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आर्थ्रोस्कोपी शरीर के जोड़ों संबंधी समस्याओं का पता लगाने व उनका इलाज करने के लिए किया जाने वाला सर्जरी प्रोसीजर है। इस प्रोसीजर में सर्जन एक विशेष उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, जिसके सिरे पर एक छोटा वीडियो कैमरा और लाइट लगी होती है। इस उपकरण को आर्थ्रोस्कोप कहा जाता है, जिसकी मदद से जोड़ों के अंदरूनी हिस्सों को बाहर स्क्रीन पर देखा जाता है। आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी में एक पेन्सिल नुमा उपकरण का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसकी मदद से जोड़ों के प्रभावित हिस्से को निकाल दिया जाता है।

आपको सर्जरी से कुछ घंटे पहले तक खाली पेट रहना पड़ता है और इस प्रोसीजर को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर किया जाता है। सर्जरी के बाद आपको सर्जरी के घाव को साफ व सूखा रखने की सलाह दी जाती है। सर्जरी के बाद आपको ठीक होने में कितना समय लगता है, यह आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के प्रकार पर निर्भर करता है। सर्जरी के कुछ दिन बाद डॉक्टर आपको बुला सकते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सर्जरी से आपको कोई जटिलता तो नहीं हुई है और सर्जरी के बाद आप सामान्य रूप से ठीक हो रहे हैं या नहीं।

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  1. आर्थ्रोस्कोपी क्या है - What is Arthroscopy in Hindi
  2. आर्थ्रोस्कोपी किसलिए की जाती है - Why is Arthroscopy done in Hindi
  3. आर्थ्रोस्कोपी से पहले - Before Arthroscopy in Hindi
  4. आर्थ्रोस्कोपी के दौरान - During Arthroscopy in Hindi
  5. आर्थ्रोस्कोपी के बाद - After Arthroscopy in Hindi
  6. आर्थ्रोस्कोपी की जटिलताएं - Complications of Arthroscopy in Hindi
आर्थ्रोस्कोपी के डॉक्टर

आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी किसे कहते हैं?

आर्थ्रोस्कोपी या आर्थ्रोस्कॉपी एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसकी मदद से शरीर के जोड़ों संबंधी समस्याओं का पता लगाया जाता है और उनका इलाज किया जाता है। आर्थ्रोस्कोपी एक “कीहोल” है, अर्थात इसमें एक छोटा सा ही चीरा लगाया  जाता है। यह सर्जरी आमतौर पर कंधे, कोहनी, कलाई, कूल्हे और घुटने आदि के जोड़ों पर की जाती है।

इस सर्जरी प्रोसीजर में आर्थ्रोस्कोप नामक एक उपकरण का उपयोग किया जाता है। आर्थ्रोस्कोप के सिरे पर वीडियो कैमरा और लाइट लगे होते हैं, जो जोड़ों की अंदरूनी स्थिति को बाहर स्क्रीन पर दिखाते हैं। आर्थ्रोस्कोप के साथ कुछ अन्य उपकरण भी जोड़े जा सकते हैं, जिनकी मदद से जोड़ों के प्रभावित हिस्से को काटकर निकाला या उसकी मरम्मत की जाती है। इस सर्जरी में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी उपकरण बहुत ही छोटे होते हैं, जिन्हें शरीर के अंदर डालने के लिए चीरा भी छोटा ही चाहिए होता है। इस सर्जरी प्रोसीजर में लगाया गया चीरा ओपन सर्जरी की तुलना में काफी छोटा होता है।

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आर्थ्रोस्कोपी क्यों की जाती है?

यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या है और अन्य सभी उपचार काम नहीं कर पा रहे हैं, तो डॉक्टर आपको आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं -

यदि चोट आदि लगने के कारण शरीर के किसी जोड़ में क्षति पहुंची है, तो उसकी जांच करने के लिए भी आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी की जा सकती है।

इसके अलावा निम्न स्थितियों का इलाज करने के लिए आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी की जा सकती है -

  • घुटने, कोहनी, कंधे और टखने की ऊपर मुलायम (सायनोवियम) में सूजन व लालिमा होना
  • जोड़ों में मौजूद मजबूत व लचीले ऊतक (कार्टिलेज) क्षतिग्रस्त होना
  • कंधे को सहारा देने वाले और कंधे की कार्य प्रक्रिया में मदद करने वाले टेंडन और मांसपेशियों के समूह (रोटेटर कफ टेंडन) क्षतिग्रस्त होना
  • कंधे व उसके आसपास मौजूद मांसपेशियों में चोट आदि लगने के कारण कंधे में दर्द रहना (शॉल्डर इम्पिंजमेंट)
  • कार्पल टनल सिंड्रोम
  • जोड़ों में अत्यधिक द्रव जमा हो जाना
  • घुटने की ऊपरी हड्डी (नी कैप) के पीछे कार्टिलेज क्षतिग्रस्त होना
  • कंधे की हड्डी बार-बार अपनी जगह से हिल जाना
  • इंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट क्षतिग्रस्त होना, जिससे घुटने का जोड़ अस्थिर हो जाता है
  • फ्रोजन शोल्डर
  • टेम्पोरोमेंडिब्युलर डिसऑर्डर

आर्थ्रोस्कोपी किसे नहीं करवानी चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या है, तो डॉक्टर आपको आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी न करवाने  की सलाह देते हैं -

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आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से पहले की तैयारियों से संबंधित डॉक्टर आपको कुछ विशेष सुझाव दे सकते हैं, जैसे -

  • डॉक्टर सबसे पहले आपके जोड़ों की करीब से जांच करते हैं और साथ ही साथ आपका अन्य शारीरिक परीक्षण भी करते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं -
  • ऑपरेशन के लिए आपको खाली पेट अस्पताल बुलाया जाता है। इसके लिए आपको सर्जरी वाले दिन से पहली आधी रात के बाद कुछ भी न खाने या पीने की सलाह दी जाती है।
  • यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। डॉक्टर इनमें से कुछ दवाओं को एक निश्चित समय तक बंद करवा सकते हैं, जिनमें आमतौर पर रक्त को पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन और विटामिन ई आदि।
  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो आपको सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद तक इनका सेवन न करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि शराब या सिगरेट पीने से सर्जरी के बाद स्वस्थ होने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। (और पढ़ें - सिगरेट पीना कैसे छोड़ें)
  • यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या या किसी चीज से एलर्जी है, तो इस बारे में डॉक्टर से बता दें।
  • यदि आपका शारीरिक वजन सामान्य से अधिक है, तो डॉक्टर सर्जरी से पहले आपको थोड़ा बहुत वजन कम करने के लिए भी कह सकते हैं।
  • सर्जरी वाले दिन आपको अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी से पहले के कार्यों में आपको मदद मिल सके।

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आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी कैसे की जाती है?

आर्थ्रोस्कोपी को निम्न सर्जिकल प्रोसीजर के अनुसार किया जाता है -

  • जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाता है और टेबल पर लिटा दिया जाता है।
  • आर्थ्रोस्कोपी की सर्जिकल प्रोसीजर थोड़ा अलग हो सकता है, जो निर्भर करता है कि किस हिस्से की सर्जरी करनी है। उदाहरण के रूप में यदि घुटने की आर्थ्रोस्कोपी करनी है, तो आपको पीट के बल लेटने को कहा जाता है और आपको एड़ियों को टेबल के किनारों के पास रखना होता है।
  • इसके बाद यह तय किया जाता है कि आपको कौन सी एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाना है। एनेस्थीसिया आमतौर पर इस पर निर्भर करता है कि शरीर के कौन से हिस्से की सर्जरी करनी है जैसे -
    • जनरल  एनेस्थीसिया -
      इसका इंजेक्शन लगने के बाद आपको गहरी नींद आ जाती है और सर्जरी के दौरान आपको कुछ महसूस नहीं होता है। (और पढ़ें - इंजेक्शन लगाने का तरीका )
    • स्पाइन एनेस्थीसिया -
      इस दवा का इंजेक्शन रीढ़ की हड्डी में लगाया जाता है, जिससे शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से सुन्न पड़ जाता है।
    • लोकल एनेस्थीसिया -
      इसके इंजेक्शन को सिर्फ उसी जगह पर लगाया जाता है, जिसकी सर्जरी की जानी है। इस सर्जरी की मदद से शरीर के उस हिस्से को सुन्न कर दिया जाता है। हालांकि, सर्जरी के दौरान आपको थोड़ी बहुत सनसनी महसूस हो सकती है।
  • जिस हिस्से की सर्जरी करनी है उससे ऊपर की त्वचा को एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन की मदद से साफ कर दिया जाता है।
  • इसके बाद जोड़ के ऊपर एक छोटा सा कट लगाया जाता है, जिसमें से आर्थ्रोस्कोप को डाला जाता है।
  • कई बार जोड़ के हिस्से में एक स्टेराइल सॉल्यूशन को डाल दिया जाता है, ताकि सर्जन जोड़ के अंदरूनी भागों को स्पष्ट रूप से देख सकें।
  • आर्थ्रोस्कोप अंदरूनी तस्वीरों को बाहर स्क्रीन पर भेजते रहते हैं, जिसकी मदद से डॉक्टर अंदरूनी हिस्से की जांच कर पाते हैं।
  • यदि यह सर्जरी किसी जोड़ को ठीक करने के लिए की जानी है, तो फिर कई छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिनमें से अलग-अलग उपकरणों को डाला जाता है। इन उपकरणों की मदद से प्रभावित हिस्से की मरम्मत की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निकाला जाता है।
  • प्रभावित हिस्से की मरम्मत करने के बाद या उन्हें हटाने के बाद तो सर्जन आर्थ्रोस्कोप और अन्य उपकरणों को हटा देते हैं। यदि जोड़ में अतिरिक्त द्रव जमा है, तो उसे भी निकाल दिया जाता है।
  • उपकरणों को निकालने के बाद त्वचा को बंद करके टांके लगा दिए जाते हैं। यदि टांके त्वचा में अवशोषित होने वाले नहीं है, तो दो हफ्तों के बाद आपको टांके निकलवाने के लिए फिर से अस्पताल बुलाया जा सकता है।

आर्थ्रोस्कोपी होने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता है और कुछ मामलों में सर्जरी वाले दिन ही आपको घर के लिए छुट्टी मिल सकती है। हालांकि, कुछ मामलों में यदि आपका स्वास्थ्य स्थिर नहीं है, तो हो सकता है डॉक्टर आपको एक या दो दिन के लिए अस्पताल में भर्ती कर सकते हैं।

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आर्थ्रोस्कोपी के बाद क्या देखभाल की जाती है?

आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के बाद आपको स्वस्थ होने में कितना समय लगता है, यह निर्भर करता है कि आपके किस जोड़ की सर्जरी की गई है। उदाहरण के तौर पर एसीएल सर्जरी के बाद आपको पूरी तरह से स्वस्थ होने में कम से कम छह महीने का समय लगता है।

सर्जरी के बाद जब आप घर आ जाते हैं, तो आपको निम्न देखभाल रखने की आवश्यकता पड़ती है -

  • घाव की देखभाल करना -
    • नहाते या शॉवर लेते समय अपने घाव को किसी प्लास्टिक फिल्म आदि से ढकें। इसके लिए आप प्लास्टिक बैग या पॉलिथीन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
    • यदि पट्टी गीली या ढीली हो जाती है, तो उसे को बदल दें।
    • यदि घाव पर सूजन व लालिमा बढ़ रही है, तो कम से कम बीस मिनट तक बर्फ के टुकड़े को कपड़े से ढककर इसकी सिकाई करें।
       
  • शारीरिक गतिविधियां शुरू करना -
    • जब तक डॉक्टर अनुमति न दें तब तक कोई भी ऐसी गतिविधि न करें, जिसमें अधिक शारीरिक मेहनत लगती हो। आपको कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक किसी भी प्रकार का खेल खेलने से मना किया जा सकता है। हालांकि, सर्जरी के एक हफ्ते बाद आपको थोड़ा बहुत चलने-फिरने की अनुमति दी जा सकती है।
    • जब तक डॉक्टर अनुमति न दें आपको गाड़ी चलाने या किसी अन्य मशीन को ऑपरेट न करने की सलाह दी जाती है।
       
  • व्यायाम करना -
    • आपके शरीर के जिस जोड़ की सर्जरी की गई है उसके अनुसार आपको कुछ विशेष एक्सरसाइज सिखाई जाती हैं। ये एक्सरसाइज आपको सर्जरी वाले जोड़ को जल्दी ठीक होने और वापस सामान्य कार्य प्रक्रिया में आने में मदद करती है। उदाहरण के रूप में यदि आपके घुटने की आर्थ्रोस्कोपी की गई है, तो आपको घुटने मोड़ने, घुटने उठाने और स्टैटिक स्क्वॉड जैसी कुछ एक्सरसाइज बताई जाती हैं, जो आपके घुटने को जल्दी ठीक होने में मदद करती हैं। डॉक्टर इन सभी व्यायामों से संबंधित कुछ विशेष सुझाव देते हैं, जिनमें इन व्यायामों को दिन में कितनी बार और कितने दिन तक करना है आदि के बारे में बताया जाता है।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो आपको डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

  • बुखार व ठंड लगना
  • खांसी
  • सांस फूलना
  • मतली व उल्टी
  • सीने में दर्द
  • दवाएं लेने के बाद भी अत्यधिक दर्द रहना
  • सर्जरी वाले हिस्से पर लालिमा और सूजन बढ़ जाना
  • थकान
  • जोड़ों में दर्द
  • सर्जरी वाले स्थान से बदबूदार द्रव निकलना
  • घुटने की आर्थ्रोस्कोपी होने के बाद पैर का अंगूठा ठंडा व सुन्न पड़ जाना
  • सर्जरी वाले हिस्से पर अधिक रक्तस्राव होना

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आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • जोड़ों में संक्रमण होना जिसे सेप्टिक आर्थराइटिस के नाम से जाना जाता है
  • सर्जरी प्रोसीजर के दौरान नस, ऊतक या रक्त वाहिका क्षतिग्रस्त होना
  • शरीर के किसी हिस्से में रक्त का थक्का बनना
  • एनेस्थीसिया से एलर्जी हो जाना

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संदर्भ

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