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यूरोप और अमेरिका के बाद अब भारत में भी कोविड-19 बीमारी से ग्रस्त बच्चों में कावासाकी बीमारी के लक्षण दिखाए दिए हैं। इन लक्षणों को लेकर यूरोप और अमेरिका में एक 'रहस्यमय' सिंड्रोम से जोड़ कर देखा गया था। कई जानकारों का कहना था कि ये लक्षण बच्चों को होने वाली कावासाकी बीमारी के हैं, लेकिन इसे कावासाकी मानने से कई अन्य जानकार इनकार करते हैं। बहरहाल, इस दुर्लभ सिंड्रोम के लक्षण अब भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित छोटी उम्र के मरीजों में भी दिख रहे हैं। प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कोरोना संक्रमित बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई दिए हैं।

एक मामले का जिक्र करते हुए अखबार ने बताया है कि मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में एक 14 वर्षीय बच्ची को लाया गया था, जिसे तेज बुखार था और उसकी त्वचा पर लाल चकत्ते दिख रहे थे। ये दोनों कावासाकी के लक्षण हैं। बाद में बच्ची कोविड-19 से ग्रस्त पाई गई। बीते शुक्रवार तक उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था। अस्पताल के डॉक्टरों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्ची को टोसिलिजुमैब और इम्युनोग्लोबुलिंस ड्रग्स के हाई डोज दिए जा रहे हैं। उन्हें संदेह है कि बच्ची के शरीर में वायरस उसके पिता से आया था, जो पिछले हफ्ते ही कोविड-19 टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे।

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अप्रैल में पहली बार सामने आए मामले
कोविड-19 से ग्रस्त बच्चों में कावासाकी बीमारी के लक्षण सबले पहले अप्रैल में ब्रिटेन में सामने आए थे। तब वहां अचानक दर्जन भर बच्चों को शरीर के कई हिस्सों में तेज सूजन के चलते आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था। बाद में ऐसे मामले पूरे यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, इटली और अमेरिका में भी सामने आए थे। जानी-मानी स्वास्थ्य पत्रिका जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिशन या जामा ने कोरोना वायरस और कावासाकी से ग्रस्त 58 बच्चों का अध्ययन करने के बाद इस दुर्लभ कॉम्बिनेशन को 'कोविड-19 से जुड़ा पेडियाट्रिक इन्फ्लेमेटरी मल्टीसिस्टम सिंड्रोम' बताया था। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे 'मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम' कहा है।

हालांकि, अध्ययनों और चर्चाओं के बाद भी इस रहस्यमय बीमारी को औपचारिक नाम नहीं दिया जा सका है। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिंड्रोम कावासाकी रोग से मिलता है, लेकिन यह कावासाकी नहीं है। मुंबई के जिस अस्पताल में 14 वर्षीय पीड़िता का इलाज चल रहा है, उसमें बच्चों को होने वाले संक्रामक रोगों की एक विशेषज्ञ ने कहा, 'यह कावासाकी नहीं है, लेकिन उससे मिलती-जुलती है। कोविड-19 होने के बाद बच्चों में आमतौर पर दो-तीन हफ्तों बाद इसके लक्षण दिखते हैं।'

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मौजूदा मामले में इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम से ग्रस्त बच्ची को लेकर इस डॉक्टर ने बताया, '(इस सिंड्रोम से ग्रस्त) बच्चों की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। उसे (पीड़िता) हमारे पास जल्दी लाया गया था, इसलिए हम उसकी हालत दो दिन में ही स्थिर करने में कामयाब रहे। लेकिन उसकी हालत फिर बिगड़ गई है।' डॉक्टर ने कहा कि पीड़िता के शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की मात्रा काफी ज्यादा है (जो संक्रमण का संकेत है) और ब्लड प्रेशर भी कम है।

इस विशेषज्ञ के मुताबिक, उसने मुंबई में ही ऐसे दो और केस देखे हैं, जिनमें बच्चों को तेज बुखार, सूजन और त्वचा पर लाल चकत्तों की शिकायत थी। हालांकि, उनके कोरोना वायरस के टेस्ट नेगेटिव निकले थे। उधर, मुंबई स्थित एक और अस्पताल बाई जेरबाई वाडिया हॉस्पिटल के सीईओ डॉ. मिनी बोधानवाला ने भी इसी तरह के मामले सामने आने की पुष्टि की है। वहीं, केईएम अस्पताल में बाल रोग विभाग के प्रमुख ने भी कहा कि उन्होंने भी बच्चों में कोविड-19 के साथ कावासाकी बीमारी के लक्षण होने से जुड़े मामले देखे हैं।

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क्या है कावासाकी?
यह एक ऐसी बीमारी है जो ज्यादातर बच्चों को ही होती है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे कावासाकी का शिकार होते हैं। इस बीमारी को म्यूकोक्यूटेनियस लिम्फ नोड सिंड्रोम भी कहा जाता है, जो बच्चों में दिल की बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक है। हालांकि इस रोग का जल्दी पता चल जाने पर इसका इलाज किया जा सकता है। बताया जाता है कि अधिकांश बच्चे इस बीमारी से स्वस्थ हो जाते हैं।

कावासाकी रोग क्यों होता है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। शोधकर्ताओं की मानें तो इसके कारणों के पीछे जेनेटिक और पर्यावरणीय कारक शामिल हैं। माना जाता है कि यह आमतौर पर किसी खास मौसम में होता है, लेकिन यह एक बच्चे से दूसरे बच्चों में नहीं फैलता है। इसके लक्षणों में त्वचा पर लाल चकत्ते, गर्दन में सूजन, सूखे और फटे होंठ, आंखें लाल होना आदि शामिल हैं।

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