आमतौर पर चक्कर आने की समस्या बड़ों को होती है, लेकिन बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं. जहां बड़े बोलकर अपनी समस्या को बता देते हैं, वहीं बच्चों के लिए इस बारे में समझाना मुश्किल हो जाता है. इस समस्या को मेडिकल भाषा में वर्टिगो कहा जाता है. एक अध्ययन में पाया गया है कि 20 में से 1 बच्चे को चक्कर आने की समस्या होती है और चक्कर आने की समस्या से परेशान बच्चों में से 29 प्रतिशत को वर्टिगो के कारण ऐसा होता है.

आज इस लेख में हम बच्चे को चक्कर आने के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में बता रहे हैं -

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  1. बच्चे को चक्कर आने के लक्षण
  2. बच्चे को चक्कर आने के कारण
  3. बच्चे को चक्कर आने का इलाज
  4. सारांश
बच्चे में वर्टिगो के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

बच्चे कई बार अपने स्वास्थ्य में अचानक होने वाले बदलावों को समझ नहीं पाते हैं. ऐसे में माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे अगर कुछ अलग तरह का व्यवहार करते हैं या कुछ असुविधा महसूस करते हैं, तो तुरंत उस पर ऐक्शन लें. इसके लिए जरूरी है कि बच्चे में चक्कर आने के लक्षणों को पहचाना जाए, जो इस प्रकार हैं -

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अगर चक्कर आने की समस्या हो, तो इसके पीछे के कारण का पता होना आवश्यक है. बच्चे को चक्कर आने के सामान्य कारण निम्न प्रकार से हो सकते हैं -

माइग्रेन

वेस्टिबुलर माइग्रेन बच्चों को चक्कर आने सबसे आम कारण है. फिलहाल, यह ठीक से बताना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है, लेकिन आनुवंशिकी भूमिका अहम मानी जा सकती है और ऐसा मस्तिष्क के चारों ओर रक्त वाहिकाओं के कसना के कारण हो सकता है।

बच्चे को चक्कर आने या वर्टिगो के अन्य कारण निम्न प्रकार से हैं -

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कान में संक्रमण

वर्टिगो के पीछे मुख्य कारण कान में संक्रमण को माना गया है. ये संक्रमण दो तरह का हो सकता है -

  • वेस्टिबुलर न्यूरिटिस एक संक्रमण है, जो आमतौर पर कान के अंदर दो वेस्टिबुलर नसों में से एक में होता है. ये नसें मस्तिष्क को शरीर को संतुलित बनाने के लिए संदेश देती हैं, लेकिन इसमें आई सूजन के कारण कार्यप्रणाली बाधित हो सकती है. वेस्टिबुलर न्यूरिटिस फ्लूचिकन पॉक्सखसरा व रूबेला जैसे संक्रमणों के कारण हो सकता है.
  • लैबीरिंथाइटिस भी एक संक्रमण है जो आमतौर पर वायरल होता है और कभी-कभी बैक्टीरियल भी हो सकता है. यह वेस्टिबुलर और कॉकलियर नसों को प्रभावित करता है. यह वर्टिगो के साथ-साथ सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है.

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बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी)

बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो तब होता है, जब कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल कान के एक हिस्से से सेमीसर्कुलर कैनाल में चले जाते हैं, जिससे फ्लूड से भरी ट्यूब में रुकावट आती है. ये फ्लूड ही होता है, जो शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है. बच्चों में ऐसा होना आम है. आमतौर पर 2 या 3 वर्ष की आयु के बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं.

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बच्चे के चक्कर आने का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है. अगर बच्चे को कान में संक्रमण के कारण चक्कर आ रहे हैं, तो डॉक्टर बच्चे को ईएनटी डॉक्टर के पास लेकर जाने के लिए कह सकते हैं. इसके अलावा, बच्चे के शारीरिक संतुलन को चेक किया जा सकता है. जरूर के अनुसार डॉक्टर बच्चे के और टेस्ट भी कर सकते हैं और उनकी रिपोर्ट के अनुसार इलाज करते हैं.

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बच्चे में चक्कर आने की समस्या को अनदेखा बिल्कुल न करें और अगर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो डॉक्टर से बात करें. हो सकता है कभी-कभी सामान्य कारणों से या बच्चे के अधिक खेलकूद करने से थकावट के कारण चक्कर आ जाए, तो इसमें घबराने की जरूरत नहीं है. अगर यही बार-बार हो, तो सतर्क हो जाएं और एक्सपर्ट से बात करें.

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