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नासिका मार्ग के चारों ओर मौजूद कैविटी की शृंखला को साइनस कहा जाता है. ​साइनस सिस्टम न सिर्फ नाक मार्ग के चारों ओर होता है, बल्कि यह माथे और आंखों के पीछे भी होता है. कई बार साइनस सिस्टम को मोटी परत, पॉलीप्स और संक्रमण जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. इन समस्याओं के कारण सांस लेने में तकलीफ हो जाती है. ऐसे में साइनस से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (एफईएसएस) की तकनीक को अपनाया जाता है. माना जाता है कि इस सर्जरी से साइनस ठीक हो सकता है, लेकिन इससे कुछ जोखिम भी पैदा हो सकते हैं.

आज आप इस लेख में फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. एफईएसएस क्या है और क्यों किया जाता है?
  2. फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी से पहले की तैयारी
  3. फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी कैसे की जाती है?
  4. फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के बाद देखभाल
  5. फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के नुकसान
  6. सारांश
फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के डॉक्टर

फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी एक न्यूनतम इन्वेसिव तकनीक है. इसकी मदद से साइनस वेंटिलेशन और नॉर्मल फंक्शन को रिस्टोर करने में मदद मिलती है. इस सर्जरी को नाक के मार्ग में होने वाली कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. आइए, जानें फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी क्यों की जाती है -

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फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी से पहले कुछ तैयारियां की जाती हैं. इस तैयारी की मदद से सफलतापूर्वक सर्जरी की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है. आइए, विस्तार से जानें फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी से पहले की तैयारी के बारे में -

  • सबसे पहले डॉक्टर मरीज से उसकी मेडिकल हिस्ट्री और उपयोग की जा रहीं दवाइयों के बारे में पूछ सकते हैं.
  • डॉक्टर फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी को करने से पहले एंटीबायोटिक दे सकते हैं.
  • इस सर्जरी के दो से तीन सप्ताह पहले धूम्रपान और शराब का सेवन न करने की भी सलाह दी जाती है.
  • सर्जरी से करीब 8-10 घंटे पहले तक कुछ भी खाने-पीने से मना किया जाता है.
  • सर्जरी से एक घंटे पहले एक विशेष दवाई को स्प्रे की सहायता से नाक में डाला जाता है.

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फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं. जब एनेस्थीसिया अपना सुन्न करने वाला प्रभाव पूरी तरह से मरीज पर दिखा देता है, तब यह प्रक्रिया शुरू की जाती है.

  • फिर एक पतली फाइबर ऑप्टिक ट्यूब और माइक्रो टेलीस्कोप की मदद से समस्या की गंभीरता का पता लगाया जाता है.
  • इसके बाद सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल कर साइनस की सर्जरी करते हैं.
  • इस सर्जरी के बाद नाक मार्ग के अवरोधक टिश्यू और अन्य रुकावटों को दूर करते हैं. इससे सांस लेने की समस्या से राहत मिल सकती है. 
  • इस पूरी प्रक्रिया को करने में लगभग एक घंटा लग सकता है. 
  • इस सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा सुझाए गए देखभाल पर ध्यान देना जरूरी होता है.

फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के बाद भी कुछ देखभाल को ध्यान में रखना जरूरी होता है. इस देखभाल की मदद से सर्जरी के बाद ठीक होने में मदद मिल सकती है. आइए, विस्तार से जानें फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के बाद देखभाल के बारे में -

  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का निर्धारित समय पर उपयोग करें.
  • अधिक गर्म चीजों को नाक के सामने लाने से बचें.
  • नाक को जोर से दबाकर साफ न करें.
  • जोर-जोर से नाक को न मलें और न ही उस जगह किसी तरह की मालिश करें.
  • किसी भी तरह की क्रीम लगाने से बचें. अगर डॉक्टर ने किसी तरह की क्रीम लगाने का सुझाव दिया है, तो सिर्फ उसका ही उपयोग करें.
  • रात में सोते समय नाक वाले भाग पर दबाव न पड़ें, इस बात का ध्यान रखें.

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वैसे तो फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के अधिकतर मामले सफल होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इस सर्जरी से नुकसान हो सकता है. आइए, विस्तार से जानें फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के नुकसान के बारे में -

  • फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी करने वाले ज्यादातर डॉक्टर अनुभवी होते हैं. लेकिन अगर कोई अनुभवहीन डॉक्टर सर्जरी कर रहा है, तो नाक डैमेज हो सकती है.
  • सर्जरी के दौरान नाक को नुकसान पहुंचे, तो सूंघने की क्षमता कम हो सकती है.
  • कई बार सर्जरी करते समय आंखों की बीमारी हो सकती है.

फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी प्रसिद्ध डॉक्टर से करवानी चाहिए. प्रसिद्ध डॉक्टर से सर्जरी करने पर बिना किसी जोखिम के सर्जरी सफल हो सकती है. इससे सांस लेने की समस्या और नाक के संक्रमण से राहत मिल सकती है, लेकिन फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी से कई बारी नाक डैमेज, सूंघने की क्षमता कमजोर होना और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है.

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