एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर - Acute Stress Disorder in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS,PG Diploma

September 14, 2022

September 14, 2022

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर
एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर (एएसडी) एक मेंटल हेल्थ कंडीशन है, जो किसी दर्दनाक घटना के बाद होती है. यह डिसऑर्डर घटना के कम से कम 3 मिनट बाद शुरू हो सकता है और 30 दिन तक रह सकता है. इसलिए, इसे अस्थायी स्थिति माना जाता है. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ वेटरंस अफेयर्स के अनुसार, दर्दनाक घटना का अनुभव करने वाले लगभग 6 से 33 प्रतिशत लोग एएसडी के लक्षण महसूस कर सकते हैं. एएसडी के लक्षणों का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का रूप ले सकता है. इसलिए, एएसडी को पहचानना जरूरी होता है.

आज इस लेख में आप एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण - Acute Stress Disorder Symptoms in Hindi

कई बार जब किसी व्यक्ति के साथ कोई घटना घटती है, तो वह लंबे समय तक उसके बारे में सोचता रहता है. उस घटना के विचार दिनभर व्यक्ति के दिमाग में चलते रहते हैं, लेकिन जब किसी दर्दनाक घटना के बाद ये लक्षण नजर आए, तो इसे एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर कहा जा सकता है -

घटना को न भूलना

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का सबसे आम लक्षण दर्दनाक घटना को बार-बार याद करना होता है. इस स्थिति में व्यक्ति उस घटना के बारे में बार-बार सोचता है. वह फ्लैशबैक में चला जाता है. वह उस घटना को यादों में या फिर सपनों में भी देख सकता है. इससे व्यक्ति की नींद तक प्रभावित हो सकती है.

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नेगेटिव सोचना

ट्रॉमेटिक इंसिडेंट के बाद व्यक्ति हर समय नेगेटिव सोचता रहे, तो यह एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का लक्षण हो सकता है. इस स्थिति में व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं. वह उदास हो सकता है और तनाव महसूस कर सकता है.

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घटना वाली जगह पर न जाना

जिन लोगों को किसी दर्दनाक घटना के बाद एएसडी होता है. वे अक्सर दोबारा उस स्थान पर जाना पसंद नहीं करते हैं. वे उन विचारों, लोगों और स्थानों से बचते हैं, जो उन्हें दर्दनाक घटना से जोड़ते हैं. इसलिए, इस स्थिति को भी एएसडी का लक्षण माना जा सकता है.

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तनाव में रहना

दर्दनाक घटना के बाद हमेशा तनाव में रहना भी एएसडी का एक लक्षण हो सकता है. इस स्थिति में व्यक्ति को नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई आ सकती है. इतना ही नहीं व्यक्ति घटना के बाद चिड़चिड़ा हो सकता है. एएसडी से पीड़ित लोग हमेशा चिंता, तनाव और डिप्रेशन में रह सकते हैं. 

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भूख न लगना

दर्दनाक घटना के बाद कई लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं. इस स्थिति में उन्हें भूख कम लगती है. साथ ही वजन भी कम होने लगता है. इस स्थिति में उन्हें बेचैनी और थकान महसूस हो सकती है. ये स्थितियां भी एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का लक्षण हो सकती हैं.

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एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर के कारण - Acute Stress Disorder Causes in Hindi

कोई भी दर्दनाक घटना एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का कारण बन सकती है. दरअसल, किसी व्यक्ति में एक या अधिक दर्दनाक घटनाओं का अनुभव करने के बाद एएसडी विकसित हो सकता है. यह दर्दनाक घटना व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक नुकसान का कारण बन सकती है. यह दर्दनाक घटना निम्न प्रकार की हो सकती है -

  • परिवार के किसी सदस्य की मौत
  • गंभीर चोट लगना
  • प्राकृतिक आपदा देखना
  • किसी भी तरह का रोड एक्सीडेंट देखना
  • यौन शोषण या घरेलू हिंसा
  • मस्तिष्क में चोट लगना

वैसे तो किसी भी व्यक्ति में दर्दनाक घटना के बाद एएसडी विकसित हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में एएसडी विकसित होने का जोखिम अधिक रहता है. इनमें शामिल हैं-

  • बार-बार दर्दनाक घटना का अनुभव करने वाले लोगों में
  • मानसिक स्वास्थ्य विकारों का इतिहास वाले लोगों में
  • 40 वर्ष से अधिक उम्र के बाद 
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक

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एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का इलाज - Acute Stress Disorder Treatment in Hindi

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर का इलाज काफी हद तक संभव होता है. एएसडी का इलाज इसके लक्षणों को कम करने और पीटीएसडी को रोकने पर केंद्रित होता है. एएसडी का इलाज इस प्रकार से किया जा सकता है -

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी

इसे सीबीटी के नाम से भी जाना जाता है. एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर के शुरुआती लक्षण नजर आने पर डॉक्टर सीबीटी यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की सलाह दे सकते हैं. सीबीटी एक प्रभावी उपचार हो सकता है. इसमें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए और नकारात्मकता दूर करने के लिए व्यक्ति से बातचीत की जाती है.

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ध्यान लगाना

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर की स्थिति में व्यक्ति में तनाव और डिप्रेशन होने लगता है. वहीं, अनिद्रा की समस्या भी देखने को मिलती है. ध्यान लगाना यानी मेडिटेशन करने से एएसडी के लक्षणों में सुधार किया जा सकता है. तनाव, एंग्जाइटी और अवसाद कम करने के लिए मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना लाभकारी हो सकता है.

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दवाइयां

एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर दवाइयां भी लिख सकते हैं. एंटीडिप्रेसेंट या एंटीकॉन्वेलेंट दवाइयां एएसडी का इलाज करने में मदद कर सकती हैं.

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सारांश – Summary

एएसडी एक सामान्य स्थिति है. यह किसी भी व्यक्ति को तब हो सकती है, जब वह किसी दर्दनाक घटना का अनुभव करता है. इस स्थिति में व्यक्ति में तनाव, अनिद्रा व नेगेटिविटी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. एएसडी का समय पर इलाज करवाना जरूरी होता है, क्योंकि अगर इसका इलाज न करवाया जाए, तो यह पीटीएसडी को विकसित कर सकता है. इसलिए, एएसडी से बचाव के लिए अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से बातचीत करें. साथ ही डॉक्टर से संपर्क करें.

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