गोदन्ती भस्म एक आयुर्वेदिक दवा है. आयुर्वेद में इस दवा का उपयोग कई तरह के रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है. गोदन्ती भस्म दर्द, बुखार, जलन और खांसी जैसे रोगों को दूर करने में असरदार होती है. गोदन्ती भस्म को बनाते समय इसकी सामग्री का लगभग एक चौथाई भाग नष्ट कर दिया जाता है. इसे विश्वभर में जिप्सम के रूप में जाना जाता है, जो काफी नरम होता है. यह एक सफेद और क्रिस्टलीय मिनरल है.

इस लेख में आप गोदन्ती भस्त के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. गोदन्ती भस्म के फायदे
  2. गोदन्ती भस्म के नुकसान
  3. सारांश
गोदन्ती भस्म के फायदे व नुकसान के डॉक्टर

आयुर्वेद में गोदन्ती भस्स को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है. गोदन्ती में शीतल गुण होते हैं. इसके साथ ही गोदन्ती भस्म में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को दूर कर सकते हैं. गोदन्ती भस्म के फायदे निम्न प्रकार से हैं -

कैल्शियम की कमी दूर करे

अगर शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो गोदन्ती भस्म का उपयोग किया जा सकता है. गोदन्ती भस्म में कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है. इसे लेने से शरीर में कैल्शियम की पूर्ति होती है. यह कैल्शियम की कमी से होने वाली समस्याओं जैसे हड्डियों में दर्द व ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज कर सकता है. गोदन्ती भस्म एक कैल्शियम सप्लीमेंट के रूप में काम करता है.

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व्हाइट डिस्चार्ज में लाभकारी

ल्यूकोरिया महिलाओं को होने वाली आम समस्या है. इसे आम भाषा में व्हाइट डिस्चार्ज होना भी कहते हैं. गोदन्ती भस्म का उपयोग करके इस समस्या को ठीक किया जा सकता है. इसके अलावा, गोदन्ती भस्म रक्तस्राव विकार में भी लाभकारी होती है.

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पेप्टिक अल्सर रोग

गोदन्ती भस्म को पेट के लिए फायदेमंद माना गया है. पेट से जुड़े रोगों के इलाज में गोदन्ती भस्म का उपयोग किया जा सकता है. यह पेप्टिक अल्सर में लाभकारी हो सकती है. इसके अलावा, यह भस्म अपच, हाइपरएसिडिटी और डायरिया में भी असरदार हो सकती है.

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बुखार ठीक करे

गोदन्ती भस्म का उपयोग बुखार को ठीक करने के लिए भी किया जा सकता है. इसमें ज्वरनाशक गुण होते हैं, जो शरीर के तापमान को कम करने में मदद कर सकते हैं. गोदन्ती भस्म टाइफाइड बुखार में भी असरदार साबित हो सकती है.

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एंटीमाइक्रोबियल गुणों से भरपूर

गोदन्ती भस्म एंटीमाइक्रोबियल गुणों से भरपूर होती है. रिसर्च से पता चला है कि गोदन्ती भस्म को अगर किसी अन्य रस द्रव्य के साथ मिलाकर लिया जाता है, तो यह रोगजनक बैक्टीरिया के खिलाफ अच्छी तरह से काम कर सकती है. गोदन्ती भस्म बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी रूप से काम करती है.

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माइग्रेन में उपयोगी

गोदन्ती भस्म माइग्रेन के इलाज में भी उपयोगी हो सकती है. रिसर्च में भी साबित हुआ है कि गोदन्ती भस्म से माइग्रेन सिरदर्द में आराम मिल सकता है. अगर किसी को सिरदर्द रहता है, तो वो डॉक्टर की सलाह पर गोदन्ती भस्म का सेवन कर सकता है.

एक रिसर्च में प्रतिभागियों को 500 मिलीग्राम शिरशुलादि वज्र रस, 500 मिलीग्राम गोदन्ती भस्म और 20 मिली पथ्यादि क्वाथ दिन में 2 बार चार सप्ताह तक दी गई. इलाज के बाद प्रतिभागी रोगियों में माइग्रेन के लक्षणों में काफी सुधार देखने को मिला.

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अगर गोदन्ती भस्म का उपयोग कम मात्रा में किया जाता है, तो यह काफी फायदेमंद होती है. वहीं, लंबे समय तक गोदन्ती भस्म का सेवन करने से शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है. इसलिए, इसकी डोज हमेशा डॉक्टर की राय पर ही लेनी चाहिए. गोदन्ती भस्म से होने वाले नुकसान के संबंध में जानकारी न के बराबर है.

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आयुर्वेद में गोदन्ती भस्म का उपयोग कई समस्याओं को दूर करने के लिए दवा के रूप में किया जाता है. यह बुखार, सिरदर्द, अल्सर और व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या में लाभकारी हो सकती है. इसके अलावा, गोदन्ती भस्म शरीर में कैल्शियम की कमी को भी पूरा कर सकती है, लेकिन इसका सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए.

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