मेंजे कुत्तों में होने वाला एक चर्म रोग है, जो कि परजीवियों के कारण होता है। इस बीमारी में खुजली की समस्या इतनी ज्यादा होती है कि बार-बार खुजली करने से शरीर में फर नाममात्र के बचते हैं। सिर्फ कुत्तों में ही यह बीमारी नहीं पाई जाती है, बल्कि कई बार कुछ स्तनधारी और यहां तक कि इंसान भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। फिलहाल, परजीवियों से होने वाले इस संक्रमण का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

  1. मेंजे के प्रकार - Mange ke prakar
  2. मेंजे के लक्षण - Mange ke lakshan
  3. मेंजे के कारण - Mange ke karan
  4. मेंजे की रोकथाम - Mange ki roktham
  5. मेंजे का परीक्षण - Mange ka parikshan
  6. मेंजे का उपचार - Mange ka upchar

मेंजे मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं - सरकोप्टिक मेंजे, डेमोडेक्टिक मेंजे और चिलेटिएलोसिस (वॉकिंग डैंड्रफ)।

  • सरकोप्टिक मेंजे -
    इसे कैनाइन स्केबीज के रूप में भी जाना जाता है। यह सरकोप्ट्स स्केबी नामक आठ-पैर वाले कीट (माइट) के कारण होता है। यह काफी संक्रामक होते हैं। यह एक कुत्ते से दूसरे में या फिर किसी इंसान में भी फैल सकते हैं। कुत्ते की त्वचा पर इस माइट की प्रजाति की मादा अपने अंडे देती है, जिनमें से लगभग तीन सप्ताह बाद नए माइट बाहर आते हैं।
     
  • डेमोडेक्टिक मेंजे -
    यह माइट एक सिगार की तरह दिखता है, जिसे डेमोडेक्स भी कहा जाता है। अगर ये माइट कुत्ते पर दिखाई दें, तो इन्हें डेमोडेक्स केनिस और किसी बिल्ली पर दिखाई दें, तो इसे डेमोडेक्टिक कैटी कहा जाता है। ये माइट हमेशा कुत्ते की त्वचा पर पाए जाते हैं व आमतौर पर कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाते। पिल्लों को ये अक्सर उनकी मां से मिलते हैं। ये माइट कुत्ते के बालों में तब तक बिना नुकसान पहुंचाए रहते हैं, जब तक इनकी संख्या बढ़ नहीं जाती है।

    यदि कुत्ते की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो उनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है। हालांकि, यह संक्रमण आमतौर पर दो साल से कम उम्र के ऐसे पिल्लों में होता है, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। बड़े कुत्तों में डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, कैंसर या उम्र से संबंधित बदलावों के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है।
     
  • चिलेटिएलोसिस मेंजे -
    यह त्वचा संबंधी एक दुर्लभ समस्या है, जो कुत्तों, बिल्लियों और खरगोशों में मेंजे के गंभीर लक्षण दिखा सकती है। यह कुत्तों में चेयलेटीएला यासगुरी माइट, बिल्लियों में चिलेटिएला ब्लेकी और खरगोशों में चिलेटिएला पैरासाइटोवोरैक्स के कारण होता है। माइट की यह प्रजाति त्वचा के अंदर फैलकर उस हिस्से को प्रभावित करती है। इसे "वॉकिंग डैंड्रफ" मेंजे के रूप में भी जाना जाता है। इसमें कुत्ते की त्वचा डैंड्रफ की तरह पीली व परतदार दिखती है।
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किसी प्रभावित जानवर के संपर्क में आने के बाद इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर 10 दिनों से आठ सप्ताह तक दिखाई दे सकते हैं।

सरकोप्टिक मेंजे के शुरुआती लक्षण कान, छाती, कोहनी, गले और पेट पर देखे जा सकते हैं। यदि इनका इलाज समय पर नहीं किया तो यह पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। सरकोप्टिक मेंजे के सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं -

  • लगातार खुजली होना
  • चकत्ते व लालिमा
  • बालों का झड़ना
  • त्वचा के ऊपर पीली पपड़ी
  • त्वचा का मोटा होना

डेमोडेक्टिक मेंजे के लक्षण स्थानीयकृत और सामान्यीकृत हो सकते हैं :

  • स्थानीयकृत -
    छोटे-छोटे हिस्सों में बालों का झड़ना, लालिमा और पपड़ीदार त्वचा।
     
  • सामान्यीकृत -
    इसमें कुत्ते के पूरे शरीर में लालिमा, पपड़ी, सूजन और त्वचा की परत मोटी होना शामिल है। इस स्थिति में कुत्ते के पूरे शरीर से बाल झड़ जाते हैं।

चिलेटिएलोसिस के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं :

  • कुत्ते की पीठ पर परतदार डैंड्रफ और पपड़ीदार त्वचा
  • खुजली

सरकोप्टस स्केबी नामक माइट आपके पालतू जानवरों की त्वचा पर न सिर्फ फैल सकता है, बल्कि अंडे देने के लिए त्वचा के अंदर भी जा सकता है। जबकि डेमोडेक्स कैनिस और डेमोडेक्स कैटी मुख्य रूप से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण असाधारण रूप से बढ़ने लगते हैं।

चूंकि मेंजे तेजी से फैलने वाली समस्या है ऐसे में केनेल (कुत्ते का निवास स्थान), पशुओं का निवास स्थान और पशु चिकित्सा वाले क्लीनिकों में इस संक्रमण के फैलने की आशंका अधिक रहती है।

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दुर्भाग्य से, अभी तक इस बीमारी को पूरी तरह से रोकने का कोई संभव तरीका नहीं मिल पाया है। चूंकि, प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से ये माइट तेजी से पनपते हैं। इसलिए मालिकों को अपने पालतू जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर फोकस करना चाहिए। ऐसा करने से काफी हद तक इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है। कुत्तों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में निम्न चीजें मदद कर सकती हैं - 

  • संतुलित आहार
  • शारीरिक गतिविधि 
  • नीम की छाल से बना पाउडर 
  • इसके अलावा पशु चिकित्सक के पास नियमित जांच कराने से भी इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

मेंजे एक भयानक दर्दनाक स्थिति है, लेकिन गंभीर मामलों में भी इस बीमारी की रोकथाम और इलाज किया जा सकता है।

इस रोग की जांच माइक्रोस्कोप मशीन से की जाती है। निदान के लिए पशुचिकित्सक प्रभावित कुत्ते के शरीर पर एक या एक से अधिक हिस्सों से त्वचा का नमूना ले सकते हैं और फिर माइक्रोस्कोप के जरिए त्वचा के अंदर माइट या उनके अंडों की उपस्थिति के बारे में पता कर सकते हैं। हालांकि, कभी-कभी त्वचा के नमूनों में से माइट की उपस्थिति के बारे में पता नहीं चलता है, लेकिन लक्षणों से पता चलता है कि पालतू जानवर मेंजे की समस्या से ग्रस्त है।

ऐसे में यदि आप अपने कुत्ते को बार-बार खुजली करते हुए देखते हैं या उसके शरीर से असामान्य तरीके से बाल झड़ रहे हैं, तो पशु चिकत्सक के पास चेकअप के लिए जरूर जाएं।

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मेंजे का निदान हो जाने के बाद पशु चिकित्सक आपको उपचार के बारे में बता सकते हैं, ताकि संक्रमण को जल्द नियंत्रित किया जा सके। पूरी तरह से माइट को खत्म होने में चार से आठ सप्ताह का समय लग सकता है। फिलहाल इस बीमारी के उपचार में शामिल हैं -

  • ज्यादातर घुनों को हटाने के लिए सबसे पहले लंबे बालों को काटना
  • कई हफ्तों तक त्वचा पर सेलामेक्टिन और इमिडाक्लोप्रिड-मोक्सीडैक्टिन जैसी दवाओं का प्रयोग करना
  • पशु चिकित्सक आपको मेडिकेटिड शैंपू इस्तेमाल करने की सलाह भी दे सकते हैं। इससे आपके पालतू जानवरों की न सिर्फ त्वचा ठीक हो सकती है, बल्कि त्वचा वापस से सौम्य या नरम हो सकती है। इन मेडिकेटिड शैंपू का इस्तेमाल आमतौर पर सप्ताह में एक बार करने के सलाह दी जाती है।
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