साइटिका एक सामान्य स्थिति है. इसके चलते पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और पैरों में दर्द, झुनझुनी व सुन्नपन का अहसास होता है. यह स्थिति तब होती है जब पीठ के निचले हिस्से से पैरों तक जाने वाले साइटिका नर्व पर दबाव पड़ता है या उसमें जलन महसूस होती है. साइटिका से पीड़ित बहुत से लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि यह समस्या कितने समय तक रहेगी और किन कारणो से यह समस्या लंबे समय तक रहती है.

आज इस लेख में हम इन सवालों का पता लगाने का प्रयास करेंगे -

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  1. साइटिका की समस्या कब तक रहती है?
  2. साइटिका को प्रभावित करने वाले कारक
  3. साइटिका के दर्द का इलाज
  4. सारांश
साइटिका कितने दिन तक रहता है? के डॉक्टर

साइटिका का दर्द कितने दिन तक रहेगा, यह हर व्यक्ति की अवस्था पर निर्भर करता है. कुछ लोग हल्के लक्षण महसूस करते हैं, जो कुछ दिन या हफ्तों तक रहते हैं. वहीं, कुछ लोगों को गंभीर लक्षण महसूस होते हैं, जो महीनों या वर्षों तक रह सकते हैं. असल में साइटिका दो तरह का होता है - एक्यूट और क्रोनिक. एक्यूट साइटिका का दर्द 1 से 2 हफ्ते तक रह सकता है. साथ ही कुछ हफ्तों के बाद दर्द तो कम हो जाता है, लेकिन कुछ समय तक सुन्नपन जरूर रहता है.

वहीं, जब एक्यूट साइटिका क्रोनिक रूप ले लेता है, तो इस स्थिति में दर्द लंबे समय तक रह सकता है. क्रोनिक साइटिका जीवन भर भी रह सकता है.

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साइटिका की समस्या कब तक रहेगी, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है -

दबाव या जलन की गंभीरता

साइटिका नर्व पर पड़ने वाला दबाव या उसमें होने वाली जलन की गंभीरता पर निर्भर करता है कि साइटिका के लक्षण कब तक रहेंगे. हल्का दबाव या जलन जल्दी ठीक हो सकती है, जबकि इनके गंभीर रूप लेने पर यह समस्या लंबे अधिक तक रह सकती है.

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आयु

बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में पानी की मात्रा कम होने लगती और लचीलापन भी कम होता जाता है. इसलिए, बुजुर्गों को युवाओं की तुलना में लंबे समय तक साइटिका की समस्या रह सकती है.

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शारीरिक गतिविधि

फिजिकली एक्टिव रहने से साइटिका के लक्षणों और इसकी अवधि को कम करने में मदद मिल सकती है. इसके विपरीत, शारीरिक रूप से एक्टिव न रहने से या ऐसी पोजिशन में रहना, जिससे पीठ के निचले हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ता है, इससे साइटिका की समस्या लंबे समय तक रह सकती है.

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अंडरलाइन कारण

कुछ अंडरलाइन कारण भी साइटिका की अवधि को प्रभावित कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, हर्नियेटेड डिस्क के कारण होने वाली साइटिका की समस्या के मुकाबले मांसपेशियों में खिंचाव या मोच के कारण होने वाले साइटिका की समस्या को ठीक होने में कम समय लगता है.

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संपूर्ण स्वास्थ्य

संपूर्ण स्वास्थ्य साइटिका की अवधि को प्रभावित कर सकता है. जो लोग आमतौर पर स्वस्थ रहते हैं, अगर उन्हें साइटिका हो, तो वो जल्दी ठीक हो सकते हैं.

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साइटिका के लिए नॉन सर्जिकल या सर्जिकल का चुनाव किया जाता है -

नॉन सर्जिकल इलाज

ज्यादातर मामलों में सबसे पहले नॉन सर्जिकल इलाज का इस्तेमाल किया जाता है -

  • दर्द निवारक - ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक जैसे एसिटामिनोफेन या नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) साइटिका से जुड़े दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है.
  • फिजिकल थेरेपी - इसके जरिए रीढ़ की हड्डी में मौजूद मांसपेशियों को मजबूत करने पर काम किया जाता है.
  • हीट एंड कोल्ड थेरेपी - प्रभावित क्षेत्र पर हीट या कोल्ड थेरेपी देने से दर्द व सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है.
  • एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन - सीधे प्रभावित क्षेत्र में कॉर्टिकोस्टेरॉइड के इंजेक्शन सूजन को कम करने और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं.

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सर्जिकल इलाज

जब नॉन सर्जिकल इलाज के जरिए साइटिका की समस्या ठीक नहीं होती है, तो सर्जिकल प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है -

  • डिस्केक्टॉमी - इसमें हर्नियेटेड डिस्क के उस हिस्से को हटाया जाता है, जिससे साइटिक नर्व पर दबाव पड़ता है.
  • लैमिनेक्टॉमी - इसमें साइटिका नर्व पर दबाव कम करने के लिए वर्टब्रल यानी कशेरुकी हड्डी के एक हिस्से को निकाला जाता है.
  • माइक्रोडिसेक्टोमी - यह डिस्केक्टॉमी का छोटा इनवेसिव वर्जन है, जिसमें हर्नियेटेड डिस्क को हटाने के लिए छोटे चीरे और एक माइक्रोस्कोप का उपयोग किया जाता है.

यह ध्यान रखना जरूरी है कि साइटिका के इलाज के लिए हमेशा सर्जरी नहीं की जाती है. जब नॉन-सर्जिकल इलाज से कोई असर नहीं होता है, तभी सर्जरी के विकल्प को चुना जाता है.

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कुछ लोगों के लिए साइटिका दर्दनाक स्थिति साबित हो सकती है, लेकिन सही इलाज मिलने से अधिकांश लोग कुछ हफ्तों में ही पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं. साइटिका की अवधि को प्रभावित करने वाले कारकों में आयु व शारीरिक गतिविधि आदि शामिल हैं. वहीं, इलाज के तौर पर सबसे पहले नॉन-सर्जिकल विकल्प को चुना जाता है. इससे सुधार न होने पर ही सर्जरी की जाती है. इसलिए, अगर कोई साइटिका की समस्या से परेशान है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए और एक्सरसाइज व योग भी करना चाहिए.

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