involved with Gastrostomy in Hindi

गैस्ट्रोटोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें पेट में एक छिद्र किया जाता है। यह छिद्र पेट में फीडिंग ट्यूब डालने के लिए किया जाता है।

यह सर्जिकल प्रक्रिया उन लोगों के लिए की जाती है, जिन्हें कोई ऐसा रोग है, जिस कारण से उन्हें निगलने में कठिनाई, भोजन श्वसन नली में जाना व अन्य समस्याएं हैं। गैस्ट्रोटोमी के द्वारा लगाई गई फीडिंग ट्यूब की मदद से भोजन को मुंह या गले को बायपास करते हुए सीधे पेट तक ले जाया जाता है। हालांकि, ट्यूब के द्वारा दिया गया भोजन सामान्य मुंह द्वारा खाए जाने वाले भोजन से अलग होता है। इस भोजन को फीडिंग सॉल्यूशन कहा जाता है, जिसमें वे सभी प्रकार के पोषक तत्व होते हैं जो आपके शरीर को चाहिए होते हैं। इसके अलावा दवाएं व अन्य आवश्यक उत्पादों को भी फीडिंग ट्यूब की मदद से पेट तक पहुंचाया जा सकता है।

गैस्ट्रोटोमी का उपयोग अधिकतर लोगों में सिर्फ कुछ ही समय के लिए होता है, जबकि अन्य लोगों में यह स्थायी रूप से भी इस्तेमाल में लाई जा सकती है।

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सर्जन यह सर्जरी करवाने की सलाह आमतौर पर निम्न रोगों से ग्रस्त बच्चों व वयस्क लोगों को देते हैं-

  • पेट, भोजन नली या मुंह संबंधी कोई जन्म दोष (जन्म से ही कोई असामान्यता होना)
  • स्वस्थ्य रहने के लिए पर्याप्त भोजन न कर पाना
  • भोजन को ठीक से निगलने में असमर्थ होना

कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनके कारण गैस्ट्रोटोमी सर्जरी प्रक्रिया करनी पड़ सकती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • कैंसर या रक्त संबंधी रोगों के इलाज के दौरान मरीज को दवाएं देने के लिए
  • आवश्यकता पड़ने पर पेट को खाली करने के लिए
  • पेट में जमा गैस को कम करने के लिए

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गैस्ट्रोटोमी कौन नहीं करवा सकता है?

सर्जन आमतौर पर कुछ लोगों को गैस्ट्रोटोमी सर्जरी न करवाने का सुझाव देते हैं, जो निम्न हैं -

  • रक्त का थक्के जमना
  • सेप्सिस
  • पहले कभी गैस्ट्रोटोमी हुई होना
  • पेरिटोनाइटिस
  • पेट में पानी जमा होना (जलोदर)
  • गैस्ट्रोटोमी के छिद्र के पास संक्रमण होना
  • गैस्ट्रोपेरेसिस (ऐसी स्थिति जिसमें शरीर की पेट में मौजूद भोजन को आगे धकेलने की क्षमता कम हो जाती है
  • मार्कड पेरिटोनियल कार्सीनोमाटोसिस

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सर्जन गैस्ट्रोटोमी सर्जरी शुरू करने से पहले आपसे कुछ जानकारियां मांग सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी जैसे एलर्जी या अन्य कोई रोग
  • हाल ही में ली जा रही दवाएं व अन्य उत्पाद जैसे खून को पतला करने वाली दवाएं
  • हर्बल उत्पाद और विटामिन सप्लीमेंट्स आदि
  • हाल ही में किसी इमेजिंग टेस्ट में इस्तेमाल डाई का रिएक्शन हुआ हो

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गैस्ट्रोटोमी को शुरू करने से पहले कुछ तैयारियां की जाती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • डॉक्टर आपको सर्जरी से पहले वाले दिन ही नहाने और सिर धोने के लिए कह सकते हैं।
  • गैस्ट्रोटोमी के शुरू होने से 6 घंटे पहले ही डॉक्टर कुछ भी खाने या पीने से मना कर सकते हैं। खाना खाने से सर्जरी के दौरान पेट की सामग्री फेफड़ों में जाने का खतरा बढ़ जाता है।
  • यदि आपके किसी प्रकार के आभूषण या शरीर पर अन्य कोई सामान (जैसे घड़ी) पहना है, तो सर्जरी से पहले ही उन्हें उतार दें।
  • उसके बाद डॉक्टर आपको एक सहमति पत्र देंगे जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देंगे। हालांकि, हस्ताक्षर करने से पहले फॉर्म को अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।

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सारी तैयारियां होने के बाद आपको एक विशेष सर्जरी ड्रेस पहनने को दी जाएगी, जिसे सर्जिकल गाउन भी कहा जाता है। सर्जरी शुरू करने के लिए निम्न कार्य किए जाते हैं -

  • सबसे पहले आपकी बांह की नस में सुई लगाकर इंट्रावेनस लाइन शुरू की जाती है और साथ में खाने के लिए भी कुछ दवाएं दी जा सकती हैं।
  • उसके बाद आपको शांत करने के लिए कुछ दवाएं दी जाएंगी, जिन्हें सीडेटिव (शामक) कहते हैं।
  • आपको ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
  • आपको एनेस्थीसिया दी जाएगी, जिससे आप गहरी नींद में सो जाएंगे और आपको सर्जरी के दौरान कुछ भी महसूस नहीं होगा।
  • एक विशेष नली (एंडोट्रेकियल ट्यूब) को आपके गले से होते हुए श्वसन नली में डाला जाता है। यह ट्यूब सर्जरी के दौरान आपको सांस लेने में मदद करेगी।
  • एक अन्य ट्यूब जिसे नैसोगैस्ट्रिक ट्यूब कहा जाता है, उसे आपके मुंह या नाक के माध्यम से पेट तक डाला जाएगा। इस ट्यूब की मदद से पेट में मौजूद द्रव को खाली कर दिया जाएगा। जब आप सांस लेने और अच्छे से खाने लगेंगे, तब इस ट्यूब को हटा दिया जाएगा।

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सर्जन उसके बाद गैस्ट्रोटोमी को तीन अलग-अलग सर्जिकल प्रक्रियाओं की मदद से करते हैं, जिन्हें परक्यूटीनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी (पीईजी), लेप्रोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी और ओपन गैस्ट्रोटोमी के नाम से जाना जाता है। इन सर्जरी प्रक्रियाओं को निम्न अलग-अलग तकनीकों के साथ किया जाता है-

परक्यूटीनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी

पीईजी में सबसे पहले डॉक्टर नाक या मुंह के जरिए आपके पेट में एक पतली लचीली ट्यूब को डालेंगे, जिसके सिरे पर लाइट व कैमरा लगे होते हैं। आपके पेट में एक छोटा सा छिद्र किया जाता है।

उसके बाद डॉक्टर इस छिद्र के जरिए पेट तक एक सुई पहुंचाएंगे।

इस सुई के साथ ही एक पतली तार भी पेट में डाली जाती है, जिसे पहले से डाले गए एंडोस्कोप के सिरे विशेष हिस्से से जोड़ दिया जाता है।

उसके बाद सर्जन एंडोस्कोप को बाहर की तरफ खींच लेते हैं, जिसके साथ उससे जुड़ी हुई तार भी मुंह से बाहर की तरफ निकल जाती है। अब इस तार से गैस्ट्रोटोमी डिवाइस को जोड़ दिया जाता है।

फिर तार के दूसरे सिरे को खींचा जाता है, ताकि तार के साथ-साथ गैस्ट्रोटोमी डिवाइस भी पेट के अंदर चली जाए और पेट पर बनाए छिद्र तक पहुंच जाए।

जब ट्यूब अपनी जगह पर पहुंच जाती है, तो सर्जन एंडोस्कोप और तार को निकाल देते हैं और छिद्र को टांके लगाकर बंद कर देते हैं।

गैस्ट्रोटोमी ट्यूब को अपने स्थान पर स्थिर रखने के लिए एक विशेष डिवाइस की जरूरत पड़ती है, जिसे बंपर कहा जाता है। बंपर को अंदरूनी या बाहरी दोनों हिस्सों में लगाया जा सकता है। अंदर लगने वाले बंपर आमतौर पर गोल या X की आकृति के होते हैं, जबकि बाहर लगने वाले बंपर आमतौर पर डिस्क की आकृति वाले होते हैं और डिवाइस को पेट की दीवार से चिपकाकर रखते हैं.

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लेप्रोस्कोपिक गैस्ट्रोटोमी

सर्जन इस प्रक्रिया में नाभि के ऊपर एक छोटा सा चीरा लगाते हैं और उसमें एक विशेष सुई डाली जाती है।

इसके बाद पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी जाती है, ताकि पेट को फुलाया जा सके। ऐसा आमतौर पर पेट के अंदर मौजूद अंगों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए किया जाता है।

अब सर्जन पेट पर कुछ अन्य छोटे-छोटे चीरे भी लगाते हैं, जिनकी मदद से अन्य छोटे उपकरण पेट में डाले जाते हैं। किसी एक चीरे से पेट में एक पतली तार डाली जाती है और फिर गैस्ट्रोटोमी ट्यूब को डाला जाता है। इस तार की मदद से ही गैस्ट्रोटोमी ट्यूब को पेट में उचित स्थान तक ले जाया जाता है।

सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद छिद्रों को बंद करके उन पर टांके लगा दिए जाते हैं। ट्यूब के सिरे पर एक छोटी गुब्बारे जैसी डिवाइस लगी होती है, जो ट्यूब को पेट में स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।

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ओपन सर्जरी

ओपन गैस्ट्रोटोमी सर्जरी में सर्जन आपके पेट के बाएं या मध्य में चीरा लगाएंगे।

इसके बाद गैस्ट्रोटोमी ट्यूब को कट के माध्यम से पेट के अंदर डाला जाएगा और उसके बाद चीरे को ट्यूब के आसपास टांके लगा दिए जाएंगे। सर्जन पेट की सतह को भी ट्यूब के आसपास से सिल देते हैं।

ट्यूब को अपनी जगह पर स्थिर रखने के लिए एक छोटे से गुब्बारे की आवश्यकता पड़ती है।

गैस्ट्रोटोमी को करने में आमतौर पर 30 से 45 मिनट का समय लगता है और सर्जरी के बाद निम्न प्रक्रियाएं की जा सकती हैं -

  • आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
  • होश आने के बाद आपको उलझन, घबराहट या जी मिचलाना महसूस हो सकता है। आपको दवाओं के कारण नशा भी महसूस हो सकता है। इन स्थितियों के लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाएं दे सकते हैं।
  • यदि आपको ऑपरेशन की गई जगह पर दर्द हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आपको इसके लिए कुछ दवाएं दे सकते हैं।
  • डॉक्टर आपको गैस्ट्रोटोमी ट्यूब की मदद से कैसे खाना है आदि के बारे में सिखा देंगे। साथ में डॉक्टर आपको पेट से अतिरिक्त द्रव व हवा कैसे निकालनी है आदि के बारे में भी सिखा देंगे। ऐसा आमतौर पर तब किया जाता है, जब आप डकार या उल्टी नहीं कर पा रहे हों।
  • आपको ट्यूब की मदद से कब और क्या खाना है आदि के लिए न्यूट्रिशनिष्ट डाइट प्लान तैयार करके देंगे।
  • अस्पताल से छुट्टी के समय इंट्रावेनस लाइन को हटा दिया जाता है।
  • आपको सर्जरी के बाद आमतौर पर एक या दो दिनों के लिए ही अस्पताल में रहना पड़ता है।

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सर्जरी के बाद जब आपको अस्पताल में छुट्टी मिल जाती है, तो आपको घर पर निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

घाव की देखभाल

  • सर्जरी के कुछ दिनों बाद तक टांकों या घाव को जितना हो सके पानी से दूर रखें। सर्जरी वाली जगह को हल्के-हल्के दबाव के साथ साफ करें। नहाते समय आप सर्जरी वाली जगह को ध्यानपूर्वक धो सकते हैं, लेकिन इस बारे में भी एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। सर्जरी वाली जगह से थोड़ा बहुत द्रव निकलना आम होता है, उसे आप गीली रुई से पोंछ सकते हैं।

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ट्यूब की देखभाल

  • गैस्ट्रोटोमी ट्यूब अलग-अलग प्रकार की होती हैं, जिनकी देखभाल भी अलग-अलग तरीकों से ही की जाती है। डॉक्टर ट्यूब के प्रकार के अनुसार ही आपको उसकी देखभाल रखने के तरीकों के बारे में बताएंगे।
  • यदि गैस्ट्रोटोमी ट्यूब किसी कारण से अचानक बाहर निकल गई है, तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करें। हो सकता है, डॉक्टर आपको दूसरी ट्यूब दें, जिसे डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार ही बदलना होता है। यह एक इमरजेंसी स्थिति होती है, क्योंकि गैस्ट्रोटोमी का छिद्र तीव्रता से बंद होता है। ऐसे आपको जल्द से जल्द दूसरी गैस्ट्रोटोमी ट्यूब लगा लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति के बारे में डॉक्टर आपको पहले से ही सारी जानकारी दे देते हैं।

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ट्यूब की मदद से दवाएं लेना

  • टेबलेट लेते समय ट्यूब कई बार अवरुद्ध हो सकती है, इसलिए डॉक्टर आपको अधिकतर मामलों में तरल दवाएं ही देते हैं। यदि किसी कारण से टेबलेट ही लेनी जरूरी है, तो डॉक्टर आपको दवा लेने के सही तरीके के बारे में बताते हैं।
  • हालांकि, डॉक्टर आपको हर दवा लेने के बाद फीडिंग डिवाइस को धोने की सलाह देते हैं, ताकि दवाएं आपस में रिएक्ट न कर पाएं और न ही ट्यूब अवरुद्ध हो पाए।

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मौखिक देखभाल

  • रोजाना दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें, चाहे आपने कुछ भी खाया या पीया न हो।
  • मुंह में सूखापन होने पर पानी के स्प्रे से गीला करें
  • जब सर्जरी के घाव ठीक हो जाएंगे, तो डॉक्टर आपको शारीरिक गतिविधि करने का सुझाव दे सकते हैं। हालांकि, डॉक्टर आपको अधिक शारीरिक गतिविधियां न करने की सलाह भी दे सकते हैं।
  • घूमने का प्लान बना रहे हों तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें
  • गैस्ट्रोटोमी के सफलतापूर्वक हो जाने के बाद व्यक्ति की सामान्य शारीरिक गतिविधियों में कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है।

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डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें -

  • सर्जरी वाली जगह से रक्तस्राव होना
  • गैस्ट्रोटोमी ट्यूब की मदद से खाना खाने या दवाएं लेते समय गंभीर दर्द होना
  • उल्टी व दस्त होना
  • मल त्यागने में परेशानी
  • ट्यूब अपनी जगह से निकल जाए

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गैस्ट्रोटोमी से कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें मुख्यत: निम्न को शामिल किया जाता है -

  • ट्यूब के आस-पास की त्वचा में संक्रमण होना
  • सर्जरी के दौरान ही किसी अंदरूनी अंग को नुकसान पहुंचना, जिसे ठीक करने के लिए आमतौर पर दूसरी सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है
  • फीडिंग ट्यूब रुक जाना
  • ट्यूब का अपनी जगह से हिलना
  • ट्यूब के आस-पास से अत्यधिक रक्त आना

कुछ दुर्लभ मामलों में सर्जन गैस्ट्रोटोमी ट्यूब को लगा नहीं पाते हैं, ऐसी स्थिति में कोई अन्य वैकल्पिक सर्जरी करने की सलाह दी जाती है।

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संदर्भ

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  2. Kessel D, Robertson I, eds. Interventional Radiology: A Survival Guide. 4th ed. Philadelphia, PA: Elsevier; 2017:chap 42.
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