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एलोग्राफ्ट एसीएल रिकंस्‍ट्रक्‍शन एक सर्जरी है जो आमतौर पर डोनर (एलोग्राफ्ट) के टिश्‍यू के साथ छिले हुए एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) को रिप्‍लेस करने के लिए की जाती है। एसीएल फाइब्रस ऊतक का टुकड़ा होता है जो घुटने के जोड़ को सपोर्ट करता है। फुटबॉल, बास्‍केटबॉल और स्‍काइंग खेलने वाले खिलाडियों के अक्‍सर लिगामेंट डैमेज हो जाते हैं जिससे घुटने में दर्द और असंतुलन आ जाता है। आप प्रभावित टांग पर कोई वजन नहीं डाल पाते हैं।

एसीएल में टिअर (छिलना) को ठीक करने और घुटने के संतुलन में सुधार लाने के लिए यह सर्जरी की जाती है। सर्जरी के दौरान छिले हुए लिगामेंट की जगह ऑर्गन डोनर से टेंडन लेकर लगाया जाता है। इस सर्जरी में दो से ढाई घंटे का समय लगता है और यह हॉस्‍पीटल में की जाती है।

हालांकि, हर कोई यह सर्जरी नहीं करवा सकता है। अगर आप गतिहीन जीवनशैली जीते हैं या फिजियोथेरेपी के बाद आपके घुटने में हल्‍की-सी अस्थिरता के साथ भी जी पा रहे हैं, तो आपको इस सर्जरी को करवाने की जरूरत नहीं है।

  1. एलोग्राफ्ट एसीएल रिकंस्‍ट्रक्‍शन क्‍या है - Allograft ACL reconstruction Kya hai
  2. एलोग्राफ्ट एसीएल रिकंस्‍ट्रक्‍शन की सलाह क्‍यों दी जाती है - Allograft ACL reconstruction kab karvayi jati hai
  3. एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन कौन करवा सकता है और कौन नहीं - Allograft ACL reconstruction kise karvani chahiye
  4. एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन से पहले की तैयारी - Allograft ACL reconstruction ke liye kaise taiyar kiya jata hai
  5. एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन सर्जरी कैसे की जाती है - Allograft ACL reconstruction kaise ki jati hai
  6. एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन के बाद देखभाल कैसे करें - Allograft ACL reconstruction ke baad care karne ka tarika
  7. एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन से जुड़ी जटिलताएं - Allograft ACL reconstruction se judi mushkile
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यह एक ऐसी सर्जरी है जिसमें छिले हुए एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट को ठीक करने के लिए उसकी जगह एलोग्राफ्ट की मदद ली जाती है।

फेमुर (जांघ की हड्डी), टिबिया (शिन बोन) और नी कैप (पैटेला), वो हड्डियां हैं जो घुटने के जोड़ को जोड़ती हैं। इस जोड़ को चार लिगामेंटों से सपोर्ट मिलता है जिसमें एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट, पोस्‍टीरियर क्रूस‍िएट लिगामेंट, लेटरल कोलेटरल लिगामेंट और मीडिएल कोलेटरल लिगामेंट शामिल है। लिगामेंट लचीला संयोजी ऊतक होता है जो जोड़ों को सपोर्ट और काम करने में मदद करता है।

पैटेला यानि घुटने की कैप के पीछे बीच में एसीएल होता है। यह टिबिया को आगे मूव करने में मदद करता है और इसकी रोटेशन यानि घुमाव को कंट्रोल करता है। एसीएल शिन बोन को आगे थाई बोन की ओर मूव करने नहीं देता और घुटने को संतुलन देता है। घुटने के अचानक मुड़ने पर लिगामेंट छिल सकता है जिससे घुटने में दर्द हो जाता है। यह समस्‍या आमतौर पर फुटबॉल, बास्‍केटबॉल खेलने वाले खिलाडियों में देखी जाती है।

जब उपचार के अन्‍य विकल्‍प विफल हो जाते हैं, तो टिअर को ठीक करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इस सर्जरी में डोनर (एलोग्राफ्ट)  के हेल्‍दी टेंडन को छिले हुए लिगामेंट की जगह लगाया जाता है।

निम्‍न टेंडनों में एलोग्राफ्ट की जरूरत पड़ सकती है :

  • अकिलिस टेंडन
  • हैमस्ट्रिंग टेंडन
  • पैटेलर टेंडन
  • क्‍वाड्रिसेप्‍स टेंडन

निम्‍न स्थितियों में यह सर्जरी करवाने की सलाह दी जा सकती है :

  • रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम पूरा होने के बाद घुटने में संतुलन न आना
  • ऐसा काम करना जिसमें घुटने की स्थिरता और मजबूती की जरूरत हो
  • एसीएल डैमेज की वजह से जिंदगी प्रभावित हो रही हो

निम्‍न स्थितियों में आप यह सर्जरी करवा सकते हैं :

  • 40 साल से अधिक उम्र होना
  • घुटने के एक लिगामेंट से ज्‍यादा का डैमेज होना
  • आपकी निजी इच्‍छा पर

टॉर्न एसीएल के लक्षण हैं :

  • आपको घुटने में स्थि‍रता महसूस न हो
  • घुटने का इस्‍तेमाल करते समय, उसका आगे भागने जैसा महसूस होना
  • लिगामेंट के रप्‍चर होने या अपनी जगह से हटने पर चटकने की आवाज आना
  • सूजन और दर्द
  • चोट वाले घुटने से टांग का वजन न उठा पाना
  • घुटने में हड्डियों का एक-दूसरे से रगड़ महसूस होना

निम्‍न स्थितियों में यह सर्जरी नहीं की जा सकती है :

  • हल्‍का-सा टिअर हुआ हो जो आराम करने पर ठीक हो सकता हो।
  • अगर आप घुटने और मांसपेशियों को मजबूती देने वाले रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के लिए जा सकते हैं और आप घटने में मामूली अस्थिरता के साथ ठीक हैं।
  • गतिहीन जीवनशैली जी रहे हैं।
  • यदि आप अपनी जीवनशैली में बदलाव करने के लिए ऐसी गतिविधियों को शामिल करना चुनते हैं जिनमें घुटने की स्थिरता की आवश्यकता नहीं होती है जैसे कि स्विमिंग या साइक्‍लिंग।
  • कोई मेडिकल प्रॉब्‍लम जिससे सर्जरी के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।

सर्जरी से पहले निम्‍न तैयारी की जाती है :

  • सर्जन कुछ सवाल पूछेंगे :
    • मेडिकल हिस्‍ट्री
    • कौन-सी दवाएं ले रहे हैं
    • दिन में एक से ज्‍यादा गिलास ड्रिंक पीते हैं
    • प्रेगनेंट हैं या नहीं
       
  • शारीरिक जांच की जाएगी और आपको निम्‍न टेस्‍ट करवाने की जरूरत पड़ सकती है :
  • सर्जरी से पहले एस्प्रिन, नैप्रोक्‍सेन और आइबूप्रोफेन जैसी कुछ दवाएं लेने के लिए मना किया जा सकता है।
  • रोज सिगरेट पीते हैं, तो बंद करना हो सकता है।
  • सर्जरी से 6 से 12 घंटे पहले खाली पेट रहने की जरूरत हो सकती है।
  • प्रक्रिया के लिए अपनी रजामंदी देने के लिए एक फॉर्म साइन करना होता है।
  • सर्जरी के बाद घर ले जाने के लिए दोस्‍त या परिवार का सदस्‍य हो।

अस्‍पताल पहुंचने के बाद पहले हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाती है। इसके बाद बांह में आईवी ड्रिप लगाई जाती है जिससे सर्जरी के दौरान जरूरी फ्लूइड्स और दवाएं दी जाती हैं।

इसके बाद ऑपरेशन टेबल पर लिटाया जाता है। सर्जरी के लिए जनरल या किसी एक हिस्‍से में एनेस्‍थीसिया दिया जाता है।

प्रक्रिया के दौरान शरीर के महत्‍वूपर्ण कार्यों पर नजर रखी जाती है। आथ्रोस्‍कोपिक या ओपन सर्जरी की जा सकती है।

आथ्रोस्‍कोपिक प्रक्रिया नीचे बताए गए तरीके से की जाती है :

  • सर्जन ऑपरेशन वाले हिस्‍से को एंटीसेप्टिक सॉल्‍यूशन से साफ किया जाता है और घुटने पर एक या तीन छोटे कट लगाए जाते हैं।
  • इसमें से एक कट में घुटने के अंदर सलाईन सॉल्‍यूशन डाला जाएगा जिससे जोड़ फूल जाए। अगर खून निकलता है तो उसे धोया जाता है।
  • घुटने के अंदर आथ्रोस्‍कोप डाला जाएगा और घुटने के अंदर के हिस्‍सों को स्‍क्रीन पर देखा जाता है और देख जाता है कि चोट लगने से कितना डैमेज हुआ है।
  • अन्‍य कटों से सर्जन अन्‍य उपकरण डालेंगे और जांघ और शिन बोन पर छोटे छेद बनाएंगें।
  • इन छेदों से सर्जन एलोग्राफ्ट को सुरक्षित कर देंगे। इस ग्राफ्ट को फिक्‍स करने के लिए स्‍टैपल या स्‍क्रू का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।
  • अब सर्जन स्‍टैपल या टांकों से कट को बंद कर देंगे और फिर पट्टी कर देंगे।
  • ओपन सर्जरी इसी तरह होती है लेकिन इसमें घुटने पर एक ही बड़ा कट लगाया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में दो से ढाई घंटे लगते हैं। सर्जरी पूरी होने के बाद मरीज को रिकवरी रूम में भेजा जाता है। जब मरीज को ठीक महसूस होता है, तब उसे ब्रेस और बैसाखी के साथ अस्‍पताल से छुट्टी मिल जाएगी।

सर्जरी के बाद घर जाने के बाद, नीचे बताए गए तरीके से देखभाल करनी होती है :

  • डॉक्‍टर के बताए अनुसार दर्द की दवा लेनी होगी।
  • कुछ दिनों के लिए घुटने में सूजन रहेगी। आप दिन में कई बार बर्फ की सिकाई कर के सूजन को कम कर सकते हैं।
  • घुटने पर वजन नहीं डालना होगा, इसलिए चलते समय बैसाखी की मदद लेनी होगी।
  • 48 घंटे के बाद पट्टी हटाई जाएगी और इसकी जगह बैंडेड लगाई जा सकती है। हालांकि, आपको इसे रोज बदलना होगा और सर्जरी वाली जगह पर कोई लोशन या ऑइंटमेंट न लगाएं।
  • सर्जरी के बाद पांच दिनों तक न नहाने की सलाह दी जा सकती है। घाव पर प्‍लास्टिक रैप लगाकर रखें और जब तक टांके नहीं हटते, तब तक इस हिस्‍से को गीला न होने दें।
  • 6 हफ्तों तक घुटने में ब्रेस लगाने की जरूरत होगी।
  • पहले एक या दो हफ्ते देर तक खड़े होने से बचें ताकि दर्द और सूजन कम हो। दो हफ्तों के लिए डॉक्‍टर हल्‍की एक्‍सरसाइज करने की सलाह देंगे जो आप घर पर भी कर सकते हैं। सर्जरी के 15 से 20 दिन बाद आप पहले की तरह नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं।
  •  14 दिनों के बाद फिजियोथेरेपी लेने की जरूरत होगी। यह 6 महीने तक लेनी होगी और आप हफ्ते में एक या दो बार कर सकते हैं। चार महीने के बाद आप दौड़ पाएंगे।
  • सर्जरी के दो से तीन हफ्ते बाद आप काम पर लौट सकते हैं लेकिन सर्जन की सलाह पर लेग ब्रेस पहनें।
  • चूंकि, आप नारकोटिक दर्द की दवा रहे हैं इसलिए डॉक्‍टर से पूछने के बाद ही ड्राइविंग करना शुरू करें।

एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन घुटने की नॉर्मल मूवमेंट और स्थिरता को वापिस लाने में मदद करती है। घुटने में अस्थिरता दूर होने के कारण आर्थराइटिस को टाला जा सकता है। इस प्रक्रिया से अकड़कन और दर्द भी कम हो जाता है।

डॉक्‍टर को कब दिखाएं?

निम्‍न लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं :

  • बुखार
  • अगर घाव खुल गया है
  • टांके वाली जगह पर लालिमा या डिस्‍चार्ज हो रहा है
  • घुटने में दर्द बढ़ गया है
  • घुटने में सुन्‍नता, झनझनाहट या काम न कर पाने की दिक्‍कत हो रही है
  • मतली
  • पिंडली में सूजन और दर्द

इस सर्जरी से निम्‍न जोखिम हो सकते हैं :

  • इंफेक्‍शन
  • घुटना टेकने और कोई काम करने पर घुटने में दर्द होना
  • ग्राफ्ट फेलियर या रप्‍चर
  • घुटने के आसपास के ऊतक को नुकसान पहुंचना
  • दूसरी टांग के मुकाबले प्रभावित टांग को कम हिला पाना
  • टांग में खून के थक्‍के जमना
  • स्‍कार टिश्‍यू बनना
  • एनेस्‍थीसिया की वजह से जोखिम होना

एलोग्राफ्ट रिकंस्‍ट्रक्‍शन के बाद फॉलो-अप के लिए कब जाएं

सर्जरी के बाद सात से चौदह दिनों के अंदर आपको पहले फॉलो-अप के लिए जाना होगा। इस दौरान डॉक्‍टर घाव देखेंगे और टांके खोलेंगे। इसके 6 हफ्ते बाद दूसरा फॉलो-अप होगा।

नोट : ऊपर दी गई संपूर्ण जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह डॉक्‍टरी सलाह का विकल्‍प नहीं है।

संदर्भ

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