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पूरे दिन पानी पीने के बावजूद व्यक्ति को ज्यादा प्यास लगती है, तो यह डायबिटीज थर्स्ट का लक्षण हो सकता है. डायबिटीज थर्स्ट डायबिटीज के अन्य लक्षणों के साथ उत्पन्न होता है, जिसके लक्षण में बार-बार पेशाब आना और मुंह सूखना शामिल है. इसका कारण खून में अधिक मात्रा में ग्लूकोज का होना है. इसके इलाज के तौर पर इंसुलिन थेरेपी व डॉक्टर द्वारा बताई दवाइयों का सेवन और लाइफस्टाइल में बदलाव शामिल है.

यहां दिए ब्लू लिंक पर क्लिक करके आप डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज विस्तार से जान सकते हैं.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि डायबिटीज थर्स्ट क्या है. साथ ही डायबिटीज थर्स्ट के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में भी जानेंगे -

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  1. डायबिटीज थर्स्ट क्या है?
  2. डायबिटीज थर्स्ट के लक्षण
  3. डायबिटीज थर्स्ट के कारण
  4. डायबिटीज थर्स्ट का इलाज
  5. सारांश
डायबिटीज थर्स्ट के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

अधिक प्यास लगने को मेडिकल भाषा में पॉलीडिप्सिया (Polydipsia) कहा जाता है और इसे डायबिटीज का मुख्य लक्षण माना जा सकता है. जब व्यक्ति को बार-बार पानी पीने के बावजूद प्यास लगती रहे, साथ ही मुंह और गला सूखा हुआ महसूस हो, तो इसका मतलब डायबिटीज थर्स्ट हो सकता है.

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डायबिटीज थर्स्ट अपने आप में एक लक्षण है, जो यह इशारा करता है कि यह स्थिति डायबिटीज की है और व्यक्ति के शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ गई है. डायबिटीज थर्स्ट के निम्न लक्षण हो सकते हैं - 

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अधिक प्यास लगना डायबिटीज का मुख्य और पहला लक्षण है. इसके पीछे का कारण खून में बहुत ज्यादा ग्लूकोज का हो जाना है. डायबिटीज होने पर शरीर सही तरीके से भोजन का इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इसकी वजह से खून में ग्लूकोज जमा होने लगता है. हाई ब्लड शुगर स्तर किडनी को फोर्स करता है, ताकि वह अतिरिक्त ग्लूकोज को शरीर से बाहर निकाल सके. 

शरीर से अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए किडनी ज्यादा पेशाब को शरीर से बाहर निकालता है. इस तरह से शरीर ज्यादा पानी का इस्तेमाल करता है. यहां तक कि टिश्यू से भी पानी को खींच लिया जाता है, ताकि अतिरिक्त ग्लूकोज से निजात पाया जा सके. जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो व्यक्ति को प्यास महसूस होती है. 

ब्रेन शरीर के हाइड्रेशन के लिए ज्यादा पानी पीने की ओर इशारा करता है और इसकी वजह से पेशाब भी ज्यादा आता है. यदि शरीर में ब्लड शुगर स्तर असंतुलित रह गया, तो पेशाब और प्यास का यह चक्र चलता रह जाएगा.    

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डायबिटीज थर्स्ट के इलाज के रूप में डायबिटीज को मैनेज करने पर बल दिया जाता है. इस प्रक्रिया में ब्लड शुगर लेवल को कम किया जाता है. ब्लड शुगर के नियंत्रित होते ही डायबिटीज थर्स्ट भी अपने आप कम हो जाता है. डायबिटीज थर्स्ट के इलाज के रूप में टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज का ही इलाज किया जाता है. आइए विस्तार से डायबिटीज थर्स्ट के इलाज के बारे में जानते हैं -

इंसुलिन थेरेपी

इंसुलिन थेरेपी के तहत इंजेक्शन, इंसुलिन पम्प, इंसुलिन पेन या इंहेलर के जरिए डायबिटीज को मैनेज किया जाता है. टाइप 1 डायबिटीज के लिए तो इंसुलिन थेरेपी सही है, लेकिन टाइप 2 डायबिटीज में सबको इंसुलिन की जरूरत नहीं भी पड़ सकती है.

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दवाइयों का सेवन

टाइप 1 डायबिटीज वालों को ब्लड प्रेशर दवाइयां और कोलेस्ट्रॉल दवाइयों के साथ इंसुलिन की भी सलाह दी जाती है. यदि लाइफस्टाइल बदलाव से टाइप 2 डायबिटीज नियंत्रित नहीं होता है, तो दवाइयां दी जाती हैं.

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लाइफस्टाइल बदलाव

नियमित एक्सरसाइज, डायबिटीज फ्रेंडली डाइट और स्ट्रेस मैनेजमेंट टाइप 1 और टाइप 2 दोनों तरह की डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है.

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डायबिटीज थर्स्ट डायबिटीज का पहला और मुख्य लक्षण है, जिसमें बार-बार पानी पीने के बावजूद बहुत प्यास लगती है. इसके लक्षण के तौर पर प्यास लगने के साथ ही मुंह का सूखना और बार-बार पेशाब आना शामिल है. डायबिटीज थर्स्ट का कारण खून में अधिक मात्रा में ग्लूकोज का होना है. इसके इलाज के रूप में टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का इलाज जैसे इंसुलिन थेरेपी, दवाइयों का सेवन और लाइफस्टाइल में बदलाव शामिल हैं. यदि किसी भी व्यक्ति को बार-बार पानी पीने के बावजूद प्यास लगती हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जाती है.   

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