ऑक्सीडेटिव तनाव - Oxidative stress in Hindi in Hindi

Dr. Anurag Shahi (AIIMS)MBBS,MD

March 17, 2021

March 18, 2021

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
ऑक्सीडेटिव तनाव
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

ऑक्सीडेटिव तनाव का मतलब शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) और एंटीऑक्सीडेंट के बीच असंतुलन होना है, जिससे कोशिका और ऊतकों को नुकसान हो सकता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस स्वाभाविक रूप से होता है और यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सबूतों से पता चला है कि लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव तनाव की स्थिति क्रोनिक कंडीशन जैसे कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग से घातक बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। इस लेख में, हम जानेंगे कि ऑक्सीडेटिव तनाव क्या है, यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है, जोखिम कारक और इसे कैसे कम किया जाए।

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ऑक्सीडेटिव तनाव है क्या - What is Oxidative stress in Hindi

शरीर की कोशिकाएं चयापचय प्रक्रियाओं के दौरान मुक्त कणों का उत्पादन करती हैं। हालांकि, यह कोशिकाएं एंटीऑक्सीडेंट भी उत्पन्न करती हैं, जो इन मुक्त कणों को बेअसर करती हैं। सामान्य तौर पर, शरीर एंटीऑक्सीडेंट और मुक्त कणों के बीच संतुलन बनाए रखने में सक्षम होता है, लेकिन जब किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाता है, तो इस स्थिति को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस या ऑक्सीडेटिव तनाव के नाम से जाना जाता है। ऐसे कई कारक हैं, जिनकी वजह से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हो सकता है और मुक्त कणों की संख्या ज्यादा हो सकती है। इन कारकों में शामिल हो सकते हैं :

  • आहार
  • जीवनशैली
  • कुछ विशेष​ स्थितियां
  • पर्यावरणीय कारक जैसे प्रदूषण और रेडिएशन

शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भी अस्थायी रूप से ऑक्सीडेटिव तनाव को ट्रिगर कर सकती है। इस प्रकार के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से हल्की सूजन होती है, जो तब ठीक होती है जब प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया चोट को ठीक कर देती है।

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ऑक्सीडेटिव तनाव के अनियंत्रित होने से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और इसकी वजह से कई समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें से कुछ नि​म्नलिखित हैं :

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ऑक्सीडेटिव तनाव के लिए जोखिम कारक - Oxidative stress risk factor in Hindi

किसी व्यक्ति में लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव तनाव के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं :

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ऑक्सीडेटिव तनाव की रोकथाम और प्रबंधन - Oxidative stress management and prevention in Hindi

ऑक्सीडेटिव तनाव से बचना मुश्किल है। हालांकि, कुछ ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिनसे शरीर पर ऑक्सीडेटिव तनाव के प्रभावों को कम किया जा सके। इसके प्रबंधन में एंटीऑक्सीडेंट के स्तर को बढ़ाना शामिल है, जिससे मुक्त कणों की संख्या में कमी आ सकती है।

ऑक्सीडेटिव तनाव को रोकने का एक तरीका यह है कि आहार में पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट लिया जाए। इसके लिए दिन में पांच बार अलग-अलग तरह के फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, इससे शरीर को एंटीऑक्सीडेंट का उत्पादन करने में मदद मिल सकती है। ऐसे फल और सब्जियों के उदाहरणों में जामुनचेरी, खट्टे फल, आलूबुखारा, गहरे हरे रंग का पत्तेदार साग, ब्रोकली, गाजर, टमाटर, जैतून शामिल हैं। आहार संबंधी एंटीऑक्सीडेंट स्रोतों के अन्य उदाहरणों में मछली और नट्स्, विटामिन ई, विटामिन सी, हल्दी, ग्रीन टी, मेलाटोनिन, प्याज, लहसुन, दालचीनी शामिल हैं।

इसके अलावा जीवनशैली में बदलाव करके भी ऑक्सीडेटिव तनाव को रोका जा सकता है या कम किया जा सकता है।

नियमित रूप से मध्यम तीव्रता के व्यायाम करें। इससे प्राकृतिक तौर पर एंटीऑक्सीडेंट मिलता है और यह ऑक्सीडेटिव तनाव की वजह से होने वाले नुकसान को भी कम करता है।

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धूम्रपान न करें और धूम्रपान कर रहे लोगों के बीच रहकर उनके धुंए के संपर्क में न आएं।

रसायनयुक्त चीजों का इस्तेमाल न करें। रेडिएशन के संपर्क में न रहें। इसके अलावा पेस्टिसाइड या बागवानी में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशक के संपर्क में न रहें।

सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। सनस्क्रीन आपकी त्वचा को पराबैंगनी रोशनी से होने वाले नुकसान से बचाता है।

शराब का सेवन कम करें, नींद पूरी लें और ओवरईटिंग से बचें। अध्ययनों से पता चला है कि कम मात्रा में व थोड़ी-थोड़ी देर पर खाने वालों के मुकाबले उन लोगों में जो ज्यादा व लगातार भोजन करते हैं उनमें ऑक्सीडेटिव तनाव का जोखिम बना रहता है।

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ऑक्सीडेटिव तनाव के डॉक्टर

Dt. Akanksha Mishra Dt. Akanksha Mishra पोषणविद्‍
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