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ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन सर्जरी में इंप्‍लांट के जरिए नई ब्रेस्‍ट बनाई जाती है। मरीज के अपने ऊतकों या इंप्‍लांट से नई ब्रेस्‍ट बनाई जाती है। अगर ब्रेस्‍ट कैंसर के इलाज के लिए मैस्‍टेक्‍टोमी सर्जरी के दौरान ब्रेस्‍ट निकलवानी पड़ी थी, तो इस स्थिति में सर्जन ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन की सलाह दे सकते हैं।

मैस्‍टेक्‍टोमी के तुरंत बाद या कुछ महीनों या सालों बाद ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन की जा सकती है। सर्जरी से पहले डॉक्‍टर मैमोग्राम या ब्‍लड टेस्‍ट जैसे कुछ टेस्‍ट करवा सकते हैं।

सर्जरी से एक रात पहले कुछ भी न खाने-पीने की सलाह दी जाती है। जनरल एनेस्‍थीसिया देकर यह सर्जरी की जाती है। पेट, कूल्‍हों, जांघों या बैली जैसे हिस्‍सों से ऊतक या इंप्‍लांट निकाला जाता है। इससे ब्रेस्‍ट को बनाया जाता है।

ऑपरेशन के बाद दर्द निवारक दवा, कब्‍ज को कंट्रोल करना, घाव की देखभाल और जल्‍दी रिकवरी के लिए कुछ कामों से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।

  1. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी क्या है - What is Breast reconstruction in Hindi
  2. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी क्यों की जाती है - Why Breast reconstruction is done in Hindi
  3. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कब नहीं करवानी चाहिए - When Breast reconstruction is not done in Hindi
  4. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी से पहले की तैयारी - Preparations before Breast reconstruction in Hindi
  5. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कैसे की जाती है - How Breast reconstruction is done in Hindi
  6. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के बाद देखभाल - Breast reconstruction after care in Hindi
  7. ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की जटिलताएं - Breast reconstruction Complications in Hindi
ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के डॉक्टर

ब्रेस्‍ट कैंसर के लिए मरीज ने किस तरह की ट्रीटमेंट ली है, इसके आधार पर तय किया जाता है कि कितने समय पर ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन करवाना है। जैसे कि, अगर मैस्‍टेक्‍टोमी के बाद रेडिएशन थेरेपी ली है तो इससे घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और रिकंस्‍ट्रक्‍शन सर्जरी के बाद जटिलताएं बढ़ने का जोखिम रहता है। इन स्थितियों में इस सर्जरी को टाला जा सकता है।

ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन की प्रक्रिया तीन तरह से की जाती है। मरीज की मर्जी से ब्रेस्‍ट की शेप और साइज, स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति, ब्रेस्‍ट कैंसर के लिए ली गई ट्रीटमेंट आदि के आधार पर सर्जन बताते हैं कि आपको किस तरह की सर्जरी करवानी है। इसके प्रकार हैं :

  • इंप्‍लांट : इसमें सिलिकॉन और सिलिकॉन से भरे जेल या स्‍टेराइल सलाइन सॉल्‍यूशन से बने आर्टिफिशियल इंप्‍लांट को लगाया जाता है।
  • टिश्‍यू : इस प्रक्रिया में सर्जन पेट, कूल्‍हों, पीठ या जांघ के अंदरूनी हिस्‍से से ऊतकों (टिश्‍यू) को निकालकर उससे ब्रेस्‍ट बनाते हैं।
  • इंप्‍लांट और टिश्‍यू : इसमें इंप्‍लांट और शरीर के किसी अन्‍य हिस्‍से के ऊतकों से नई ब्रेस्‍ट बनाई जाती है।

पुरुषों में भी ब्रेस्‍ट कैंसर के इलाज के लिए मैस्‍टेक्‍टोमी के बाद यह सर्जरी की जाती है।

मैस्‍टेक्‍टोमी के बाद सर्जन इस सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। निम्‍न चीजों को पूरा करने के लिए सर्जरी चुन सकते हैं :

  • दोनों ब्रेस्‍ट की लुक को संतुलित करने के लिए।
  • सर्जरी के बाद ज्‍यादा आकर्षक और महिला की तरह दिखने के लिए।
  • ब्रेस्‍ट की शेप को हमेशा के लिए नया करने के लिए।

निम्‍न स्थितियों में इस सर्जरी को न करने की सलाह दी जा सकती है :

  • मोटापा
  • भावनात्‍मक रूप से ठीक न होना
  • पहले रेडिएशन थेरेपी ली हो।
  • कोलाजन वस्‍कुलर डिस्‍ऑर्डर (कोलाजन और इसके जोड़ों में सूजन)
  • गंभीर कार्डिएक बीमारी या फेफड़ों की बीमारी
  • 65 साल से अधिक उम्र होना
  • पहले छाती या पेट की सर्जरी होना
  • एडवांस स्‍टेज का ब्रेस्‍ट कैंसर हुआ हो

सर्जरी से पहले आपको निम्‍न तैयारी करनी होगी :

  • डॉक्‍टर शारीरिक जांच करेंगे और निम्‍न टेस्‍ट करवाएंगे :
    • मैमोग्राम
    • ब्‍लड टेस्‍ट
    • ईसीजी
  • कोई जड़ी बूटी, सप्‍लीमेंट, विटामिन, दवा या डॉक्‍टर के पर्चे के बिना मिलने वाली दवाई खा रहे हैं, तो डॉक्‍टर को बताएं। खून पतला करने वाली दवा ले रहे हैं, तो उसे सर्जरी से पहले बंद करने के लिए कहा जा सकता है।
  • सर्जरी से पहले हल्‍का खाना खाएं। इसके बाद कुछ भी खाएं-पिएं नहीं।
  • ऑपरेशन के बाद घर ले जाने के लिए कोई दोस्‍त या रिश्‍तेदार हो।
  • सर्जरी के लिए अनुमति के लिए फॉर्म साइन करवाया जाएगा।

रिकंस्‍ट्रक्‍शन के टाइप के आधार पर इस सर्जरी की प्रक्रिया को चुना जा सकता है।

टिश्‍यू से रिकंस्‍ट्रक्‍शन :

ऊतक के आधार पर इस सर्जरी को निम्‍न तरीके से किया जा सकता है :

  • ट्रांसवर्स रेक्‍टस एब्‍डोमिनिस माइओक्‍यूटेनिअस फ्लैप एंड डीप इंफीरियर एपिगैस्ट्रिक आर्टरी परफोरेटर फ्लैप : इन सर्जरियों में सर्जन पेट के निचले हिस्‍से से ऊतकों को निकालते हैं।
  • लेटिसिमस मसल फ्लैप : इसमें पीठ के ऊपरी हिस्‍से से ऊतकों को निकाला जाता है, खासतौर पर जिस तरफ की ब्रेस्‍ट निकाली गई हो।
  • ग्‍लूटियल फ्लैप : इस सर्जरी में कूल्‍हों से ऊतकों को निकाला जाता है।
  • ट्रांसवर्स अपर ग्रेसिलिस फ्लैप : इसके लिए सर्जन नई ब्रेस्‍ट बनाने के लिए जांघ के ऊतकों को काटते हैं।
  • पुरुषों में ट्रांसवर्स रेक्‍टस एब्‍डोमिनिस, डेल्‍टोपेक्‍टरोल या लेटिसिमस डोरसी मसल्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है।

आमतौर पर स्‍वस्‍थ ऊतकों से ब्रेस्‍ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन का तरीका इस प्रकार है :

  • ऑपरेशन थिएटर में मरीज को एनेस्‍थीसिया देकर बेहोश किया जाएगा।
  • अब जहां से ऊतकों को निकालना है, वहां पर सर्जन कट लगाएंगे।
  • वो स्किन, मांस और फैट को ढीला कर के फिर इस ऊतक से नई ब्रेस्‍ट बना सकते हैं जो कि दूसरी ब्रेस्‍ट के साइज और शेप के हिसाब से होगी।
  • कुछ स्थितियों में मरीज के खुद के ऊतकों के साथ इंप्‍लांट भी लगाया जा सकता है।
  • इसके बाद टांके से कट को बंद कर के पट्टी कर दी जाती है।

इंप्‍लांट से रिकंस्‍ट्रक्‍शन :

यह सर्जरी एक या दो स्‍टेज पर की जा सकती है। एनेस्‍थीसिया देकर यह सर्जरी की जाती है।

प‍हला स्‍टेज

अगर छाती की दीवार के अंदर अब भी स्किन बच गई है तो यह सर्जरी चुनी जा सकती है। इसके दौरान सिलिकॉन से बने इंप्‍लांट को छाती के अंदर की स्किन में लगाकर नई ब्रेस्‍ट को बनाया जाता है।

दूसरा स्‍टेज

अगर छाती की दीवार के आसपास के ऊतक और स्किन फ्लैट और टाइट है तो यह सर्जरी की जाएगी। इसका तरीका है :

  • सर्जन ब्रेस्‍ट की स्किन के अंदर टिश्‍यू एक्‍सपैंडर लगाएंगे।
  • इसके बाद एक्‍सपैंडर के अंदर सलाइन सॉल्‍यूशन डालेंगे।
  • जैसे-जैसे एक्‍सपैंडर का साइज बढ़ेगा, धीरे-धीरे छाती की मांसपेशियां भी फैलेंगी।
  • जब स्किन पर्याप्‍त रूप से चौड़ी हो जाएगी( तअ सर्जन एक परमानेंट इंप्‍लांट लगाएंगे और कट को टांकों से बंद कर देंगे।

इस प्रक्रिया में लगभग दो से छह घंटे लग सकते हैं। अगर मैस्‍टेक्‍टोमी के तुरंत बाद यह सर्जरी हो रही है तो इसमें आठ से दस घंटे लग सकते हैं।

अगर दूसरे ऑपरेशन के तौर पर यह सर्जरी हो रही है तो 12 घंटे लग सकते हैं। मरीज को दो से पांच दिन तक अस्‍पताल में रूकना पड़ सकता है।

ऑपरेशन के बाद सर्जन ऑपरेशन वाली जगह से जमा तरल पदार्थ निकालने के लिए ड्रेनेज ट्यूब लगा सकते हैं।

सर्जरी के बाद कमरे में शिफ्ट कर दिया जाएगा,जहां पर पल्‍स रेट, सांस की गति और ब्‍लड प्रेशर आदि मॉनिटर किया जाएगा। गहरी सांस लेने के लिए स्पिरोमीटर भी दिया जा सकता है। मतली को रोकने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं।

घर पहुंचने के बाद निम्‍न तरीके से देखभाल की जाएगी :

  • दर्द निवारक : सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को कम करने के लिए सर्जन दर्द निवारक दवा दे सकते हैं। दर्द निवारक लेते समय शराब न पिएं और अगले तीन हफ्तों तक भी इससे दूर रहें।
  • घाव की देखभाल :
    • ऑपरेशन वाली जगह को साफ और सूखा रखें।
    • दो से तीन दिनों तक नहाएं नहीं।
    • जब तक ड्रेन और टांके नहीं हट जाते, तब तक स्विमिंग या बाथ टब में बैठने से बचें और नहाएं भी नहीं।
    • पट्टी हटने के बाद ब्रेस्‍ट को सपोर्ट देने के लिए दो से तीन हफ्तों के लिए महिला को मुलायम और वायरलेस ब्रा पहनने के लिए कहा जाएगा।
  • कब्‍ज : सर्जरी के बाद कब्‍ज महसूस हो सकती है। इससे बचने के लिए :
    • खूब पानी पिएं और फाइबर वाली चीजें खाएं।
    • डॉक्‍टर कब्‍ज से बचने के लिए कोई चूर्ण या दवा लिख सकते हैं।
  • काम :
    • टांग में खून के थक्‍के बनने से रोकने और सूजन को कम करने के लिए ऑपरेशन के बाद थोड़ा चलना-फिरना चाहिए।
    • चार हफ्तों तक ज्‍यादा मुश्किल काम न करें।
    • कुछ हफ्तों तक फुटबॉल या बॉक्सिंग आदि न करें।
    • छह से आठ हफ्तों तक भारी चीजें न उठाएं।
    • सर्जरी के बाद चार हफ्तों तक ड्राइविंग न करें।
    • चार हफ्तों तक ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ेगी।

डॉक्‍टर को कब दिखाएं?

निम्‍न लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को बताएं :

इस सर्जरी से कुछ संभावित जोखिम जुड़े हो सकते हैं, जैसे कि :

  • दर्द
  • ब्‍लीडिंग
  • असामान्‍य स्‍कार लगना
  • एनेस्‍थीसिया से एलर्जी
  • साइज या पोजीशन की वजह से ब्रेस्‍ट की बनावट ठीक न लगना
  • नई ब्रेस्‍ट में नसें महसूस न होना
  • इंप्‍लांट लीक, फटना या सख्‍त होना
  • शारीरिक जांच या मैमोग्राम के दौरान इंप्‍लांट की वजह से कैंसर का पता लगाने में दिक्‍कत आ सकती है।
  • रिकवरी के दौरान ब्रेस्‍ट के ऊतकों में खून या फ्लूइड से भरी सिस्‍ट जमना
  • नए ट्रांसफर किए ऊतक का नष्‍ट होना
  • जहां से टिश्‍यू लिए थे, वहां कमजोरी महसूस होना
  • हाथ या कंधे को हिलाने में दर्द होना

फॉलो-अप के लिए डॉक्‍टर के पास कब जाना होगा?

सर्जरी के सात से दस दिन बाद आपको फॉलो-अप के लिए जाना होगा। इस दौरान टांके और ड्रेनेज ट्यूब निकाली जा सकती है।

नोट : ऊपर दी गई संपूर्ण जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह डॉक्‍टरी सलाह का विकल्‍प नहीं है।

Dr. Raajshri Gupta

Dr. Raajshri Gupta

प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन
8 वर्षों का अनुभव

Dr. debraj shome

Dr. debraj shome

प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन
9 वर्षों का अनुभव

Dr. Chandan Sahu

Dr. Chandan Sahu

प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन
10 वर्षों का अनुभव

Dr. Navdeep

Dr. Navdeep

प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन
11 वर्षों का अनुभव

संदर्भ

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