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ब्रिस्टो प्रोसीजर एक विशेष सर्जरी प्रोसीजर है, जिसे कंधे की अंदरूनी समस्याओं का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह सर्जरी विशेष रूप से उन लोगों को लिए की जाती है, जो जिन्हें बार-बार कंधे में समस्याएं हो रही हैं और दवाओं से इन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। रिकरंट एंटीरियर शॉल्डर इंस्टाबिलिटी से कंधे को जोड़ पूरी तरह से हिल-ढुल नहीं पाते हैं और साथ ही उसमें दर्दसूजन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

ब्रिस्टो प्रोसीजर के दौरान सर्जन एक विशेष उपकरण की मदद से स्कैप्युला (शॉल्डर ब्लेड) से हड्डी को काटते हैं और स्कैप्युला के आगे (जोड़ के पास) लगा देते हैं। सर्जरी के बाद आपको कई बार फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाना पड़ सकता है, जिनकी मदद से आप सर्जरी वाले कंधे का इस्तेमाल करना सीखेंगे।

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  1. ब्रिस्टो प्रक्रिया क्या है - What is Bristow Procedure in Hindi
  2. ब्रिस्टो प्रक्रिया क्यों की जाती है - Why is Bristow Procedure doe in Hidi
  3. ब्रिस्टो प्रक्रिया से पहले - Before Bristow Procedure in Hindi
  4. ब्रिस्टो प्रक्रिया कैसे की जाती है - During Bristow Procedure in Hindi
  5. ब्रिस्टो प्रक्रिया के बाद - After Bristow Procedure in Hindi
  6. ब्रिस्टो प्रक्रिया की जटिलताएं - Complication of Bristow Procedure in Hindi
ब्रिस्टो प्रक्रिया के डॉक्टर

जिन लोगों को बार-बार कंधें का जोड़ उतर जाने (रिकरंट शॉल्डर डिस्लॉकेशन) की समस्या रहती है, उनके कंधे में फिर से स्थिरता लाने के लिए यह सर्जरी की जाती है।

कंधे आमतौर पर तीन हड्डियों से मिलकर बने होते हैं, जिन्हें क्लेविकल (कॉलरबोन), स्कैप्युला (शॉल्डर ब्लेड) और ह्यूमरस (अप्पर आर्म बोन) के नाम से जाना जाता है। ह्यूमरस हड्डी की सिरे से एक गेंद जैसी आकृति बनी होती है, जो स्कैप्युला हड्डी में पूरी तरह से फिट आती है। ह्यूमरस का सिरे गोल होता है और स्कैप्युला की आकृति खोखली होती है, जिसकी मदद से ही हाथ चारों तरफ घूम पाते हैं।

हालांकि, जैसा कि आपको पता ही है कंधा हमारे शरीर से सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले जोड़ों में से एक है। यही कारण है कि कंधा उतरने या चोट लगने के का खतरा काफी अधिक रहता है, खासतौर पर उन लोगों में जो अधिक खेलकूद में भाग लेते हैं। ऐसी स्थितियों ब्रिस्टो सर्जरी की जाती है, जिसकी मदद से बार-बार कंधा उतरने की स्थिति का इलाज किया जाता है। सर्जरी के दौरान शॉल्डर ब्लेड में से हड्डी के एक छोटे से टुकड़े को निकाल लिया जाता है। इस सर्जरी की खोज 1958 में की गई थी, उसके बाद इसकी प्रोसीजर में अब तक कई बदलाव किए जा चुके हैं।

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जिन लोगों को बार-बार कंधा उतरने की समस्या है और दवाओं या अन्य किसी सर्जरी प्रोसीजर से इसका इलाज नहीं किया जा रहा है, तो उनके लिए यह सर्जरी की जा सकती है। एंटीरियर शॉल्डर इंस्टाबिलिटी से निम्न लक्षण हो सकते हैं -

ऐसा महसूस होना जैसे बांह की हड्डी कंधे के सॉकेट से निकल गई हो, जो आमतौर पर खेल-कूद के दौरान होती है।

ब्रिस्टो प्रोसीजर किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियां हैं, जिनमें ब्रिस्टो सर्जरी नहीं की जाती है -

  • मिर्गी के दौरे पड़ना
  • शरीर के एक हिस्से में लकवा की शिकायत होना या पहले कभी लकवा हुआ होना
  • जनरलाइज्ड लिगामेंट लेक्सिटी (सामान्य से अधिक लचीलापन आ जाना)

ऑपरेशन से कुछ दिन पहले आपको अस्पताल बुलाया जाता है, जिस दौरान आपसे निम्न से संबंधित सवाल पूछे जा सकते हैं -

  • पहले या हाल ही में ली जा रही सभी प्रकार की दवाएं
  • किसी भी प्रकार की बीमारी या एलर्जी
  • पहले कभी एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगवाया हो
  • भविष्य में गर्भधारण से संबंधी योजना

इसके बाद सर्जन आपको कुछ अन्य टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकते हैं, जिनकी मदद से यह निर्धारि किया जात है कि आप ब्रिस्टो प्रोसीजर के लिए पूरी तरह से फिट हैं या नही। इन टेस्टों में निम्न को शामिल किया जा सकता है -

इसके अलावा, सर्जन आपको सर्जरी की तैयारी के लिए निम्नलिखित निर्देश दे सकते हैं -

  • यदि कोई ऐसी दवा ले रहे हैं जो रक्त को पतला करती है तो उसे कुछ समय तक बंद करवा सकते हैं
  • यदि आप शराब या सिगरेट पीते हैं, तो सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक उनका सेवन बंद कर दें।
  • ब्रिस्टो सर्जरी खाली पेट की जाती है, इसलिए सर्जरी से कुछ घंटे पहले तक कुछ भी खाएं-पीएं नहीं।
  • यदि आपको सर्जरी से एक या दो दिन पहले फ्लू के लक्षण होने लगें तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें, ऐसे में डॉक्टर कुछ दिन के लिए सर्जरी टाल सकते हैं
  • सर्जरी वाले दिन अस्पताल जाने से पहले नहां ले और ढीले-ढाले आरामदायक कपड़े पहन लें। यदि आपने कोई आभूषण या गैजेट पहना हुआ है, तो उसे भी घर पर ही उतार दें।
  • अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाएं ताकि सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में आपको मदद मिल सके
  • अंत में आपको एस सहमति पत्र दिया जाता है, जिसपर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले एक बार उसे अच्छे से पढ़ व समझ लेना चाहिए।

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ऑपरेशन के लिए जब आप अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं। इसके बाद आपकी बांह की नस में सुई लगा दी जाती है और उसे इंट्रावेनस लाइन से जोड़ दिया जाता है। इंट्रावेनस की मदद से आपको सर्जरी के दौरान दवाएं व आवश्यक द्रव दिए जाते हैं। आपको एनेस्थसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिसकी मदद से आपको सर्जरी के दौरान दर्द महसूस नहीं होता है। एनेस्थासिया का असर शुरू होने के बाद ब्रिस्टो प्रोसीजर शुरू की जाती है, जो इस प्रकार है -

  • कंधे के जोड़ के ऊपर की त्वचा में चीरा लगाया जाता है, जिसकी मदद से जोड़ तक पहुंचा जाता है।
  • इसके बाद स्कैप्युला के आगे की हड्डी में चीरा लगाकर उसे अलग कर लिया जाता है और फिर स्कैप्युला के आगे लगा दिया जाता है।
  • जब हड्डी सफलतापूर्वक सही जगह पर लग जाती है, तो ऊपरी त्वचा के चीरे को टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है।
  • चीरे के ऊपर पट्टी कर दी जाती है, ताकि लगाए गए टांके हिले नहीं और धूल-मिट्टी के संपर्क में भी न आ पाएं।

ऑपरेशन पूरा होने के बाद जब आपको होश आता है, तो आको मुंह में सूखापन, गले में दर्द और उलझन महसूस हो सकती है। यह सभी एनेस्थीसिया के साइड इफेक्ट्स होते हैं, जो आमतौर पर कुछ घंटों बाद धीरे-धीरे गायब होने लगते हैं। आपको गलपट्टी पहना कर रखी जा सकती है, ताकि ऑपरेशन वाली बांह पर अधिक दबाव न पड़े। आपको लगभग दो से छह हफ्तों तक गलपट्टी पहन कर रखनी पड़ सकती है, जो आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

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ब्रिस्टो सर्जरी के बाद जब आपको घर जाने के लिए छुट्टी मिल जाती है, तो इस दौरान देखभाल करन के लिए सर्जन आपको निम्न सलाह दे सकते हैं -

  • ऑपरेशन वाली बांह को पूरी तरह से आराम दें और जब तक डॉक्टर अनुमति न दें पट्टी न उतारें
  • सोते समय गलपट्टी न उतारें और जिस कंधे की सर्जरी हुई है उससे दूसरे करवट पर सोएं
  • खुद को एक ही करवट पर रखने के लिए दोनो तरफ तकिए लगाएं जा सकते हैं।
  • यदि आपको पीठ के बल सोने की आदत है, तो सर्जरी वाले कंधे की तरफ कोहनी के नीचे तकिया रख लें
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को समय पर लेते रहें और डॉक्टर की अनुमति के बगैर कोई भी बाहर की दवा न लें
  • जब तक डॉक्टर अनुमति न लें नहाना शुरू न करें और स्विमिंग पूल या बाथटब का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लें
  • ऑपरेशन के बाद लगभग छह हफ्तों तक कोई भी भारी वस्तु ऑपरेशन वाली बांह से न उठाएं
  • ड्राइविंग करने या अन्य कोई मशीन ऑपरेट करना शुरू करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लें।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

ब्रिस्टो सर्जरी के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या महसूस होती है, तो डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

  • तेज बुखार होना
  • ऑपरेशन वाली बांह में सूजन होना
  • ऑपरेशन वाली बांह की उंगलिया या अन्य कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाना या हाथ लगाने पर कुछ महसूस न होना
  • सर्जरी वाले हिस्से में फिर से लालिमा, सूजन, रक्तस्राव या अन्य कोई द्रव रिसने जैसी समस्याएं होने लगना

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ब्रिस्टो सर्जरी से निम्न जटिलताएं विकसि होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें निम्न शामिल हैं -

  • सर्जरी वाले हिस्से की नस या रक्त वाहिका में क्षति होना
  • दूसरी जगह पर लगाई गई हड्डी फिर से हट जाना
  • कंधा किसी एक दिशा में बिलकुल न मुड़ पाना
  • नस रुकने के कारण चेहरे का एक तरफ का हिस्सा व पलक लटक जाना

इसके अलावा सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई एनेस्थीसिया के कारण भी कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जिनमें आमतौर पर निम्न को शामिल किया जाता है -

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